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Sirsa News: 31.40 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी, शहर में डाली जाएगी नई पेयजल पाइप लाइन
Mon, 26 May 2025 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 26 May 2025 11:33 PM IST
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जलघर कालांवाली में बनी डिग्गी।
कालांवाली। करीब 30 हजार की आबादी वाले शहर कालांवाली के लोगों के लिए खुशी की खबर है। शहरवासियों को पिछले कई सालों से पुरानी व खस्ताहाल पेयजल पाइप लाइन के कारण आ रही परेशानियों से निजात मिलने वाली है। सरकार ने शहर में करीब 31 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से भाखड़ा नहर से जलघर तक और पूरे शहर में नई पाइप लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।
जन स्वास्थ्य विभाग ने प्रथम चरण को मंजूरी मिलने के बाद फाइल को द्वितीय मंजूरी के लिए चंडीगढ़ भेज दिया है। द्वितीय मंजूरी मिलने के बाद विभाग कार्य के लिए टेंडर लगाएगा और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक साल में कार्य को पूरा कर आमजन को लाभ पहुंचाया जाएगा और शहरवासियों के दूषित पेयजल सप्लाई, पेयजल किल्लत की समस्या के साथ-साथ भयंकर बीमारियों से भी निजात मिलेगी।
यह होगा निर्माण कार्य
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब 31 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से भाखड़ा नहर से लेकर कालांवाली शहर के जलघर तक अंडरग्राउंड पाइप लाइन बिछाई जाएगी। एक पंपिग स्टेशन बनाया जाएगा और चैंबरों व मोटर के माध्यम से पानी जलघर तक पहुंचाया जाएगा। शहर के कुल 16 वार्डों के मुख्य बाजारों, गली-मोहल्ले में पुरानी व खस्ताहाल पेयजल पाइप लाइन को बदलकर 3 इंची लाइन की जगह 4, 6, 8 ईंची पेयजल पाइप लाइन बिछाई जाएगी। साथ में गुरुद्वारा बस्ती और माॅडल टाउन एरिया के लोगों के लिए अलग-अलग दो बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण करवाया जाएगा। इसके अलावा जलघर में पानी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए एसएस वाटर टैंक का निर्माण करवाया जाएगा।
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लगभग 50 साल से अधिक पुरानी है पेयजल पाइप लाइन
शहर कालांवाली में बिछी पेयजल पाइप लाइन करीब 50 साल से अधिक पुरानी है। जोकि वर्तमान में बिल्कुल खस्ता व जर्जर हालत में है। पेयजल पाइप लाइन जगह-जगह से टूटी हुई है, पानी लीकेज होता रहता है और पानी सीवरेज के पानी के साथ मिक्स होकर सप्लाई होता है। शहरवासियों के अनुसार कालांवाली एरिया में सन् 1955 में भाखड़ा नहर बनाने का काम शुरू हुआ था और सन् 1958 में भाखड़ा नहर में पानी आया था। इसके बाद सन् 1961 में कालांवाली में जलघर का निर्माण हुआ था। उस समय निर्माण कार्य के लिए श्री दुर्गा मंदिर के पास बने तालाब से गंदा पानी उठाने के लिए वहां से लेकर जलघर तक पेयजल पाइप लाइन डाली गई थी। बाद में विभाग ने उसी पाइप लाइन को काम में ले लिया था। हालांकि वो पाइप लाइन उल्ट पश्चिम से पूर्व दिशा में जाती थी। तब से लेकर अब तक शहर कालांवाली में उसी पेयजल पाइप लाइन से पानी की सप्लाई दी जा रही है। हालांकि कुछ एरिया में आबादी बढ़ने के साथ-साथ कुछ पाइप लाइनें नई डाली गई थी।
वर्तमान में इतनी है पानी की क्षमता
जानकारी अनुसार वर्तमान में जल घर में 4 डिग्गियां बनी हुई है। जिनकी पानी की क्षमता करीब 111 एमएलडी है। जबकि शहर में रोजाना करीब 44 लाख लीटर पेयजल की सप्लाई की जाती है। नहरबंदी के कारण शहर में पेयजल किल्लत की समस्या रहती है। ऐसे में विभाग की ओर से शहर में नहरी पानी की बजाय बोरवेल के पानी की सप्लाई दी जाती है। जोकि आमजन के स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव डालती है। इस पानी से पेट, लीवर, त्वचा, घुटने, बाल झड़ने, डायरिया, दस्त इत्यादि कई प्रकार की बीमारियां फैल रही है। उक्त समस्या को लेकर शहरवासी एसडीओ, एसडीएम, डीसी, सहित कई उच्चाधिकारियों और प्रदेश सीएम को भी अवगत करवा चुके थे। लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बरकरार थी।
सरकार ने प्रथम चरण को मंजूरी दे दी है : जेई
सरकार ने करीब 31 करोड़ 40 लाख रुपये के प्रोजेक्ट के पहले चरण को मंजूरी दे दी है। द्वितीय चरण की मंजूरी के बाद पंचकूला जाएगी। इसके बाद टेंडर लगाकर काम शुरू करवाया जाएगा और करीब एक साल में काम पूरा करवाकर आमजन को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे शहर में पेयजल किल्लत, दूषित पेयजल सप्लाई सहित कई समस्याओं से निजात मिलेगा।
- नरेंद्र भांभू, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग
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जन स्वास्थ्य विभाग ने प्रथम चरण को मंजूरी मिलने के बाद फाइल को द्वितीय मंजूरी के लिए चंडीगढ़ भेज दिया है। द्वितीय मंजूरी मिलने के बाद विभाग कार्य के लिए टेंडर लगाएगा और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक साल में कार्य को पूरा कर आमजन को लाभ पहुंचाया जाएगा और शहरवासियों के दूषित पेयजल सप्लाई, पेयजल किल्लत की समस्या के साथ-साथ भयंकर बीमारियों से भी निजात मिलेगी।
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यह होगा निर्माण कार्य
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब 31 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से भाखड़ा नहर से लेकर कालांवाली शहर के जलघर तक अंडरग्राउंड पाइप लाइन बिछाई जाएगी। एक पंपिग स्टेशन बनाया जाएगा और चैंबरों व मोटर के माध्यम से पानी जलघर तक पहुंचाया जाएगा। शहर के कुल 16 वार्डों के मुख्य बाजारों, गली-मोहल्ले में पुरानी व खस्ताहाल पेयजल पाइप लाइन को बदलकर 3 इंची लाइन की जगह 4, 6, 8 ईंची पेयजल पाइप लाइन बिछाई जाएगी। साथ में गुरुद्वारा बस्ती और माॅडल टाउन एरिया के लोगों के लिए अलग-अलग दो बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण करवाया जाएगा। इसके अलावा जलघर में पानी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए एसएस वाटर टैंक का निर्माण करवाया जाएगा।
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लगभग 50 साल से अधिक पुरानी है पेयजल पाइप लाइन
शहर कालांवाली में बिछी पेयजल पाइप लाइन करीब 50 साल से अधिक पुरानी है। जोकि वर्तमान में बिल्कुल खस्ता व जर्जर हालत में है। पेयजल पाइप लाइन जगह-जगह से टूटी हुई है, पानी लीकेज होता रहता है और पानी सीवरेज के पानी के साथ मिक्स होकर सप्लाई होता है। शहरवासियों के अनुसार कालांवाली एरिया में सन् 1955 में भाखड़ा नहर बनाने का काम शुरू हुआ था और सन् 1958 में भाखड़ा नहर में पानी आया था। इसके बाद सन् 1961 में कालांवाली में जलघर का निर्माण हुआ था। उस समय निर्माण कार्य के लिए श्री दुर्गा मंदिर के पास बने तालाब से गंदा पानी उठाने के लिए वहां से लेकर जलघर तक पेयजल पाइप लाइन डाली गई थी। बाद में विभाग ने उसी पाइप लाइन को काम में ले लिया था। हालांकि वो पाइप लाइन उल्ट पश्चिम से पूर्व दिशा में जाती थी। तब से लेकर अब तक शहर कालांवाली में उसी पेयजल पाइप लाइन से पानी की सप्लाई दी जा रही है। हालांकि कुछ एरिया में आबादी बढ़ने के साथ-साथ कुछ पाइप लाइनें नई डाली गई थी।
वर्तमान में इतनी है पानी की क्षमता
जानकारी अनुसार वर्तमान में जल घर में 4 डिग्गियां बनी हुई है। जिनकी पानी की क्षमता करीब 111 एमएलडी है। जबकि शहर में रोजाना करीब 44 लाख लीटर पेयजल की सप्लाई की जाती है। नहरबंदी के कारण शहर में पेयजल किल्लत की समस्या रहती है। ऐसे में विभाग की ओर से शहर में नहरी पानी की बजाय बोरवेल के पानी की सप्लाई दी जाती है। जोकि आमजन के स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव डालती है। इस पानी से पेट, लीवर, त्वचा, घुटने, बाल झड़ने, डायरिया, दस्त इत्यादि कई प्रकार की बीमारियां फैल रही है। उक्त समस्या को लेकर शहरवासी एसडीओ, एसडीएम, डीसी, सहित कई उच्चाधिकारियों और प्रदेश सीएम को भी अवगत करवा चुके थे। लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बरकरार थी।
सरकार ने प्रथम चरण को मंजूरी दे दी है : जेई
सरकार ने करीब 31 करोड़ 40 लाख रुपये के प्रोजेक्ट के पहले चरण को मंजूरी दे दी है। द्वितीय चरण की मंजूरी के बाद पंचकूला जाएगी। इसके बाद टेंडर लगाकर काम शुरू करवाया जाएगा और करीब एक साल में काम पूरा करवाकर आमजन को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे शहर में पेयजल किल्लत, दूषित पेयजल सप्लाई सहित कई समस्याओं से निजात मिलेगा।
- नरेंद्र भांभू, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग