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Sirsa News: रानियां, सिरसा, ऐलनाबाद में सैलजा गुट के हाथ खाली
Fri, 13 Sep 2024 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 13 Sep 2024 12:51 AM IST
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सिरसा। विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों के प्रत्याशियों के घोषित होने के बाद हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस की सूची में तीन विधानसभा सीटों रानियां, सिरसा और ऐलनाबाद में कुमारी सैलजा गुट के नेताओं के हाथ खाली रह गए हैं। सभी दावेदारों के चेहरों पर टिकट न मिलने का मलाल देखने को मिला।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कुमारी सैलजा को सिरसा की पांचों विधानसभा सीटों से जीत हासिल हुई थी। इससे कांग्रेस की हवा बनी और कांग्रेसियों में एकता देखने को मिली थी। हालांकि विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने पुराने कद्दावर नेताओं को भूलकर इनेलो छोड़कर आए सिरसा से गोकुल सेतिया और रानियां में नए नेता सर्वमित्र कंबोज को टिकट दिया है। दोनों सीटों पर कांग्रेस के बड़े नेताओं को मायूसी हाथ लगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभान मेहता ने समर्थकों की बैठक बुलाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने के मसले पर विराम लगा दिया। हालांकि चुनाव में पार्टी प्रत्याशी गोकुल सेतिया का समर्थन करने से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी से जुड़े रहेंगे, लेकिन प्रत्याशी का समर्थन नहीं करेंगे। मेहता ने कहा कि कांग्रेस ने एक अहंकारी को टिकट दिया है, जो कल तक कहता था कि उसे किसी पार्टी की जरूरत नहीं है। कांग्रेस की 89 सीट और हैं, जहां पर पार्टी कहेगी, वहां पर प्रचार करेंगे।
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भरत के नामांकन में नहीं दिखे दोनों बैनीवाल नेता
ऐलनाबाद सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर भरत सिंह बैनीवाल पर अपना दांव खेला है। पवन बैनीवाल, संतोष बैनीवाल को छोड़कर हुड्डा गुट से लंबे समय से जुड़े हुए भरत सिंह बैनीवाल को प्रत्याशी बनाया गया है। भरत सिंह ने वीरवार को अपने समर्थकों के साथ नामांकन भरा। इस दौरान संतोष बैनीवाल, पवन बैनीवाल नजर नहीं आए। तीनों बैनीवाल के एकजुट होने से ही कुमारी सैलजा को लोकसभा चुनाव में जीत मिली थी। अब आपसी एकता में आई दरार विधानसभा सीट पर क्या असर डालेगी यह आने वाला वक्त बताएगा।
नाराज कांग्रेसी बोले - सोचा नहीं था, पार्टी ऐसा करेगी
कार्यकर्ताओं का अंदरखाने कहना है कि रानियां में कांग्रेस की ओर से कमजोर प्रत्याशी उतारने के सीधे मायने चौधरी रणजीत सिंह को मजबूत किया गया है। कार्यकर्ताओं की माने तो सोच समझ कर कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने यह चाल चली है। रणजीत सिंह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ अच्छे संबंध हैं। टिकट नहीं मिलने पर एक दावेदार ने कहा कि पार्टी के साथ इतनी मेहनत की थी, परंतु टिकट के समय में ऐसा करेगी, सोचा नहीं था। अब समझ नहीं आता है क्या करेंगे। कुछ वक्त खुद को देंगे और फिर कोई निर्णय लेंगे।
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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कुमारी सैलजा को सिरसा की पांचों विधानसभा सीटों से जीत हासिल हुई थी। इससे कांग्रेस की हवा बनी और कांग्रेसियों में एकता देखने को मिली थी। हालांकि विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने पुराने कद्दावर नेताओं को भूलकर इनेलो छोड़कर आए सिरसा से गोकुल सेतिया और रानियां में नए नेता सर्वमित्र कंबोज को टिकट दिया है। दोनों सीटों पर कांग्रेस के बड़े नेताओं को मायूसी हाथ लगी।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभान मेहता ने समर्थकों की बैठक बुलाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने के मसले पर विराम लगा दिया। हालांकि चुनाव में पार्टी प्रत्याशी गोकुल सेतिया का समर्थन करने से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी से जुड़े रहेंगे, लेकिन प्रत्याशी का समर्थन नहीं करेंगे। मेहता ने कहा कि कांग्रेस ने एक अहंकारी को टिकट दिया है, जो कल तक कहता था कि उसे किसी पार्टी की जरूरत नहीं है। कांग्रेस की 89 सीट और हैं, जहां पर पार्टी कहेगी, वहां पर प्रचार करेंगे।
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भरत के नामांकन में नहीं दिखे दोनों बैनीवाल नेता
ऐलनाबाद सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर भरत सिंह बैनीवाल पर अपना दांव खेला है। पवन बैनीवाल, संतोष बैनीवाल को छोड़कर हुड्डा गुट से लंबे समय से जुड़े हुए भरत सिंह बैनीवाल को प्रत्याशी बनाया गया है। भरत सिंह ने वीरवार को अपने समर्थकों के साथ नामांकन भरा। इस दौरान संतोष बैनीवाल, पवन बैनीवाल नजर नहीं आए। तीनों बैनीवाल के एकजुट होने से ही कुमारी सैलजा को लोकसभा चुनाव में जीत मिली थी। अब आपसी एकता में आई दरार विधानसभा सीट पर क्या असर डालेगी यह आने वाला वक्त बताएगा।
नाराज कांग्रेसी बोले - सोचा नहीं था, पार्टी ऐसा करेगी
कार्यकर्ताओं का अंदरखाने कहना है कि रानियां में कांग्रेस की ओर से कमजोर प्रत्याशी उतारने के सीधे मायने चौधरी रणजीत सिंह को मजबूत किया गया है। कार्यकर्ताओं की माने तो सोच समझ कर कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने यह चाल चली है। रणजीत सिंह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ अच्छे संबंध हैं। टिकट नहीं मिलने पर एक दावेदार ने कहा कि पार्टी के साथ इतनी मेहनत की थी, परंतु टिकट के समय में ऐसा करेगी, सोचा नहीं था। अब समझ नहीं आता है क्या करेंगे। कुछ वक्त खुद को देंगे और फिर कोई निर्णय लेंगे।