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कुलसचिव ने अंग्रेजी छोड़ हिंदी में कामकाज का बढ़ाया प्रचलन, अब दूसरे हो रहे प्रेरित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 11:35 PM IST
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Registrant increased the practice of working in Hindi instead of English, now others are getting inspired
अधिवक्ता रमेश गोयल। - फोटो : Sirsa
हिंदी हमारी मातृ और राष्ट्रीय भाषा है और केवल यह मान लेने से कुछ नहीं होगा। सामान्य कामकाज और बोलचाल में भी हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी। हिंदी के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए शहर के दो व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव किया। विरोध के बावजूद हिंदी को बढ़ावा देने का प्रयास रंग भी लाया। अब दूसरे भी प्रेरित हो रहे हैं और बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राकेश वधवा और शहर के अधिवक्ता रमेश गोयल की जिन्होंने हिंदी को बढ़ावा देने के लिए बदलाव किए।
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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राकेश वधवा ने दो वर्ष पहले हिंदी दिवस से नई शुरुआत की। उन्होंने संकल्प लिया कि भविष्य में सभी सरकारी कामकाज अंग्रेजी की बजाय हिंदी में ही करेंगे। उन्होंने अपने हस्ताक्षर भी अंग्रेजी की बजाय हिंदी में शुरू कर दिए। हालांकि शुरुआत में इसका विरोध भी हुआ। तर्क आए कि सीडीएलयू से संबंधित बैंक खातों और अन्य रिकॉर्ड में भी बदलाव करना पड़ेगा, जो काफी जटिल काम है। लेकिन कुलसचिव ने संकल्प को पूरा किया और हिंदी में हस्ताक्षर शुरू कर दिए। न केवल सरकारी कामकाज बल्कि निजी बैंक खाता और अन्य सभी कामकाज भी हिंद में शुरू कर दिए। डॉ. वधवा के उठाए कदम से दूसरे कर्मचारी भी प्रभावित हुए और अब वे कर्मचारी भी हिंदी में पत्राचार और अन्य सरकारी कामकाज करने लगे हैं।
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45 वर्षों से हिंदी में कर रहे वकालत का कामकाज, मिली अलग पहचान
आज से 45 वर्ष पूर्व बेशक सामान्य बोलचाल की भाषा हिंदी थी लेकिन वकालत और न्यायालय का सारा काम केवल अंग्रेजी में अनिवार्य था। लेकिन सिरसा के अधिवक्ता रमेश गोयल ने चुनौती ली और हिंदी में वकालत का कामकाज शुरू किया। आयकर वकील रमेश गोयल बताते हैं कि उन्होंने 1975 से अब तक सभी ट्रस्ट डीड से लेकर साझेदारी प्रलेख या अन्य दस्तावेज हिंदी में ही तैयार किए हैं। रमेश गोयल दावा करते हैं कि वे आयकर अपीलीय अभिकरण, चंडीगढ़ व बिक्रीकर अधिकरण हरियाणा और आयकर आयुक्त को हिंदी में अपील भेजने वाले देश भर के एकमात्र व्यवसायी हैं। हिंदी में कामकाज ही बदौलत उन्हें प्रादेशिक हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से दो वर्ष पहले गुरुग्राम में आयोजित सुमन स्मृति सम्मान से नवाजा गया।

अपने कार्यालय में हिंदी में काम करते कुल सचिव राकेश वधवा।

अपने कार्यालय में हिंदी में काम करते कुल सचिव राकेश वधवा।- फोटो : Sirsa

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