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Sirsa News: रंगोली बनाकर नारियल के महत्व का दिया संदेश
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सिरसा । सीएलयू में विश्व नारियल दिवस पर पेटिंग प्रतियोगिता में विजेता को सम्मानित करते हुए शिक
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के वनस्पति विज्ञान विभाग की बॉटनिकल सोसायटी की ओर से मंगलवार को विश्व नारियल दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में रंगोली प्रतियोगिता करवाई गई। प्रतिभागियों ने आकर्षक और रंग-बिरंगी रंगोली बनाकर नारियल के महत्व एवं पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।
इस प्रतियोगिता में एमएससी बॉटनी एवं बीएससी-एमएससी. इंटीग्रेटेड लाइफ साइंस कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने भाग लिया। वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद काशिफ किदवई ने बताया कि इसका उद्देश्य भोजन, स्वास्थ्य, सौंदर्य प्रसाधन, सतत जीवन शैली और पर्यावरण संरक्षण में नारियल के बहुआयामी उपयोग के प्रति जागरूकता फैलाना था।
प्रो. मोहम्मद ने कहा कि विश्व स्तर पर नारियल की उपयोगिता है। नारियल का प्रयोग दवा, खाद्य सामग्री व अन्य चीजों में होता है। नारियल की गुणों के महत्ता की जानकारी हमारे ऐतिहासिक व पौराणिक ग्रंथों में देखने को मिली है। रंगोली प्रतियोगिता का मूल्यांकन डीन शिक्षा संकाय प्रो. निवेदिता हुड्डा, डीन लाइफ साइंसेज प्रो. जेएस दुहन, जनसंपर्क निदेशक डॉ. अमित सांगवान एवं एफएसटी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मंजू नेहरा ने किया।
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विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर ज्योति सांगवान ने बताया कि नारियल को अकसर जीवन का वृक्ष कहा जाता है और कार्यक्रम इसी संदेश के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने प्रतिभागियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि नारियल केवल पौष्टिक आहार और स्वास्थ्यवर्धक पेय का ही स्रोत नहीं है, बल्कि यह तेल, रेशे, दूध, सौंदर्य प्रसाधन, बर्तन एवं जैव-आधारित उत्पादों जैसे अनेक संसाधन प्रदान करता है।
प्रतियोगिता में खुशी ने मारी बाजी
प्रतियोगिता में बीएससी, एमएससी इंटीग्रेटेड प्रोग्राम की खुशी ने प्रथम स्थान, एमएससी बॉटनी प्रीवियस कंचन ने द्वितीय स्थान एवं एमएससी बॉटनी फाइनल की ऋतु ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागियों ने यह शपथ ली कि वे नारियल एवं इसके उत्पादों का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देंगे। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ज्योति रानी, ममता रानी एवं संदीप के मार्गदर्शन में हुआ।
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इस प्रतियोगिता में एमएससी बॉटनी एवं बीएससी-एमएससी. इंटीग्रेटेड लाइफ साइंस कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने भाग लिया। वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद काशिफ किदवई ने बताया कि इसका उद्देश्य भोजन, स्वास्थ्य, सौंदर्य प्रसाधन, सतत जीवन शैली और पर्यावरण संरक्षण में नारियल के बहुआयामी उपयोग के प्रति जागरूकता फैलाना था।
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प्रो. मोहम्मद ने कहा कि विश्व स्तर पर नारियल की उपयोगिता है। नारियल का प्रयोग दवा, खाद्य सामग्री व अन्य चीजों में होता है। नारियल की गुणों के महत्ता की जानकारी हमारे ऐतिहासिक व पौराणिक ग्रंथों में देखने को मिली है। रंगोली प्रतियोगिता का मूल्यांकन डीन शिक्षा संकाय प्रो. निवेदिता हुड्डा, डीन लाइफ साइंसेज प्रो. जेएस दुहन, जनसंपर्क निदेशक डॉ. अमित सांगवान एवं एफएसटी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मंजू नेहरा ने किया।
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विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर ज्योति सांगवान ने बताया कि नारियल को अकसर जीवन का वृक्ष कहा जाता है और कार्यक्रम इसी संदेश के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने प्रतिभागियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि नारियल केवल पौष्टिक आहार और स्वास्थ्यवर्धक पेय का ही स्रोत नहीं है, बल्कि यह तेल, रेशे, दूध, सौंदर्य प्रसाधन, बर्तन एवं जैव-आधारित उत्पादों जैसे अनेक संसाधन प्रदान करता है।
प्रतियोगिता में खुशी ने मारी बाजी
प्रतियोगिता में बीएससी, एमएससी इंटीग्रेटेड प्रोग्राम की खुशी ने प्रथम स्थान, एमएससी बॉटनी प्रीवियस कंचन ने द्वितीय स्थान एवं एमएससी बॉटनी फाइनल की ऋतु ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागियों ने यह शपथ ली कि वे नारियल एवं इसके उत्पादों का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देंगे। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ज्योति रानी, ममता रानी एवं संदीप के मार्गदर्शन में हुआ।