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Sirsa News: कविता के घर में चूड़ियों की खनखनाहट से खनकने लगीं लक्ष्मी
Tue, 17 Feb 2026 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:24 PM IST
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गांव चक्कां की कविता देवी अपने घर पर चुड़ियां बनाती हुई। स्वयं
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नारी नई राह पर : चक्कां गांव की कविता देवी ने चूड़ियों के कारोबार से बनाई पहचान, जिले से लेकर अन्य राज्यों तक फैलाया कारोबार
- ग्राहकों की पसंद के अनुसार बनाती हैं लाख, सिप और कांच की चूड़ियां
फोटो- 21
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चूड़ियों की खनखनाहट के साथ ही गांव चक्का की कविता देवी के घर में लक्ष्मी भी खनकती हैं। कविता देवी की अपने घर पर बनाई गईं चूड़ियां जिले से अलग-अलग राज्यों तक जाती हैं। इसी मेहनत की बदौलत कविता हर महीने करीब 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
कविता देवी वर्ष 2019 में एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। उस समय परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। पति संदीप की स्प्रे की दुकान से होने वाली आय सीमित थी, जिससे घर खर्च और बच्चों की पढ़ाई का बोझ उठाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कविता देवी ने ठान लिया कि वह भी कुछ ऐसा काम करेंगी, जिससे परिवार को सहारा मिल सके और उन्हें खुद की एक पहचान भी मिल पाए। शुरुआत में उन्होंने घर पर ही चूड़ियां बनाने का काम शुरू किया।
चूड़ियों को कस्टमाइज भी करती हैं महिला
वह लाख की, सिप (शंख) की और कांच की चूड़ियां तैयार करती हैं। समय के साथ उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझते हुए कस्टमाइज चूड़ियां बनाना भी शुरू कर दिया। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में खास डिजाइन की मांग बढ़ जाती है, जिसे वह बड़ी लगन से पूरे करती हैं। कविता देवी का कहना है कि शुरुआत आसान नहीं थी। सीमित संसाधनों और कम पूंजी के कारण काम को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय उनके लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
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सीसीएल ऋण लेकर काम को बढ़ाया
कविता देवी ने ग्रुप के माध्यम से सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) लोन लिया। करीब 1 साल पहले उन्होंने डेढ़ लाख रुपये का ऋण काम को बढ़ाने के लिए लिया था। इस राशि से उन्होंने कच्चा माल अधिक मात्रा में खरीदना, नए डिजाइन तैयार करना और ऑर्डर बढ़ाना शुरू किया। लोन लेने के बाद उनके काम में तेजी आई। पहले जहां वह सीमित ऑर्डर ही ले पाती थीं, वहीं, अब वह बड़े पैमाने पर चूड़ियां तैयार कर रही हैं। उनका तैयार किया हुआ सामान पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक भेजा जाता है।
फेरी वाले भी ले जाते हैं चूड़ियां
फेरी वाले भी उनके घर से माल लेकर अलग-अलग शहरों और गांवों में बेचते हैं। इस तरह उनका काम धीरे-धीरे गांव की सीमाओं से निकलकर अन्य राज्यों तक पहुंच गया है। कविता देवी बताती हैं कि त्योहारों और शादी के सीजन में काम और बढ़ जाता है। करवा चौथ, तीज, शादी-ब्याह और अन्य पारंपरिक अवसरों पर उनकी चूड़ियों की खास मांग रहती है। वह ग्राहकों की पसंद के अनुसार रंग, डिजाइन और साइज में बदलाव भी करती हैं, जिससे उनकी अलग पहचान बनी है।
हर महीने कमा रही हैं 30 हजार रुपये
आज वह हर महीने लगभग 30 हजार रुपये तक की कमाई कर लेती हैं। इससे न केवल घर का खर्च आसानी से चल रहा है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतें भी पूरी हो रही हैं। उनके दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी। कविता देवी का कहना है कि वह चाहती हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और अपने पैरों पर खड़े हों। पति संदीप भी उनके काम में पूरा सहयोग करते हैं। संदीप की स्प्रे की दुकान है, लेकिन खाली समय में वह पत्नी का हौसला बढ़ाते हैं। जरूरत पड़ने पर मदद भी करते हैं।
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- ग्राहकों की पसंद के अनुसार बनाती हैं लाख, सिप और कांच की चूड़ियां
फोटो- 21
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चूड़ियों की खनखनाहट के साथ ही गांव चक्का की कविता देवी के घर में लक्ष्मी भी खनकती हैं। कविता देवी की अपने घर पर बनाई गईं चूड़ियां जिले से अलग-अलग राज्यों तक जाती हैं। इसी मेहनत की बदौलत कविता हर महीने करीब 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
कविता देवी वर्ष 2019 में एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। उस समय परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। पति संदीप की स्प्रे की दुकान से होने वाली आय सीमित थी, जिससे घर खर्च और बच्चों की पढ़ाई का बोझ उठाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कविता देवी ने ठान लिया कि वह भी कुछ ऐसा काम करेंगी, जिससे परिवार को सहारा मिल सके और उन्हें खुद की एक पहचान भी मिल पाए। शुरुआत में उन्होंने घर पर ही चूड़ियां बनाने का काम शुरू किया।
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चूड़ियों को कस्टमाइज भी करती हैं महिला
वह लाख की, सिप (शंख) की और कांच की चूड़ियां तैयार करती हैं। समय के साथ उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझते हुए कस्टमाइज चूड़ियां बनाना भी शुरू कर दिया। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में खास डिजाइन की मांग बढ़ जाती है, जिसे वह बड़ी लगन से पूरे करती हैं। कविता देवी का कहना है कि शुरुआत आसान नहीं थी। सीमित संसाधनों और कम पूंजी के कारण काम को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय उनके लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
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सीसीएल ऋण लेकर काम को बढ़ाया
कविता देवी ने ग्रुप के माध्यम से सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) लोन लिया। करीब 1 साल पहले उन्होंने डेढ़ लाख रुपये का ऋण काम को बढ़ाने के लिए लिया था। इस राशि से उन्होंने कच्चा माल अधिक मात्रा में खरीदना, नए डिजाइन तैयार करना और ऑर्डर बढ़ाना शुरू किया। लोन लेने के बाद उनके काम में तेजी आई। पहले जहां वह सीमित ऑर्डर ही ले पाती थीं, वहीं, अब वह बड़े पैमाने पर चूड़ियां तैयार कर रही हैं। उनका तैयार किया हुआ सामान पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक भेजा जाता है।
फेरी वाले भी ले जाते हैं चूड़ियां
फेरी वाले भी उनके घर से माल लेकर अलग-अलग शहरों और गांवों में बेचते हैं। इस तरह उनका काम धीरे-धीरे गांव की सीमाओं से निकलकर अन्य राज्यों तक पहुंच गया है। कविता देवी बताती हैं कि त्योहारों और शादी के सीजन में काम और बढ़ जाता है। करवा चौथ, तीज, शादी-ब्याह और अन्य पारंपरिक अवसरों पर उनकी चूड़ियों की खास मांग रहती है। वह ग्राहकों की पसंद के अनुसार रंग, डिजाइन और साइज में बदलाव भी करती हैं, जिससे उनकी अलग पहचान बनी है।
हर महीने कमा रही हैं 30 हजार रुपये
आज वह हर महीने लगभग 30 हजार रुपये तक की कमाई कर लेती हैं। इससे न केवल घर का खर्च आसानी से चल रहा है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतें भी पूरी हो रही हैं। उनके दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी। कविता देवी का कहना है कि वह चाहती हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और अपने पैरों पर खड़े हों। पति संदीप भी उनके काम में पूरा सहयोग करते हैं। संदीप की स्प्रे की दुकान है, लेकिन खाली समय में वह पत्नी का हौसला बढ़ाते हैं। जरूरत पड़ने पर मदद भी करते हैं।