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Sirsa News: कलश यात्रा निकालकर किया संत कुटीर का लोकार्पण
Tue, 24 Feb 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 24 Feb 2026 11:40 PM IST
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फूलकां गोशाला में नृसिंह महापुराण कथा से पूर्व निकली कलश यात्रा
फोटो - - - 36
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। श्री स्वामी लक्ष्येश्वर आश्रम गोसेवा सदन, फूलकां में आयोजित नृसिंह महापुराण कथा एवं दुर्लभ सत्संग से पूर्व मंगलवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ कलश यात्रा निकाली गई।
यात्रा का शुभारंभ गांव स्थित ठाकुर मंदिर से हुआ। महिलाएं सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन करते हुए मुख्य गलियों से गुजरीं। यात्रा पुनः गोशाला परिसर स्थित कथा स्थल पर संपन्न हुई। गोशाला प्रधान रविंद्र कुलड़िया ने बताया कि धार्मिक आयोजन का उद्देश्य समाज में आस्था, सद्भाव और गोसेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसके उपरांत गोशाला प्रांगण में नवनिर्मित संत कुटीर भवन का लोकार्पण कथाव्यास स्वामी नित्यानंद गिरि महाराज व जयदेव-सहदेव चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं समाजसेवी ललित जैन ने किया।
स्वामी नित्यानंद गिरि महाराज ने भगवान नृसिंह अवतार की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ऋषि कश्यप और दीति के पुत्र हिरण्याक्ष व हिरण्यकश्यप थे। हिरण्याक्ष के वध के बाद हिरण्यकश्यप ने कठोर तप कर वरदान प्राप्त किया और अत्याचारी बन बैठा। वह स्वयं की पूजा करवाता तथा भगवान विष्णु के भक्तों को दंडित करता था।
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स्वामी ने कहा कि हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। पिता के विरोध और यातनाओं के बावजूद उसने भक्ति मार्ग नहीं छोड़ा। जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में स्तंभ पर प्रहार किया, तब भगवान नृसिंह आधा सिंह और आधा मानव रूप में प्रकट हुए और अपने भक्त की रक्षा करते हुए दैत्यराज का अंत किया। कथा के माध्यम से स्वामी जी ने संदेश दिया कि सच्ची भक्ति, धैर्य और सत्य की विजय निश्चित है।
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सिरसा। श्री स्वामी लक्ष्येश्वर आश्रम गोसेवा सदन, फूलकां में आयोजित नृसिंह महापुराण कथा एवं दुर्लभ सत्संग से पूर्व मंगलवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ कलश यात्रा निकाली गई।
यात्रा का शुभारंभ गांव स्थित ठाकुर मंदिर से हुआ। महिलाएं सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन करते हुए मुख्य गलियों से गुजरीं। यात्रा पुनः गोशाला परिसर स्थित कथा स्थल पर संपन्न हुई। गोशाला प्रधान रविंद्र कुलड़िया ने बताया कि धार्मिक आयोजन का उद्देश्य समाज में आस्था, सद्भाव और गोसेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसके उपरांत गोशाला प्रांगण में नवनिर्मित संत कुटीर भवन का लोकार्पण कथाव्यास स्वामी नित्यानंद गिरि महाराज व जयदेव-सहदेव चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं समाजसेवी ललित जैन ने किया।
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स्वामी नित्यानंद गिरि महाराज ने भगवान नृसिंह अवतार की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ऋषि कश्यप और दीति के पुत्र हिरण्याक्ष व हिरण्यकश्यप थे। हिरण्याक्ष के वध के बाद हिरण्यकश्यप ने कठोर तप कर वरदान प्राप्त किया और अत्याचारी बन बैठा। वह स्वयं की पूजा करवाता तथा भगवान विष्णु के भक्तों को दंडित करता था।
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स्वामी ने कहा कि हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। पिता के विरोध और यातनाओं के बावजूद उसने भक्ति मार्ग नहीं छोड़ा। जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में स्तंभ पर प्रहार किया, तब भगवान नृसिंह आधा सिंह और आधा मानव रूप में प्रकट हुए और अपने भक्त की रक्षा करते हुए दैत्यराज का अंत किया। कथा के माध्यम से स्वामी जी ने संदेश दिया कि सच्ची भक्ति, धैर्य और सत्य की विजय निश्चित है।