{"_id":"61dc7a84efe1394b8f685a51","slug":"handle-children-before-they-get-used-to-mobile-phones-sirsa-news-hsr6217238164","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोबाइल फोन की आदत पड़े, उससे पहले संभाल लें बच्चों को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोबाइल फोन की आदत पड़े, उससे पहले संभाल लें बच्चों को
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में ओपीडी में काउंसिलिंग करते मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शर्मा।
- फोटो : Sirsa
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिरसा। हमें याद है, कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान स्कूल बंद हो गए और बच्चों को घर से ही पढ़ाई करनी पड़ी। ऑनलाइन पढ़ाई का माध्यम मोबाइल ज्यादा रहा। इसके अच्छे के साथ विपरीत प्रभाव बच्चों पर पड़ा। जिस कारण कई बच्चे आक्रामक भी हो गए। बाद में शिक्षण संस्थान खुलने पर जहां एक ओर कई बच्चों ने स्कूल जाने से इनकार कर दिया तो, वहीं कई बच्चों ने अभिभावकों के समक्ष अजब-गजब मांगें भी रख दी। ऐसे में तीसरी लहर के बीच कोरोना संक्रमण का फैलाव हो रहा और शिक्षण संस्थान बंद हो गए हैं। इसलिए बच्चों पर विशेष निगाह रखने की जरूरत है ताकि बाद में समस्या का सामना ना करना पड़े।
कोरोना संक्रमण के फैलाव के कारण सभी शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं। खासकर सभी बच्चे एक बार फिर ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था पर आ गए हैं। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई मोबाइल के साथ-साथ लैपटॉप पर भी की जा सकती है। लेकिन 95 फीसदी बच्चों की पढ़ाई मोबाइल के माध्यम से हो रही है। ऐसे में बच्चों की खास मॉनीटरिंग करने की जरूरत है। अन्यथा अभिभावकों की लापरवाही उन पर भारी पड़ सकती है। नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शर्मा ने अभिभावकों के लिए कुछ सुझाव बताए हैं। संवाद
पिछली बार आई थी ये समस्या, अब अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत
कोराना कॉल की पहली और दूसरी लहर खत्म होने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई के साइड इफेक्ट सामने आए। नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शर्मा के पास अनोखा केस आया। अभिभावक अपनी 12 साल की बेटी को साथ लेकर आए। बच्ची की अभिभावकों से अजीब डिमांड थी, कि शादी करनी है। डॉक्टर ने काउंसिलिंग की तो पता चला कि ऑनपढ़ाई के दौरान छात्रा पोर्न कंटेट की एडिक्ट हो गई थी। हालांकि डॉक्टर ने सूझबूझ से केस से सफलतापूर्वक सुलझाया। इसी तरह एक और केस आया कि कक्षाएं नियमित रूप से शुरू होने पर बच्चे ने स्कूल जाने से ही इनकार कर दिया। इसी तरह के कई केस आए जिनका यहां खुलासा नहीं किया जा सकता। इसलिए अभिभावकों को इस बार पहले ही समझना होगा ताकि इस बार स्थिति ना बिगड़े।
विज्ञापन
ये है अभिभावकों के लिए टिप्स
-अभिभावक बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान उनके साथ रहें और नियमित मॉनिटरिंग करें।
-कोशिश करें कि कम मोबाइल का इस्तेमाल करें।
-जरूरी नहीं कि सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक लगातार सभी कक्षाएं ऑनलाइन चलें।
-यदि बच्चे का हावभाव बदले तो इसे हल्के में ना लें।
-बच्चा कमरे में अकेला रहना पसंद करे तो तुरंत अभिभावक ध्यान दें।
-बच्चों को घर के काम भी सिखाएं और उनके मित्र बनकर विचार साझा करें।
ऑनलाइन पढ़ाई से हम पीछा नहीं छुड़ा सकते। लेकिन इस ओर अभिभावकों को खास ध्यान देना होगा। बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप जरूर दें लेकिन एक निर्धारित सीमा तक। बच्चों का मनोविज्ञान समझने के लिए उनका मित्र बनना होगा। बच्चों को घर के काम भी सिखाएं और उनके हावभाव बदलें तो इसे कतई नजरअंदाज ना करें।
-डॉ. पंकज शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, सिरसा।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण के फैलाव के कारण सभी शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं। खासकर सभी बच्चे एक बार फिर ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था पर आ गए हैं। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई मोबाइल के साथ-साथ लैपटॉप पर भी की जा सकती है। लेकिन 95 फीसदी बच्चों की पढ़ाई मोबाइल के माध्यम से हो रही है। ऐसे में बच्चों की खास मॉनीटरिंग करने की जरूरत है। अन्यथा अभिभावकों की लापरवाही उन पर भारी पड़ सकती है। नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शर्मा ने अभिभावकों के लिए कुछ सुझाव बताए हैं। संवाद
विज्ञापन
पिछली बार आई थी ये समस्या, अब अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत
कोराना कॉल की पहली और दूसरी लहर खत्म होने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई के साइड इफेक्ट सामने आए। नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शर्मा के पास अनोखा केस आया। अभिभावक अपनी 12 साल की बेटी को साथ लेकर आए। बच्ची की अभिभावकों से अजीब डिमांड थी, कि शादी करनी है। डॉक्टर ने काउंसिलिंग की तो पता चला कि ऑनपढ़ाई के दौरान छात्रा पोर्न कंटेट की एडिक्ट हो गई थी। हालांकि डॉक्टर ने सूझबूझ से केस से सफलतापूर्वक सुलझाया। इसी तरह एक और केस आया कि कक्षाएं नियमित रूप से शुरू होने पर बच्चे ने स्कूल जाने से ही इनकार कर दिया। इसी तरह के कई केस आए जिनका यहां खुलासा नहीं किया जा सकता। इसलिए अभिभावकों को इस बार पहले ही समझना होगा ताकि इस बार स्थिति ना बिगड़े।
विज्ञापन
ये है अभिभावकों के लिए टिप्स
-अभिभावक बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान उनके साथ रहें और नियमित मॉनिटरिंग करें।
-कोशिश करें कि कम मोबाइल का इस्तेमाल करें।
-जरूरी नहीं कि सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक लगातार सभी कक्षाएं ऑनलाइन चलें।
-यदि बच्चे का हावभाव बदले तो इसे हल्के में ना लें।
-बच्चा कमरे में अकेला रहना पसंद करे तो तुरंत अभिभावक ध्यान दें।
-बच्चों को घर के काम भी सिखाएं और उनके मित्र बनकर विचार साझा करें।
ऑनलाइन पढ़ाई से हम पीछा नहीं छुड़ा सकते। लेकिन इस ओर अभिभावकों को खास ध्यान देना होगा। बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप जरूर दें लेकिन एक निर्धारित सीमा तक। बच्चों का मनोविज्ञान समझने के लिए उनका मित्र बनना होगा। बच्चों को घर के काम भी सिखाएं और उनके हावभाव बदलें तो इसे कतई नजरअंदाज ना करें।
-डॉ. पंकज शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, सिरसा।