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आरोही स्कूल में 35 में से मात्र 8 शिक्षक, कैसे होगी पढ़ाई, आक्रोशित अभिभावकों व विद्यार्थियों ने किया प्रदर्शन
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झीड़ी में आरोही स्कूल के गेट पर धरना प्रदर्शन करते विद्यार्थी व अभिभावक। संवाद
- फोटो : Sirsa
बडागुढ़ा। गांव झीड़ी के आरोही मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों व अभिभावकों ने सोमवार को रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और सुबह आठ बजे से दोपहर ढाई बजे तक धरने पर बैठे रहे। सूचना के बाद बडागुढ़ा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार व बीईओ मनीषा नीदिपा ने मौके पर पहुंचे।
अभिभावकों ने अधिकारियों से कहा कि स्कूल में स्टाफ की कमी की वजह से विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि स्कूल में 432 विद्यार्थियों हैं। स्कूल में 35 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र आठ शिक्षक ही हैं। वहीं कक्षा छठी से लेकर 8वीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। किसान नेता गुरदीप सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा के नाम पर खाली ढिंढोरा पीट रही है। एक तरफ तो सरकार स्कूलों में शत प्रतिशत दाखिले पर जोर दे रही है और दूसरी तरफ वास्तविकता ये है कि स्कूलों में स्टाफ ही नहीं है। बिना स्टाफ के परीक्षा परिणाम कैसे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष से यहां अध्यापकों की कमी है। ये बडागुढ़ा खंड का एकमात्र आरोही स्कूल है। यहां क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सैकड़ों विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय में परीक्षा लेकर प्रतिभावान विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है, लेकिन बिना शिक्षकों के अकेले उनकी प्रतिभा किस काम आएगी। जब तक अध्यापकों की कमी को दूर नहीं किया जाता तब तक उनका ये संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा।
अधिकारियों ने समझाया, लेकिन अड़े रहे ग्रामीण
थाना प्रभारी व खंड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों को समझाते हुए कहा कि स्टाफ की पूर्ति करना सरकार का काम है। उनका काम तो केवल अधिकारियों को अवगत करवाना है। उनकी जो भी मांग है वे उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी जाएगी। करीब साढ़े 6 घंटे धरना प्रदर्शन करने उपरांत प्रदर्शनकारियों ने बीईओ को मांग पत्र सौंपते हुए कहा कि अगर समस्या का समाधान शीघ्र ही नहीं किया गया तो वे यहां पर निरंतर धरना शुरू कर देंगे।
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वर्जन
ट्रांसफर ड्राइव खुल रही है। जिसके तहत स्कूल में अध्यापकों की नियुक्ति की उम्मीदें हैं। स्कूल में 35 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 8 शिक्षक ही हैं। अभिभावकों ने मांग पत्र सौंपा है। इसे हमने आगे अधिकारियों को भेज दिया है। - मनीषा नीदिपा, बीईओ (बडागुढ़ा)।
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अभिभावकों ने अधिकारियों से कहा कि स्कूल में स्टाफ की कमी की वजह से विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि स्कूल में 432 विद्यार्थियों हैं। स्कूल में 35 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र आठ शिक्षक ही हैं। वहीं कक्षा छठी से लेकर 8वीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। किसान नेता गुरदीप सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा के नाम पर खाली ढिंढोरा पीट रही है। एक तरफ तो सरकार स्कूलों में शत प्रतिशत दाखिले पर जोर दे रही है और दूसरी तरफ वास्तविकता ये है कि स्कूलों में स्टाफ ही नहीं है। बिना स्टाफ के परीक्षा परिणाम कैसे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष से यहां अध्यापकों की कमी है। ये बडागुढ़ा खंड का एकमात्र आरोही स्कूल है। यहां क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सैकड़ों विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय में परीक्षा लेकर प्रतिभावान विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है, लेकिन बिना शिक्षकों के अकेले उनकी प्रतिभा किस काम आएगी। जब तक अध्यापकों की कमी को दूर नहीं किया जाता तब तक उनका ये संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा।
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अधिकारियों ने समझाया, लेकिन अड़े रहे ग्रामीण
थाना प्रभारी व खंड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों को समझाते हुए कहा कि स्टाफ की पूर्ति करना सरकार का काम है। उनका काम तो केवल अधिकारियों को अवगत करवाना है। उनकी जो भी मांग है वे उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी जाएगी। करीब साढ़े 6 घंटे धरना प्रदर्शन करने उपरांत प्रदर्शनकारियों ने बीईओ को मांग पत्र सौंपते हुए कहा कि अगर समस्या का समाधान शीघ्र ही नहीं किया गया तो वे यहां पर निरंतर धरना शुरू कर देंगे।
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ट्रांसफर ड्राइव खुल रही है। जिसके तहत स्कूल में अध्यापकों की नियुक्ति की उम्मीदें हैं। स्कूल में 35 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 8 शिक्षक ही हैं। अभिभावकों ने मांग पत्र सौंपा है। इसे हमने आगे अधिकारियों को भेज दिया है। - मनीषा नीदिपा, बीईओ (बडागुढ़ा)।