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ओरल और ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी

Mon, 14 Oct 2019 12:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 14 Oct 2019 12:06 AM IST
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increase in the number of female patients suffering from oral and breast cancer
महिलाओं में ओरल कैंसर आजिला के सिविल अस्पताल ने जिले में स्वास्थ्य को लेकर एक सर्वे किया गया। सर्वे के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के घरों में जाकर बीमारियों की जांच की और उनकी रोकथाम के उपाय बताए। जिले में अधिकतर मरीज कैंसर के मिले जो अंतिम स्टेज पर थे। जिले में अभी तक 110 कैंसर मरीजों के बस पास बन चुके हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी गांवों में जाकर एक सर्वे किया। सर्वे के दौरान घरों में स्वास्थ्य विभाग की एनएम ने लोगों के खून के सैंपल लेकर उनकी जांच की। विभाग ने कई रोगों जैसे हाइपर टेंशन, शुगर, ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर तथा सर्वाइकल कैंसर की जांच की। विभाग द्वारा यह सर्वे प्रतिवर्ष घर-घर जाकर सर्वे किया जाता है।
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सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार जिले में इस वर्ष सबसे ज्यादा महिलाओं में ओरल कैंसर तथा ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों के संख्या बढ़ गई है। वहीं इस वर्ष अन्य बीमारियों जैसे शुगर, बीपी तथा सर्वाइकल कैंसर के मरीजों में बहुत ज्यादा कमी हुई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंसर के मरीजों को सुविधाएं देने के लिए बस पास बनाए जाते हैं। जिले के सिविल अस्पताल में इस वर्ष 110 लोगों ने अपने बस पास बनवाए है। वहीं पिछले साल पास बनवाने वालों की संख्या 137 थी।
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सर्वे में मरीजों की संख्या की रिपार्ट
वर्ष शुगर के मरीज बीपी के मरीज ओरल कैंसर ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइकल कैंसर महिलाएं
2017-18 4654 5667 46 35 17
2018-19 2342 2839 18 08 15
2019-20 1407 1246 91 70 10
कुल 8405 9752 155 113 42
इतने मरीज शक के दायरे में
वर्ष शुगर बीपी ओरल कैंसर ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइकल कैंसर महिलाएं
2019-20 853 904 19 3 2
सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष संभावित मरीजों की संख्या बहुत ही कम हुई है। सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार संभावित मरीजों की संख्या में बीते दो सालों से इस वर्ष गिरावट आई है जो बहुत ही अच्छी बात है।
बीमारी को छिपाने की आदत है खतरनाक
जिला एनसीडी सेल की डॉ. आशा जिंदल ने बताया कि अधिक्तर लोग अपनी बीमारी को छिपाने की कोशिश करते हैं। जिसमें अधिक्तर महिलाएं होती है। जो ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारी के लक्षण होते हुए भी वह घर अथवा डॉक्टर को बताने में हिचकिचाती है। जिसका परिणाम बहुत ही घातक होता है। अगर शुरूआत में ही कोई मरीज महिला अथवा पुरुष अपनी बीमारी का बता दें तो उसका इलाज संभव है। लोग अक्सर अंतिम स्टेज पर आकर अपनी बीमारी के बारे में बताते हैं जिसका इलाज करना भी मुश्किल हो जाता है।

चटपटा खाना कम करना चाहिए। प्रतिदिन 150 मिनट की सैर जरूर करें। अगर किसी को भी अपने शरीर में बदलाव तथा किसी बीमारी के लक्षण पता लगते हैं तो इसके बारे में वह डॉक्टर से जानकारी लें तथा सिविल अस्पताल में आकर जांच करवाएं। कोई भी बात हो वह डॉक्टर को खुल कर बताएं जिससे डॉक्टर को इलाज करने में आसानी हो।
-डॉ. आशा जिंदल, सिविल अस्पताल सिरसा।
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