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Sirsa News: जिले को मिले सबसे कम मिले पटवारी, पटवारियों ने शुरू की दो दिन की हड़ताल
Mon, 11 May 2026 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 11 May 2026 11:25 PM IST
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लघु सचिवालय परिसर में धरने पर बैठे पटवारी। संवाद
- 280 पद खाली, 25 पटवारियों के भरोसे पूरा जिला
-- बोले, मानसिक दबाव में काम कर रहे कर्मचारी
फोटो-- - 25
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में पटवारी इन दिनों मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। एक-एक पटवारी के पास सात से 10 गांव हैं। सरकार से नए पटवारियों के तौर पर 150 से 200 पटवारी मिलने की उम्मीद थी। जो उस समय टूट गई जब जिले को महज 79 पटवारी मिले। इसी से नाराज पटवारी व कानूनगो दो दिनों की हड़ताल पर सोमवार को लघु सचिवालय में धरने पर बैठ गए। पूरी तरह से तहसील और पटवार भवन का काम बंद रहा।
धरने का नेतृत्व कर रहे जिला प्रधान लाभ सिंह ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025 में 2605 पटवारियों की भर्ती की थी। अब उनकी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 3 मई को जिलों में नियुक्ति सूची जारी की गई। इस सूची में सिरसा जिले को कुल 79 पटवारी दिए गए है जबकि जिले में अब भी 280 पद खाली पड़े हैं।
लाभ सिंह ने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण एक-एक पटवारी को कई-कई सर्कलों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। किसी पटवारी के पास 10 गांवों का जिम्मा है तो किसी के पास 12 गांवों का। सिरसा तहसील में तो एक पटवारी ऐसा भी है जिसके पास 16 गांवों का चार्ज है। ऐसे में किसानों और आमजन के काम प्रभावित हो रहे हैं। इंतकाल, जमाबंदी, फर्द और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कार्य समय पर नहीं हो पा रहे।
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लाभ सिंह ने कहा कि लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण पटवारी मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं। जिले में पहले कुल 45 पटवारी कार्यरत थे लेकिन कुछ को प्रमोट कर कानूनगो बना दिया गया। अब स्थिति यह है कि पूरे जिले में केवल 24 पटवारी ही सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिरसा जिले को सुचारु रूप से चलाने के लिए कम से कम 200 अतिरिक्त पटवारियों की जरूरत है।
धरने के दौरान एचकेआरएन के तहत कार्यरत पटवारी सहायकों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि इन सहायकों के पास न तो पर्याप्त प्रशिक्षण है और न ही उन्हें राजस्व कार्यों का अनुभव। पटवारी बनने के लिए करीब डेढ़ साल की विशेष ट्रेनिंग जरूरी होती है। ऐसे में प्रशिक्षित पटवारी का काम सहायक नहीं कर सकता।
लाभ सिंह ने बताया कि पटवारियों की ट्रेनिंग के दौरान अस्थायी तौर पर सहायकों को लगाया गया था लेकिन अब सरकार स्थायी समाधान निकालने के बजाय उन्हीं पर निर्भर हो रही है। इससे राजस्व कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि फिलहाल दो दिन तक सांकेतिक धरना दिया जाएगा। यदि इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरने में जिलेभर से आए पटवारी और कानूनगो मौजूद रहे।
जहां 60 पद वहां पर दे दिए 160 पटवारी
प्रधान लाभ सिंह ने सरकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जिलों में जहां 60 पद स्वीकृत थे वहां 160 तक पटवारी भेज दिए गए जबकि सिरसा जैसे बड़े जिले को जरूरत के मुकाबले बेहद कम स्टाफ दिया गया। उन्होंने इसे सिरसा जिले के साथ अन्याय बताया।
इस प्रकार है पटवारियों की स्थिति
कुल पटवारियों के पद - 325
मौजूदा समय में कार्यरत पटवारी - 25
कुल मांग - 280 पटवारी
सरकार ने भेजे पटवारी - 79
एक पटवारी पर मौजूदा समय में गांव - 7 से 10
कुल गांव पटवारियों के अनुसार - 325
नियम - एक गांव में एक पटवारी
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में पटवारी इन दिनों मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। एक-एक पटवारी के पास सात से 10 गांव हैं। सरकार से नए पटवारियों के तौर पर 150 से 200 पटवारी मिलने की उम्मीद थी। जो उस समय टूट गई जब जिले को महज 79 पटवारी मिले। इसी से नाराज पटवारी व कानूनगो दो दिनों की हड़ताल पर सोमवार को लघु सचिवालय में धरने पर बैठ गए। पूरी तरह से तहसील और पटवार भवन का काम बंद रहा।
धरने का नेतृत्व कर रहे जिला प्रधान लाभ सिंह ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025 में 2605 पटवारियों की भर्ती की थी। अब उनकी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 3 मई को जिलों में नियुक्ति सूची जारी की गई। इस सूची में सिरसा जिले को कुल 79 पटवारी दिए गए है जबकि जिले में अब भी 280 पद खाली पड़े हैं।
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लाभ सिंह ने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण एक-एक पटवारी को कई-कई सर्कलों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। किसी पटवारी के पास 10 गांवों का जिम्मा है तो किसी के पास 12 गांवों का। सिरसा तहसील में तो एक पटवारी ऐसा भी है जिसके पास 16 गांवों का चार्ज है। ऐसे में किसानों और आमजन के काम प्रभावित हो रहे हैं। इंतकाल, जमाबंदी, फर्द और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कार्य समय पर नहीं हो पा रहे।
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लाभ सिंह ने कहा कि लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण पटवारी मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं। जिले में पहले कुल 45 पटवारी कार्यरत थे लेकिन कुछ को प्रमोट कर कानूनगो बना दिया गया। अब स्थिति यह है कि पूरे जिले में केवल 24 पटवारी ही सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिरसा जिले को सुचारु रूप से चलाने के लिए कम से कम 200 अतिरिक्त पटवारियों की जरूरत है।
धरने के दौरान एचकेआरएन के तहत कार्यरत पटवारी सहायकों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि इन सहायकों के पास न तो पर्याप्त प्रशिक्षण है और न ही उन्हें राजस्व कार्यों का अनुभव। पटवारी बनने के लिए करीब डेढ़ साल की विशेष ट्रेनिंग जरूरी होती है। ऐसे में प्रशिक्षित पटवारी का काम सहायक नहीं कर सकता।
लाभ सिंह ने बताया कि पटवारियों की ट्रेनिंग के दौरान अस्थायी तौर पर सहायकों को लगाया गया था लेकिन अब सरकार स्थायी समाधान निकालने के बजाय उन्हीं पर निर्भर हो रही है। इससे राजस्व कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि फिलहाल दो दिन तक सांकेतिक धरना दिया जाएगा। यदि इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरने में जिलेभर से आए पटवारी और कानूनगो मौजूद रहे।
जहां 60 पद वहां पर दे दिए 160 पटवारी
प्रधान लाभ सिंह ने सरकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जिलों में जहां 60 पद स्वीकृत थे वहां 160 तक पटवारी भेज दिए गए जबकि सिरसा जैसे बड़े जिले को जरूरत के मुकाबले बेहद कम स्टाफ दिया गया। उन्होंने इसे सिरसा जिले के साथ अन्याय बताया।
इस प्रकार है पटवारियों की स्थिति
कुल पटवारियों के पद - 325
मौजूदा समय में कार्यरत पटवारी - 25
कुल मांग - 280 पटवारी
सरकार ने भेजे पटवारी - 79
एक पटवारी पर मौजूदा समय में गांव - 7 से 10
कुल गांव पटवारियों के अनुसार - 325
नियम - एक गांव में एक पटवारी