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सुलग रहा थेहड़ : आशियाने को बचाने के लिए शुरू की तैयारियां
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Fri, 27 May 2016 11:32 PM IST
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थेहड़ मोहल्ला
- फोटो : Bureau
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बेघर होने के कगार पर खड़े थेहड़वासियों में प्रशासन व सरकार के खिलाफ नफरत की चिंगारी सुलगने लगी है। 25 मई की घटना के बाद से 25 हजार थेहड़वासियों को अंदाजा हो गया है कि जिला प्रशासन थेहड़ खाली करवाने के लिए पुलिस बल के प्रयोग से चूकेगा नहीं। ऐसे में थेहड़वासियों ने घरों और अपनी सुरक्षा के प्रबंध शुरू कर दिए हैं। सरकारी अमले से मुकाबला किसी प्रकार से आसान नहीं पर अंतिम सांस तक अपने आशियाने को बचाने की तैयारियां जारी हैं।
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थेहड़ वासियों का कहना है कि 13 जून को प्रशासन के नोटिस की आखिरी तारीख है। उन्हें अंदाजा है कि प्रशासन इससे पहले ही थेहड़ खाली कराने के लिए लोगों पर दबाव बनाना शुरू कर देगा। प्रशासन बिजली व पानी की सप्लाई बंद कर सकता है। ऐसे में चाहकर भी थेहड़वासी चुपचाप नहीं बैठ सकते। थेहड़ पर स्थिति यह है कि बच्चे, बूढ़े और जवानों की जुबान पर एक ही बात है कि सरकार उन्हें बेघर करने वाली है। परिवार के मुखिया को यही चिंता सता रही है कि आशियाने को बचाने का जतन करूं या फिर परिवार का पेट पालने के लिए काम पर जाऊं।
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थेहड़ नौजवानों में पुलिस द्वारा बल प्रयोग के बाद आक्रोश ज्यादा बढ़ गया है। थेहड़ के कुछ नौजवानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस विभाग ने सादी वर्दी में अपने मुखबिर थेहड़ में छोड़ रखे हैं। मुखबिर के जरिए युवाओं के नाम और हर गतिविधि की टोह ली जा रही है। युवाओं का कहना है पुलिस ने लाठी चार्ज के उपरांत जो केस दर्ज किया उसमें झूठे नाम दर्ज किए गए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने थेहड़ खाली करवाने के लिए जबरदस्ती की तो उसको मुंह तोड़ जवाब देंगे। थेहड़ के हालात को भांपते हुए जिला प्रशासन का मोटिवेशन अभियान दो दिनों से बंद पड़ा है।
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थेहड़ पर राजनीति कर रहे हैं नेता
आशियानों को लेकर चिंतित हजारों थेहड़वासियों को उनका सच्चा हितैषी बताने के लिए राज नेताओं में होड़ लगी हुई है। भाजपा नेता जगदीश चोपड़ा से लेकर जिलाध्यक्ष यतिंद्र सिंह थेहड़ पर जाकर भाषण दे चुके हैं कि उन्हें बेघर नहीं होने देंगे। हलोपा नेता गोबिंद कांडा थेहड़ में कई नुक्कड़ सभा करके उनको भरोसा दिया कि अंतिम सांस तक उन्हें उजड़ने नहीं देंगे। थेहड़ संघर्ष समिति की प्रधान एडवोकेट संजू बाला का कहना है कि नेता राजनीतिक रोटियां सेक कर लोगों को गुमराह करने में लगे हैं। वोट के लिए नेताओं ने कभी लोस चुनाव तो कभी विस चुनाव में थेहड़वासियों को गुमराह किया गया। उन्होंने कहा कि थेहड़ मसला कानूनी है और हाईकोर्ट से ही राहत मिल सकती है। थेहड़ वासियों के लिए वही सच्चा नेता होगा जो उनके लिए हाईकोर्ट से स्टे लेकर आएगा। संजू बाला ने कहा कि एचसी के फैसले की कॉपी उन्हें मिल गई है। डबल बेंच में फैसले को चुनौती दी जाएगी।
प्रशासन को दिखानी चाहिए थी सहनशीलता
25 मई की दोपहर को केलनियां रोड पर थेहड़वासियों व पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद पुलिस ने काफी नामजद व सैकड़ों अज्ञात के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं। नामजद लोगों में थेहड़ निवासी जग्गा मजबी, बग्गा, गुरदेव, लीला सैनी, पवन कुमार गुर्जर, सुनील वाल्मीकि, मुकेश दर्जी, सोनू बाबा, सुनील, ज्याणी, कमल, सुभाष वाल्मीकि, विक्की वाल्मीकि, करतुनिया, छीना, कमलेश थेहड़, कमलेश किराएदार को नामजद आरोपियों में शामिल किया है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं विस चुनाव में सिरसा से कांग्रेसी प्रत्याशी रहे नवीन केडिया का कहना है कि थेहड़वासी अपने आशियानों को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे थे। उनका क्रोधित होना सामान्य है। जब किसी के सिर से छत छिन रही हो तो उसे आवेश तो आएगा लेकिन प्रशासन को संयम दिखाना चाहिए था। लाठी चार्ज के बाद नौजवानों पर केस दायर करना ठीक नहीं। संघर्ष समिति की अध्यक्ष एडवोकेट संजू बाला का कहना है कि थेहड़वासियों की दशा प्रशासन से छिपी नहीं है। बेघर होने का दर्द समझकर प्रशासन को ज्यादा सहनशीलता दिखानी चाहिए थी। लाठी चार्ज किसी समस्या का हल नहीं। नौजवानों पर केस दर्ज नहीं करने चाहिए थे।
3046 परिवारों को दिए हैं नोटिस
प्रशासन की तरफ से थेहड़ के 3040 परिवारों को नोटिस देकर 13 जून तक अपने मकान खाली करने का आदेश दिया गया है। थेहड़वासियों ने तीन बार सड़कों पर प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। लोगों का कहना है कि उन्हें घर से बेघर न किया जाए। दशकों पहले थेहड़ पर जब लोग मकान बना रहे थे, तब क्यों नहीं उन्हें रोका गया। सरकार ने थेहड़वासियों को हर प्रकार की सरकारी सुविधाएं दी हैं। नगर परिषद की तरफ से यहां रहने वालों से हाउस टैक्स वसूल किया जाता है।