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एसडीएम ने भेजी रिपोर्ट, नंबरदार के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा
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गांव रत्ताखेड़ा मेें दो लोगों ने उपायुक्त को शिकायत भेजकर नंबरदार पर प्रमाण पत्र की रिपोर्ट करने की एवज मेें फीस मांगने, गलत शिनाख्त करने व रजिस्ट्री की एवज मेें फीस मांगने के आरोप लगाए हैं। मामले की जांच डबवाली के एसडीएम को सौंपी गई। इस मामले में एसडीएम ने नंबरदार व शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने के बाद आरोपों को सही मानते हुए उपायुक्त को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की अनुशंसा की है।
शिकायतकर्ता सुभाष कुमार के अनुसार वह अपने बच्चों का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म पर हस्ताक्षर करवाने गया था। आरोप है कि नंबरदार विनोद कुमार ने हस्ताक्षर करने की एवज में फीस की मांग की। सुभाष ने जब फीस देने से इंकार किया तो नंबरदार ने प्रमाण पत्र रिपोर्ट करने से स्पष्ट मना कर दिया। सुभाष का कहना है कि फार्म पर सरपंच की रिपोर्ट भी की हुई थी लेकिन फिर भी नंबरदार ने इंकार कर दिया। सुभाष ने उपायुक्त को शिकायत भेजकर नंबरदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
दूसरे शिकायतकर्ता राजेश कुमार का कहना है कि उसके पिता देवीलाल के नाम की जगह देवी राम की शिनाख्त कर किसी अन्य व्यक्ति को दे दी। उसकेे पिता का नाम देवी राम किसी भी दस्तावेजों में नहीं है। राजेश का आरोप है कि नंबरदार विनोद कुमार ने ये तस्दीक जान बूझकर की है। आरोप है कि विनोद कुमार ने अपने नंबरदार पद का दुरुपयोग करते हुए गलत तस्दीक कर उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया है। आरोप ये भी है कि विनोद कुमार गांव में रजिस्ट्री करवाने की एवज में पैसे लेता है। इस मामले में राजेश ने उपायुक्त को उन लोगों के शपथ पत्र व अन्य दस्तावेज सौंपे हैं। जिनकी रजिस्ट्रियां विनोद कुमार द्वारा पैसे मांगने पर अन्य गांव के नंबरदारों द्वारा करवाई गई है। राजेश का आरोप है कि नंबरदार ने वर्ष 2005 से 2008 तक बेरोजगारी भत्ता भी लिया है। जबकि नंबरदार पद पर नियुक्त होने के बाद वह भत्ते का हकदार नहीं है। इस मामले में नंबरदार ने राजकीय कोष को वित्तीय हानि पहुंचाई है।
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इन शिकायतों के आधार पर एसडीएम ने दोनों पक्षों को कार्यालय में तलब किया। राजेश व सुभाष ने नंबरदार पर आरोप लगाए तो वहीं नंबरदार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे रंजिशन लगाए गए आरोप बताए। एसडीएम ने राजेश व सुभाष के आरोपों को सही मानकर नंबरदार को दोषी ठहराते हुए उपायुक्त को रिपोर्ट भेजकर नंबरदार के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है।
देवीलाल नामक व्यक्ति का नाम देवीराम भी अंकित है। मेरे पास इसका प्रमाण भी है। मैने कोई गलत तस्दीक नहीं की। मुझे बेवजह फंसाने के लिए मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया है। सुभाष सीएम विंडो पर दो बार अपने ब्यान बदल चुका है। सुभाष की मेरे खिलाफ दी एक शिकायत डिस्पोज ऑफ हो चुकी है। जिसके बाद मैं निर्दोष साबित भी हुआ। फिर सुभाष ने राजेश व अन्य के कहने पर लालच में आकर मेरे खिलाफ झूठी शिकायत दी है। मैंने रजिस्ट्री के बदले किसी से कोई फीस की मांग नहीं की।
- विनोद कुमार, नंबरदार
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शिकायतकर्ता सुभाष कुमार के अनुसार वह अपने बच्चों का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म पर हस्ताक्षर करवाने गया था। आरोप है कि नंबरदार विनोद कुमार ने हस्ताक्षर करने की एवज में फीस की मांग की। सुभाष ने जब फीस देने से इंकार किया तो नंबरदार ने प्रमाण पत्र रिपोर्ट करने से स्पष्ट मना कर दिया। सुभाष का कहना है कि फार्म पर सरपंच की रिपोर्ट भी की हुई थी लेकिन फिर भी नंबरदार ने इंकार कर दिया। सुभाष ने उपायुक्त को शिकायत भेजकर नंबरदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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दूसरे शिकायतकर्ता राजेश कुमार का कहना है कि उसके पिता देवीलाल के नाम की जगह देवी राम की शिनाख्त कर किसी अन्य व्यक्ति को दे दी। उसकेे पिता का नाम देवी राम किसी भी दस्तावेजों में नहीं है। राजेश का आरोप है कि नंबरदार विनोद कुमार ने ये तस्दीक जान बूझकर की है। आरोप है कि विनोद कुमार ने अपने नंबरदार पद का दुरुपयोग करते हुए गलत तस्दीक कर उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया है। आरोप ये भी है कि विनोद कुमार गांव में रजिस्ट्री करवाने की एवज में पैसे लेता है। इस मामले में राजेश ने उपायुक्त को उन लोगों के शपथ पत्र व अन्य दस्तावेज सौंपे हैं। जिनकी रजिस्ट्रियां विनोद कुमार द्वारा पैसे मांगने पर अन्य गांव के नंबरदारों द्वारा करवाई गई है। राजेश का आरोप है कि नंबरदार ने वर्ष 2005 से 2008 तक बेरोजगारी भत्ता भी लिया है। जबकि नंबरदार पद पर नियुक्त होने के बाद वह भत्ते का हकदार नहीं है। इस मामले में नंबरदार ने राजकीय कोष को वित्तीय हानि पहुंचाई है।
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इन शिकायतों के आधार पर एसडीएम ने दोनों पक्षों को कार्यालय में तलब किया। राजेश व सुभाष ने नंबरदार पर आरोप लगाए तो वहीं नंबरदार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे रंजिशन लगाए गए आरोप बताए। एसडीएम ने राजेश व सुभाष के आरोपों को सही मानकर नंबरदार को दोषी ठहराते हुए उपायुक्त को रिपोर्ट भेजकर नंबरदार के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है।
देवीलाल नामक व्यक्ति का नाम देवीराम भी अंकित है। मेरे पास इसका प्रमाण भी है। मैने कोई गलत तस्दीक नहीं की। मुझे बेवजह फंसाने के लिए मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया है। सुभाष सीएम विंडो पर दो बार अपने ब्यान बदल चुका है। सुभाष की मेरे खिलाफ दी एक शिकायत डिस्पोज ऑफ हो चुकी है। जिसके बाद मैं निर्दोष साबित भी हुआ। फिर सुभाष ने राजेश व अन्य के कहने पर लालच में आकर मेरे खिलाफ झूठी शिकायत दी है। मैंने रजिस्ट्री के बदले किसी से कोई फीस की मांग नहीं की।
- विनोद कुमार, नंबरदार