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Sirsa News: रोडवेज ने फॉगिंग लाइटें लगाने का काम किया शुरू, 75 फीसदी बाकी
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सिरसा। दिसंबर माह आने के साथ ही धुंध छाने लगी है। धुंध के समय वाहनों को हादसों से बचाने के लिए फॉग लाइटें कारगर रहती हैं। इन लाइटों से धुंध के समय भी वाहन चालकों की कुछ मीटर तक ही दृश्यता बनी रहती है। ऐसे रोडवेज प्रशासन ने अभी तक 75 फीसद बसों में यह फॉग लाइट नहीं लगाई है। कुछ लंबी दूरी की बसों में ही फॉग लाइटें लगाई गई हैं। हालांकि रोडवेज बस काउंटरों पर बिना फॉग लाइटें ही लगी नजर आई।
बता दें कि सिरसा डिपो से हर रोज दिल्ली, चंडीगढ़, हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर व जयपुर रूट पर बसें चलती हैं और रात को लौटती हैं। धुंध होने के कारण बिना फॉग लाइटों वाली बसों को चलाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बस चालकों को दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है। वहीं, मुसाफिरों को भी हादसा होने का डर सताता रहता है। बस चालकों का कहना है कि धुंध में सड़क पर चल रहे वाहनों के दिखाई न देने से उन्हें काफी परेशानी होती हैं। रोडवेज अधिकारियों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि धुंध का मौसम शुरू होने के बाद भी 75 फीसद बसों पर फॉग लाइटें नहीं लगाई गई है।
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बहुत सी बसों पर नहीं है रिफ्लेक्टर
इस समय रोडवेज में कई बसें ऐसी हैं जिनके पीछे रिफ्लेक्टर नहीं है। धुंध में रिफ्लेक्टर न होने के कारण पीछे से आने वाले वाहनों को आगे चल रही बस दिखाई न देने के कारण दुर्घटना हो जाती है। वहीं, कई बसें ऐसी भी हैं, जिन पर रिफ्लेक्टर तो लगे हुए हैं, लेकिन बस पर पेंट करते समय रिफ्लेक्टरों पर भी पेंट कर दिया गया है। इससे दूर से वाहनों की लाइट लगने के बाद रिफ्लेक्ट नहीं हो पाती।
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25 फीसदी बसों पर ही काम हुआ
प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो बसों में फॉगिंग लाइटें लगाने का काम सिर्फ 25 फीसदी ही पूरा हुआ है। 75 फीसदी बसों पर फॉगिंग लाइटें लगाना अभी बाकी है। वहीं विभाग की ओर से 25 फीसदी उन बसों पर लाइटें लगाई गई है जो लंबे रूटों की बसें हैं। लोकल रूटों की सभी बसों पर अभी तक फॉगिंग लाइटें लगाने का काम नहीं किया गया है।
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रोडवेज की ओर से बसों पर फॉगिंग लाइटें लगाने का कार्य जारी है। सबसे पहले लंबे रूटों की बसों पर यह लाइटें लगवाई जा रही हैं। उसके उपरांत दूसरी बसों पर लाइटें लगाने का कार्य किया जाएगा।
- शेर सिंह, महाप्रबंधक रोडवेज सिरसा।
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बता दें कि सिरसा डिपो से हर रोज दिल्ली, चंडीगढ़, हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर व जयपुर रूट पर बसें चलती हैं और रात को लौटती हैं। धुंध होने के कारण बिना फॉग लाइटों वाली बसों को चलाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बस चालकों को दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है। वहीं, मुसाफिरों को भी हादसा होने का डर सताता रहता है। बस चालकों का कहना है कि धुंध में सड़क पर चल रहे वाहनों के दिखाई न देने से उन्हें काफी परेशानी होती हैं। रोडवेज अधिकारियों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि धुंध का मौसम शुरू होने के बाद भी 75 फीसद बसों पर फॉग लाइटें नहीं लगाई गई है।
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बहुत सी बसों पर नहीं है रिफ्लेक्टर
इस समय रोडवेज में कई बसें ऐसी हैं जिनके पीछे रिफ्लेक्टर नहीं है। धुंध में रिफ्लेक्टर न होने के कारण पीछे से आने वाले वाहनों को आगे चल रही बस दिखाई न देने के कारण दुर्घटना हो जाती है। वहीं, कई बसें ऐसी भी हैं, जिन पर रिफ्लेक्टर तो लगे हुए हैं, लेकिन बस पर पेंट करते समय रिफ्लेक्टरों पर भी पेंट कर दिया गया है। इससे दूर से वाहनों की लाइट लगने के बाद रिफ्लेक्ट नहीं हो पाती।
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25 फीसदी बसों पर ही काम हुआ
प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो बसों में फॉगिंग लाइटें लगाने का काम सिर्फ 25 फीसदी ही पूरा हुआ है। 75 फीसदी बसों पर फॉगिंग लाइटें लगाना अभी बाकी है। वहीं विभाग की ओर से 25 फीसदी उन बसों पर लाइटें लगाई गई है जो लंबे रूटों की बसें हैं। लोकल रूटों की सभी बसों पर अभी तक फॉगिंग लाइटें लगाने का काम नहीं किया गया है।
रोडवेज की ओर से बसों पर फॉगिंग लाइटें लगाने का कार्य जारी है। सबसे पहले लंबे रूटों की बसों पर यह लाइटें लगवाई जा रही हैं। उसके उपरांत दूसरी बसों पर लाइटें लगाने का कार्य किया जाएगा।
- शेर सिंह, महाप्रबंधक रोडवेज सिरसा।