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Sirsa News: पटवारी-कानूनगो हड़ताल पर, नए साफ्टवेयर के विरोध में किया प्रदर्शन

Thu, 20 Aug 2026 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Thu, 20 Aug 2026 11:07 PM IST
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patwari kanoongo strike
सिरसा लघु सचिवालय पर धरना प्रदर्शन करते पटवारी। संवाद
- डिजिटल क्रॉप करना हुआ मुश्किल, नये और पुराने तरीके से दर्ज हो रहा रिकॉर्ड, अधूरा रिकॉर्ड भी बना पटवारियों के लिए सरदर्द
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फोटो -- 39,40

संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। प्रदेश सरकार की ओर से राजस्व विभाग के लिए लागू किए गए नए सॉफ्टवेयर की खामियों के विरोध में पटवारी और कानूनगो दो दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं। मंगलवार को पटवारियों ने कामकाज बंद कर जिला मुख्यालय पर धरना दिया और सरकार के खिलाफ रोष जताया।
पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान दलवीर बिस्सु ने कहा कि दो दिन की हड़ताल के बाद दो दिन का अवकाश है। इस दौरान यदि सरकार समस्याओं का समाधान कर देती है तो ठीक है अन्यथा राज्य कार्यकारिणी के निर्देशानुसार आगामी फैसला लिया जाएगा।
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बिस्सु बताया कि नए सॉफ्टवेयर में पुराने राजस्व रिकॉर्ड का पूरा आंकड़ों को सम्मिलित नहीं किया गया है। अधूरे डाटा के कारण पटवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जमाबंदी पुराने सॉफ्टवेयर से तैयार करनी पड़ रही है जबकि उसकी प्रविष्टि नए पोर्टल पर करनी होती है। इससे राजस्व रिकॉर्ड में विरोधाभास की स्थिति पैदा हो रही है।
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दलवीर बिस्सु ने कहा कि पटवारी व कानूनगो सरकार के द्वारा लागू की गई नई तकनीक का विरोध नहीं है लेकिन इसे पायलट प्रोजेक्ट की तरह ट्रायल पर नहीं लगाया और सीधे लागू कर दिया गया है। अधूरे डाटा और बड़े स्तर पर खामियों के कारण इस सॉफ्टवेयर ने पटवारी व कानूनगो की परेशानी बढ़ा दी है।
दलबीर ने कहा कि अब काम करना मुश्किल हो गया है। हालात यह है कि यदि ऑनलाइन फर्द व अन्य दस्तावेज कोई भी व्यक्ति निकाल सकता है मगर सरकारी तौर पर उन्हें बिना सत्यापन के स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इससे आमजन तंग हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 30 हजार से अधिक इंतकाल पुराने सॉफ्टवेयर में लंबित हैं। इनमें से कई मामलों को तहसील-कानूनगो स्तर पर मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन नए सॉफ्टवेयर में उनकी प्रविष्टि नहीं हो पा रही है। इससे राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के अनुसार जिले में पटवारियों के स्वीकृत 324 पदों में से करीब 200 पद खाली पड़े हैं। सरकार ने 79 नए पटवारी दिए गए हैं जो कम है। कई जिलों में आज भी पटवारी अतिरिक्त हैं उन्हें जहां कम है वहां पर नहीं भेजा जा रहा है।
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि नए सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों को जल्द दूर किया जाए और पुराने राजस्व रिकॉर्ड का पूरा आंकड़ा नए सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाए। इसके साथ ही कर्मचारियों को पेश आ रहीं व्यावहारिक समस्याओं का भी प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।
दलबीर ने बताया कि कर्मचारियों ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रक्रिया को भी व्यावहारिक बनाने की मांग उठाई है। पटवारियों के अनुसार प्रत्येक खेत की अलग-अलग तस्वीर लेकर गिरदावरी का विवरण अपलोड करना पड़ता है जबकि इसकी निर्धारित सीमा महज 10 मीटर है।
ऐसे में एक ही क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ में एक ही फसल खड़ी होने के बावजूद अलग-अलग खेतों की तस्वीरें अपलोड करनी पड़ती हैं। पटवारियों का कहना है कि एक पटवारी के पास करीब पांच गांवों का कार्यभार है जहां हजारों एकड़ भूमि का आंकड़ा जुटाना पड़ता है।
इसके बाद यह पूरा विवरण कानूनगो स्तर पर पहुंचता है। एक कानूनगो के अधीन करीब 10 गांव होने के कारण उसके पास लगभग 50 हजार एकड़ तक का आंकड़ा पहुंच सकता है। एक माह की समय सीमा में इतने बड़े क्षेत्र का सर्वे करना मौजूदा कर्मचारी संख्या के हिसाब से बेहद कठिन है।
एसोसिएशन ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की दूरी सीमा बढ़ाने और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है ताकि सर्वे का कार्य समय पर और व्यावहारिक तरीके से पूरा किया जा सके। पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान ने बताया कि यदि किसी जमीन पर अदालत का स्थगन आदेश लागू है तो उसका विवरण नए सॉफ्टवेयर में दर्ज होना चाहिए।
इसके अलावा, फिलहाल जमाबंदी पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर तैयार हो रही है। ऐसे में अदालत के स्थगन आदेश का उल्लेख जमाबंदी में दर्ज नहीं होने से संबंधित जमीन के हस्तांतरण को रोकने में कानूनी परेशानी पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह जमीन की बिक्री के बाद पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार स्तर पर इंतकाल स्वीकृत होने के बावजूद कई मामलों में उसकी प्रविष्टि नए सॉफ्टवेयर में नहीं हो पा रही है। इसके चलते राजस्व रिकॉर्ड में पुराना मालिक ही दिखाई देता रहता है।
कर्मचारियों ने सरकार से सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों को दूर कर पुराने रिकॉर्ड का पूरा आंकड़ा अद्यतन करने की मांग की है, ताकि जमीन संबंधी कार्यों में आम लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।


वर्ग मीटर में रिकॉर्ड दर्ज करना बनी समस्या
पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन के अनुसार नए राजस्व सॉफ्टवेयर में जमीन का क्षेत्रफल दर्ज करने की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। पहले क्षेत्रफल कनाल, मरला और सरसाई की पारंपरिक व्यवस्था में दर्ज किया जाता था, जबकि नए सॉफ्टवेयर में इसे वर्ग मीटर में दर्ज किया जा रहा है। इससे पटवारियों को काम करने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, पूरा सॉफ्टवेयर अंग्रेजी भाषा में है और इसमें हिंदी का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है।
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