फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   sirsa, hindi news, collage, sirsa

45 शिक्षकों स्थान पर मात्र आठ शिक्षक वो भी उधार से लिए हुए

Sun, 20 Nov 2016 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा Updated Sun, 20 Nov 2016 11:57 PM IST
विज्ञापन
sirsa, hindi news, collage, sirsa
डीएवी कालेज में अमर उजाला की ओर से आयोजित मतदाता जागरुकता में मौजूद छात्र-छात्राएं।
क्रेंद और प्रदेश सरकार की ओर से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा सिरसा के महिला कॉलेज में छात्राओं से साथ बेमानी सा लग रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस कॉलेज को अस्तित्व में आए हुए डेढ़ साल हो गया है पर अब तक यहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है। छात्राओं की संख्या के अनुसार यहां पर 45 शिक्षक होने चाहिए। मात्र आठ शिक्षक हैं वो भी दूसरे कॉलेजों से डेपुटेशन पर आए हैं। ऐसे में छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे में छात्राओं को अपने दम पर ही पढ़ कर परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं। अब 26 नवंबर से फिर परीक्षाएं शुरू हैं, ऐसे में छात्राओं की नैया कैसे पार लगेगी यह तो राम भरोसे ही है।
विज्ञापन

बेटियों की पढ़ाई को लेकर चिंतित शहर वासियों की लंबी मांग पर प्रदेश सरकार ने शहर में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए नए राजकीय महिला कॉलेज की मांग को तो पूरा कर दिया पर इस कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। जिस कारण हजारों छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
विज्ञापन

सरकार ने 11.88 करोड़ रुपए की लागत से महिला कॉलेज का नया भवन भी बनवाया है, जिसका निर्माण अब अंतिम अवस्था में हैं। महिला कॉलेज की छात्राओं को पढ़ाई करवाने के लिए नियमित प्राध्यापकों को लगाना तो दूर इनका एक पद ही स्वीकृत नहीं किया है। इतना ही नहीं कॉलेज में तो प्राचार्य ही नियमित रूप से नहीं लगाया गया है। फतेहाबाद के भोड़ियाखेड़ा स्थित सरकारी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. स्नेहा नंदा को ही इसका अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे सप्ताह में तीन दिन ही यहां आ पाती हैं। प्रदेश सरकार की इसी लापरवाही का नतीजा है कि राजकीय महिला कॉलेज की छात्राएं उधार लिए गए प्राध्यापकों के माध्यम से अपना पाठ्यक्रम पूरा करने को मजबूर हैं। प्राचार्य भी नियमित न मिलने के कारण उनकी आधारभूत समस्याओं का समाधान भी नहीं हो पाता। इस मामले में प्राचार्या डॉ. स्नेह नंदा ने कहा कि शिक्षकों की व गैर शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला सरकार स्तर का होता है इसमें वे कुछ नहीं कर सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन


गौरतलब है कि राजकीय नेशनल कॉलेज की विंग में पढ़ने वाली छात्राओं की बरसों पुरानी मांग को पूरा करते हुए सीएम तत्काल मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा ने शहर में राजकीय महिला कॉलेज बनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद भाजपा सरकार ने तीन जून 2015 को राजकीय महिला कॉलेज की स्थापना की। लेकिन इन डेढ़ वर्षों के कार्यकाल में अब तक सरकार द्वारा यहां पर नियमित प्राध्यापक का एक भी पद स्वीकृत नहीं किया है। इन डेढ़ वर्षों में बीए व बीकॉम में पढ़ने वाली यहां की छात्राओं का पाठ्यक्रम पूरा करवाने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग समय-समय पर डेपुटेशन के माध्यम से यहां पर प्राध्यापकों को भेजता आ रहा है। इनकी संख्या भी एक कॉलेज के लिए नियमों के तहत लगाए जाने वाले प्राध्यापकों की संख्या का पांचवां हिस्सा ही हैं। कॉलेज में नियमित प्राध्यापकों के पद स्वीकृत करने तथा नियमि प्राध्यापक भेजे जाने के लिए कॉलेज प्रशासन द्वारा उच्चतर शिक्षा विभाग, सीएम के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा, भाजपा की अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. गणेशीलाल को अनेक बार मांग पत्र सौंपे, लेकिन आज तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया।


भवन भी जर्जर
पहले महिला विंग के तौर पर और अब डेढ़ साल से महिला कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं की पढ़ाई तो दूर की बात है। उनकी जिंदगी भी दांव पर है। वे जिस भवन में पढ़ रही हैं उस भवन को 15 साल पूर्व कंडम घोषित कर खाली करवा लिया गया था। अंग्रेजों के जमाने में बना यह भवन खंडहर बन चुका है। गनीमत यह रही कि अब तक कोई हादसा नहीं हुआ। कभी भी खंडहर भवन गिर सकता है। ऐसे में हजारों छात्राओं की जिंदगी भी दांव पर जिस ओर किसी का ध्यान नहीं है।

45 नियमित शिक्षकों की जगह मात्र आठ डेपुटेशन पर
छात्राओं की प्रत्येक विषय में संख्या के अनुसार जो वर्कलोड अनुसार कॉलेज में अंग्रेजी के 9, इतिहास के 2, गणित के 3, वाणिज्य के 6, भूगोल के 7, अर्थशास्त्र के 2, हिंदी के 4, लोक प्रशासन के 1, राजनीतिक शास्त्र के 2, पर्यावरण विज्ञान के 1, मनोविज्ञान के 4, शारीरिक शिक्षा के 3 तथा पंजाबी का 1 प्राध्यापक होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में इस कॉलेज में डेपुटेशन पर केवल वाणिज्य, राजनीतिक शास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास का एक-एक प्राध्यापक तथा अंग्रेजी के दो प्राध्यापक ही हैं। अभी हाल ही में कॉलेज की पहली खेलकूद प्रतियोगिता के कारण केवल शारीरिक शिक्षा विभाग की एक प्राध्यापिका को मात्र तीन दिन के लिए ही आदमपुर से यहां डेपुटेशन पर भेजा गया था, जो कि अब वापिस जा चुकी हैं।


विद्यार्थी-प्राध्यापक की वास्तविक स्थिति
विषय                    विद्यार्थी संख्या   जरूरी पद   डेपुटेशन    रिक्त
अंग्रेजी                  1433              9           2     7
हिंदी                     1249             4             0     4
गणित                    341              3     0    3
इतिहास                    452               2    1    1
वाणिज्य                    404               6    1    5
भूगोल                        449               7    1    6
अर्थशास्त्र                    580               2    1    1
लोक प्रशासन                152               1    0    1
राजनीतिक शास्त्र            465               2    1    1
पर्यावरण विज्ञान                698        1    0    1
मनोविज्ञान                    229        4    1    3
शारीरिक शिक्षा                1651       3    0    3
पंजाबी                    200               1    0    1

कुल                      45    8    37
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed