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पोर्टल में खामी, 14 हजार को पीपीपी का इंतजार
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परिवार पहचान पत्र में दर्ज हिंदी में गलत नाम।
- फोटो : Sirsa
शहर में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) बनाने में लोगों को दिक्कतें आ रही हैं। पोर्टल में खामियां होने के कारण हिंदी के नाम गलत अंकित हो रहे हैं। शहर में अभी भी 13 हजार 989 लोगों के परिवार पहचान पत्र बनने शेष है। लेकिन इन लोगों के स्थायी पता और मोबाइल नंबर सही नहीं है। ऐसे में समक्ष युवाओं को परिवार पहचान पत्र बनाने के लिए किए जा रहे सर्वे में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
बता दें कि शहर में कुल 47 हजार 489 परिवार हैं। इनमें से 33500 लोगों के पहचान पत्र बन चुके हैं। जबकि 13989 परिवारों के पहचान पत्र बनने शेष है। कुछ ही दिनों पहले एनआईसी ने नगर परिषद को शेष रह चुके परिवारों की सूची दी। लेकिन इस सूची में अधिकांश लोगों के नाम सहित मोबाइल नंबर भी गलत है। सक्षम युवाओं ने जब वार्डों में जाकर परिवार पहचान पत्र बनाने का काम शुरू किया तो इस बात का खुलासा हुआ। ऐसे में अब सक्षम युवाओं के समक्ष चुनौती है कि वे लोगों का सही सर्वे करके कैसे परिवार पहचान पत्र बनवाए।
पोर्टल में एडिट का नहीं है ऑप्शन
सरकार के जिस पोर्टल पर सक्षम युवाओं द्वारा परिवार पहचान पत्र का डाटा अपलोड किया जा रहा है। उसमें एडिट का ऑप्शन ही उपलब्ध नहीं है। यानी की एक बार जो डाटा भर दिया गया, उसमें परिवर्तन करना आसान नहीं है। दूसरा पोर्टल में व्यक्ति का अंग्रेजी अक्षरों में नाम भरने के बाद नीचे पोर्टल ऑटोमैटिक हिंदी में नाम लिखता है। जिसमें कि त्रृटियां आ रही है। पार्षद प्रतिनिधि लक्की डावर ने बताया कि उनके एक परिचित ललित आदित्य ने अपना परिवार पहचान पत्र बनाया। अंग्रेजी में नाम लिखे जाने के बाद पोर्टल ने ललितादित्य नाम अंकित कर दिया। जिसमें बदलाव नहीं हुआ, पोर्टल में यह बहुत बड़ी खामी है। लोग सक्षम युवाओं से इस गलती को ठीक करने के लिए कहते हैं, लेकिन यह केवल मुख्यालय स्तर पर ही ठीक किया जा सकता है।
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सीडीएलयू में परिवार पहचान पत्र बनना शुरू
प्रशासन ने शहर में नगर परिषद को 28 फरवरी तक परिवार पहचान पत्र बनाने का काम पूरा करने की समय सीमा दी है। ऐसे में नगर परिषद ने 20 सक्षम युवाओं को ट्रेंड करके उन्हें सीडीएलयू की कंप्यूटर लैब में ऑफ लाइन आवेदनों को ऑन लाइन करने का काम सौंपा है। वहीं शहर में सर्वे के लिए नप ने 100 ओर सक्षम युवाओं की मांग की है।
कोट
करीब 13 हजार परिवारों के पहचान पत्र बनने शेष है। पोर्टल में खामी है, हिंदी का नाम गलत अंकित हो रहा है। लेकिन इस खामी को मुख्यालय स्तर पर ही ठीक किया जा सकता है।
-विपिन कुमार, नोडल अधिकारी, परिवार पहचान पत्र, नगर परिषद सिरसा।
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बता दें कि शहर में कुल 47 हजार 489 परिवार हैं। इनमें से 33500 लोगों के पहचान पत्र बन चुके हैं। जबकि 13989 परिवारों के पहचान पत्र बनने शेष है। कुछ ही दिनों पहले एनआईसी ने नगर परिषद को शेष रह चुके परिवारों की सूची दी। लेकिन इस सूची में अधिकांश लोगों के नाम सहित मोबाइल नंबर भी गलत है। सक्षम युवाओं ने जब वार्डों में जाकर परिवार पहचान पत्र बनाने का काम शुरू किया तो इस बात का खुलासा हुआ। ऐसे में अब सक्षम युवाओं के समक्ष चुनौती है कि वे लोगों का सही सर्वे करके कैसे परिवार पहचान पत्र बनवाए।
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पोर्टल में एडिट का नहीं है ऑप्शन
सरकार के जिस पोर्टल पर सक्षम युवाओं द्वारा परिवार पहचान पत्र का डाटा अपलोड किया जा रहा है। उसमें एडिट का ऑप्शन ही उपलब्ध नहीं है। यानी की एक बार जो डाटा भर दिया गया, उसमें परिवर्तन करना आसान नहीं है। दूसरा पोर्टल में व्यक्ति का अंग्रेजी अक्षरों में नाम भरने के बाद नीचे पोर्टल ऑटोमैटिक हिंदी में नाम लिखता है। जिसमें कि त्रृटियां आ रही है। पार्षद प्रतिनिधि लक्की डावर ने बताया कि उनके एक परिचित ललित आदित्य ने अपना परिवार पहचान पत्र बनाया। अंग्रेजी में नाम लिखे जाने के बाद पोर्टल ने ललितादित्य नाम अंकित कर दिया। जिसमें बदलाव नहीं हुआ, पोर्टल में यह बहुत बड़ी खामी है। लोग सक्षम युवाओं से इस गलती को ठीक करने के लिए कहते हैं, लेकिन यह केवल मुख्यालय स्तर पर ही ठीक किया जा सकता है।
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सीडीएलयू में परिवार पहचान पत्र बनना शुरू
प्रशासन ने शहर में नगर परिषद को 28 फरवरी तक परिवार पहचान पत्र बनाने का काम पूरा करने की समय सीमा दी है। ऐसे में नगर परिषद ने 20 सक्षम युवाओं को ट्रेंड करके उन्हें सीडीएलयू की कंप्यूटर लैब में ऑफ लाइन आवेदनों को ऑन लाइन करने का काम सौंपा है। वहीं शहर में सर्वे के लिए नप ने 100 ओर सक्षम युवाओं की मांग की है।
कोट
करीब 13 हजार परिवारों के पहचान पत्र बनने शेष है। पोर्टल में खामी है, हिंदी का नाम गलत अंकित हो रहा है। लेकिन इस खामी को मुख्यालय स्तर पर ही ठीक किया जा सकता है।
-विपिन कुमार, नोडल अधिकारी, परिवार पहचान पत्र, नगर परिषद सिरसा।

नगर परिषद कार्यालय में परिवार पहचान पत्र बनाते सक्षम युवा।- फोटो : Sirsa