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जाट आंदोलन : माता-पिता नहीं कर पाए कन्यादान, ताऊ ने निभाई सारी रस्में
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Mon, 22 Feb 2016 11:30 PM IST
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जाट आरक्षण की आग में किसी का बेटा तो किसी का भाई या किसी का पति
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जान से गया तो उधर किसी का घर तो किसी की दुकान जली।
किसी के प्रणय बंधन में बंधने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। हाथरस उत्तर प्रदेश की लक्ष्मी के माता पिता उसका कन्या दान तक नहीं कर पाए, भला हो एक दुकानदार का जिसकी मदद से लक्ष्मी मंडप तक पहुंची और ताऊ ने सारी रस्में निभाई।
कन्या पक्ष के लोग 16 फरवरी को बस में सवार होकर सिरसा आ रहे थे, प्रदर्शनकारियों ने उनकी बस को सांपला में रोक लिया था। सभी ने प्रदर्शनकारियों की मिन्नतें की और बुजुर्गों ने इज्जत की दुहाई देकर आगे जाने की अनुरोध किया पर उनकी एक न सुनी गई। अब लक्ष्मी अपने पति के साथ मायके जाने की उम्मीद लगाए बैठी है कि कब परिवहन सेवा बहाल होगी।
स्थानीय मोहता गार्डन निवासी हुक्मचंद भालिया ने बताया कि उनके भाई देवकीनंदन भालिया का बेटा जितेंद्र कुमार जो गली खान साहिब वाली में दुकान करता है का रिश्ता हाथरस उत्तर प्रदेश के हाथरस निवासी गोपालदास की बेटी लक्ष्मी उर्फ आरती के साथ तय हुआ था।
देवकीनंदन ने सिरसा में ही विवाह आयोजन रखा जिसमें कन्या पक्ष के लोगों को सिरसा में आकर ही सारी रस्में पूरी करनी थी। शादी की तिथि 16 फरवरी तय हुई। हुक्मचंद ने बताया कि लड़की वालों को 16 फरवरी की सुबह छह बजे तक सिरसा पहुंचना था और शादी रात की तय हुई दिन में शादी की अन्य रस्में निभाई जानी थी।
उन्होंने बताया कि कन्या पक्ष के लोग एक बस और एक कार में सवार होकर 15 फरवरी की रात को हाथरस से सिरसा के लिए रवाना हुए। जब बस रोहतक जिले के सांपला ओवर ब्रिज के पास पहुंची तो जाट आरक्षण आंदोलन प्रदर्शनकारियों ने उनकी बस को रोक लिया और आगे नहीं जाने दिया।
बस में सवार हर किसी ने प्रदर्शनकारियों से गुहार की पर उनका दिल नहीं पसीजा। लड़की के माता पिता ने इज्जत की दुहाई देकर आगे जाने देने को कहा तो प्रदर्शनकारियों ने बस में आग लगाने की चेतावनी दे डाली। बस और कार में करीब 60 लोग सवार थे सभी सहम गए और चुपचाप बस में बैठे रहे सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को हुई जो खाना, पानी साथ लेकर आए थे वह भी खत्म हो चुका था।
उन्होंने बताया कि 16 फरवरी की शाम को सांपला पुल के पास एक दुकान मालिक से लड़की के परिजनों ने बातकर मदद की गुहार की तो उसने कहा कि वह अपनी बाइक दे सकता है। इस पर दुकानदार की बाइक लेकर एक युवक दुल्हन और उसके ताऊ को लेकर रवाना हुआ।
इसके साथ ही लड़के वालों को स्थिति से अवगत करवाया जा चुका था। इसके बाद लड़के के परिवार के लोग कार लेकर अग्रोहा मोड़ पहुंचे और दुल्हन और उसके ताऊ को लेकर रात करीब एक बजे सिरसा पहुंचे, उधर युवक बाइक लेकर सांपला के लिए लौट गया।
बाद में दुल्हन के माता पिता और अन्य लोग सांपला से वापस हाथरस चले गए। उन्होंने बताया कि दुल्हन के ताऊ ने ही कन्यादान किया और शादी संपन्न हुई। दुल्हन का ताऊ तो बाया जयपुर और मथुरा होकर हाथरस चला गया अब रास्ते खुलने के बाद जितेंद्र लक्ष्मी को साथ लेकर पगफेरा करने हाथरस जाएगा।
उन्होंने बताया कि एक बार को तो शादी की उम्मीदें खत्म हो चुकी थी पर भला हो उस दुकानदार का जिसकी मदद से यह विवाह समारोह संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि मदद करने वाले दुकानदार ने अपना नाम और पता तक बताने से इंकार कर दिया कि उसे सांपला में ही रहना है और वह नाम बताकर कोई खतरा मौल नहीं लेना चाहता। जितेंद्र के परिजनों ने कहा कि इस घटना के साथ साथ वह दुकानदार जरूर याद रहेगा जिसने उनकी मदद की।
किसी के प्रणय बंधन में बंधने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। हाथरस उत्तर प्रदेश की लक्ष्मी के माता पिता उसका कन्या दान तक नहीं कर पाए, भला हो एक दुकानदार का जिसकी मदद से लक्ष्मी मंडप तक पहुंची और ताऊ ने सारी रस्में निभाई।
कन्या पक्ष के लोग 16 फरवरी को बस में सवार होकर सिरसा आ रहे थे, प्रदर्शनकारियों ने उनकी बस को सांपला में रोक लिया था। सभी ने प्रदर्शनकारियों की मिन्नतें की और बुजुर्गों ने इज्जत की दुहाई देकर आगे जाने की अनुरोध किया पर उनकी एक न सुनी गई। अब लक्ष्मी अपने पति के साथ मायके जाने की उम्मीद लगाए बैठी है कि कब परिवहन सेवा बहाल होगी।
स्थानीय मोहता गार्डन निवासी हुक्मचंद भालिया ने बताया कि उनके भाई देवकीनंदन भालिया का बेटा जितेंद्र कुमार जो गली खान साहिब वाली में दुकान करता है का रिश्ता हाथरस उत्तर प्रदेश के हाथरस निवासी गोपालदास की बेटी लक्ष्मी उर्फ आरती के साथ तय हुआ था।
देवकीनंदन ने सिरसा में ही विवाह आयोजन रखा जिसमें कन्या पक्ष के लोगों को सिरसा में आकर ही सारी रस्में पूरी करनी थी। शादी की तिथि 16 फरवरी तय हुई। हुक्मचंद ने बताया कि लड़की वालों को 16 फरवरी की सुबह छह बजे तक सिरसा पहुंचना था और शादी रात की तय हुई दिन में शादी की अन्य रस्में निभाई जानी थी।
उन्होंने बताया कि कन्या पक्ष के लोग एक बस और एक कार में सवार होकर 15 फरवरी की रात को हाथरस से सिरसा के लिए रवाना हुए। जब बस रोहतक जिले के सांपला ओवर ब्रिज के पास पहुंची तो जाट आरक्षण आंदोलन प्रदर्शनकारियों ने उनकी बस को रोक लिया और आगे नहीं जाने दिया।
बस में सवार हर किसी ने प्रदर्शनकारियों से गुहार की पर उनका दिल नहीं पसीजा। लड़की के माता पिता ने इज्जत की दुहाई देकर आगे जाने देने को कहा तो प्रदर्शनकारियों ने बस में आग लगाने की चेतावनी दे डाली। बस और कार में करीब 60 लोग सवार थे सभी सहम गए और चुपचाप बस में बैठे रहे सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को हुई जो खाना, पानी साथ लेकर आए थे वह भी खत्म हो चुका था।
उन्होंने बताया कि 16 फरवरी की शाम को सांपला पुल के पास एक दुकान मालिक से लड़की के परिजनों ने बातकर मदद की गुहार की तो उसने कहा कि वह अपनी बाइक दे सकता है। इस पर दुकानदार की बाइक लेकर एक युवक दुल्हन और उसके ताऊ को लेकर रवाना हुआ।
इसके साथ ही लड़के वालों को स्थिति से अवगत करवाया जा चुका था। इसके बाद लड़के के परिवार के लोग कार लेकर अग्रोहा मोड़ पहुंचे और दुल्हन और उसके ताऊ को लेकर रात करीब एक बजे सिरसा पहुंचे, उधर युवक बाइक लेकर सांपला के लिए लौट गया।
बाद में दुल्हन के माता पिता और अन्य लोग सांपला से वापस हाथरस चले गए। उन्होंने बताया कि दुल्हन के ताऊ ने ही कन्यादान किया और शादी संपन्न हुई। दुल्हन का ताऊ तो बाया जयपुर और मथुरा होकर हाथरस चला गया अब रास्ते खुलने के बाद जितेंद्र लक्ष्मी को साथ लेकर पगफेरा करने हाथरस जाएगा।
उन्होंने बताया कि एक बार को तो शादी की उम्मीदें खत्म हो चुकी थी पर भला हो उस दुकानदार का जिसकी मदद से यह विवाह समारोह संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि मदद करने वाले दुकानदार ने अपना नाम और पता तक बताने से इंकार कर दिया कि उसे सांपला में ही रहना है और वह नाम बताकर कोई खतरा मौल नहीं लेना चाहता। जितेंद्र के परिजनों ने कहा कि इस घटना के साथ साथ वह दुकानदार जरूर याद रहेगा जिसने उनकी मदद की।