Sirsa: मणिपुर से वापस लौटी नेहा कंबोज, बोलीः पांच दिनों तक हास्टल में ही रहे बंद, माहौल था खराब
सिरसा की एमएसी कॉलोनी निवासी नेहा कंबोज ने मणिपुर के इंफाल में स्थित एनआईटी यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। उसने एमएससी का एक वर्ष पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया कि तीन मई सुबह तक स्थिति सामान्य थी। 10.30 बजे के पश्चात वहां के आसपास के क्षेत्र में गोली और बम धमाकों की आवाज सुनाई देनी शुरू हो गई।
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मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान एनआईटी यूनिवर्सिटी में फंसी सिरसा एमसी कॉलोनी निवासी नेहा कंबोज मंगलवार दोपहर को अपने घर लौट आई है। नेहा के घर लौटने पर परिवार के सदस्यों की सांस में सांस आई है। वहीं नेहा कंबोज ने बताया कि जातीय हिंसा को लेकर उन्हें पहले कोई भी इसकी जानकारी नहीं थी। बीती तीन मई को एक दम ब्लास्ट और बम धमाकों की आवाज सुनाई देने पर वह सहम गए। यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से उन्हें हॉस्टल में भेज दिया गया। रात के समय भी उन्हें धमाकों की साफ आवाज सुनाई पड़ती दी।
तीन मई सुबह तक स्थिति सामान्य थी
वर्ष 2022 में सिरसा की एमएसी कॉलोनी निवासी नेहा कंबोज ने मणिपुर के इंफाल में स्थित एनआईटी यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। उसने एमएससी का एक वर्ष पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया कि तीन मई सुबह तक स्थिति सामान्य थी। 10.30 बजे के पश्चात वहां के आसपास के क्षेत्र में गोली और बम धमाकों की आवाज सुनाई देनी शुरू हो गई। पहाड़ी क्षेत्रों में आगजनी की घटनाएं होनी शुरू हो गई।
पांच दिनों तक वह हॉस्टल में ही बंद रहे
दोपहर के बाद पुलिस के सायरन बजने शुरू हो गए और आर्मी ने यूनिवर्सिटी को अपने अंडर ले लिया। जिसके पश्चात नेट की सुविधा भी बंद हो गई। ऐसे में तीन दिन तक काफी परेशानी रही। पांच दिनों तक वह हॉस्टल में ही बंद रहे। आठ मई को सुबह साढ़े आठ बजे उन्हें सुरक्षा के बीच यूनिवर्सिटी की बस में एयरपोर्ट पहुंचाया। यहां से वह रात करीब 11 बजे दिल्ली पहुंचे है। ओर इसके पश्चात उनके परिजन उन्हें लेने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच गए। जिसके पश्चात वह दोपहर 12 बजे अपने घर पर पहुंचे है।
नेहा बोलीः एक दिन खाना व पीने के लिए नहीं था पानी
नेहा ने बताया कि तीन मई से पांच मई तक तीन दिन स्थिति काफी खराब रही। वह हॉस्टल में ही बंद रहे। उनके साथ हरियाणा के अलग-अलग जिलों के 16 विद्यार्थी थे। जिन्हें सरकार की ओर से सुरक्षित घर पर पहुंचाया गया है। गोला बारी होने के दौरान तीन दिनों तक वहां पर स्थिति काफी खराब थी। एक दिन तो उनके हॉस्टल में खाने के लिए खाना और पीने के लिए पानी की भी दिक्कत आ गई। जिसके कारण उन्हें ब्रेड और चावल खाकर गुजारा करना पड़ा था। नेट बंद होने के बाद सरकार के नंबर तक निकालने उनके लिए मुश्किल की गई है।
दूसरे राज्यों के विद्यार्थी को उनकी सरकार ने पांच तारिख को ही बुला लिया था वापस
नेहा ने बताया देशभर के विद्यार्थी एनआईटी में पढ़ाई करते है। जिसमें साउथ, झारखंड, बिहार सहित अन्य कई राज्यों के विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। तीन को माहौल खराब होने के बाद उनके राज्यों की सरकार ने उन्हें पांच तारीख को ही वहां से बुलाना शुरू कर दिया था। इसके चलते उन्होंने भी अपनी सरकार के साथ जैसे तैसे कर संपर्क किया और अब वह वापस लौटे है।
हिंसा होने की घटना को लेकर परिवार को नहीं दी कोई जानकारी
नेहा ने बताया कि मणिपुर में हिंसा होने को लेकर पहले तीन दिनों तक उन्होंने परिवार के सदस्यों को किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी। इतना बताया था कि अब कुल दिनों तक नेट सेवाएं बंद रहेंगी और बातचीत नहीं हो पाएगी। हालांकि फोन के माध्यम से उनकी परिवार के सदस्यों के साथ हर रोज बातचीत होती थी। परिवार के सदस्य भी उनसे इस संबंध में जानकारी लेते रहते थे। बता दे कि नेहा के पिता भजन लाल एमसी कॉलोनी में ही कढ़ाई का काम करते है और उनकी माता कैलाश कौर चत्तरगढ़पट्टी स्थित स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम है।