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तहसीलदार सहित 10 लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज
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पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी के नाम खाजाखेड़ा गांव में लगभग 20 एकड़ जमीन को कुछ लोगों द्वारा फर्जी कागजात तैयार करके खरीद फरोख्त किए जाने के मामले में तत्कालीन तहसीलदार संजय चौधरी, रण सिंह पंजीकरण लिपिक, प्रवीन कुमार निवासी गांव सादेवाला, बलदेव कौर, परमजीत कौर निवासी जाटाणा कलां, सरदूलगढ़, सुखपाल कौर निवासी गांव कुसला, चरणजीत कौर निवासी रामपुर, विजयपाल मंदोरा, तहसील व जिला सोनीपत, अशोक अरोड़ा डायरेक्टर, जयचंद डायरेक्टर पर्ल ग्रीन फोरेस्ट इंडिया के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
तीन वर्ष पूर्व तहसील रानियां के गांव खाजाखेड़ा में 164 कनाल 15 मरले भूमि पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी के नाम जिसे विजयपाल निवासी सोनीपत ने पर्ल कंपनी के डायरेक्टर का हस्ताक्षर युक्त अथॉरिटी लेटर बनाकर सादेवाला के कुछ लोगों के साथ मिलकर बेचने की योजना बनाई। जिसमें पंजाब के कुछ लोग भी शामिल हुए। यह सौदा 60 लाख में तय हो गया। 20 मई 2017 को 7 लाख 72 हजार 300 रुपये के स्टांप पेपर लगाकर बिना वसीका नवीस के ड्राफ्टिंग किए कागजात तैयार करवा कर तत्कालीन तहसीलदार संजय चौधरी को प्रस्तुत किए गए। जिन्होंने विक्रेता विजयपाल द्वारा पर्ल कंपनी के सलंग्न पत्रों की जांच किए बिना ही रजिस्टरी दर्ज करवा दी। उक्त रजिस्टरी में गांव सादेवाला के प्रवीण कुमार सहित पंजाब के कुछ लोगों के नाम अलग अलग से दर्ज किए गए। इस मामले की शिकायत जिला उपायुक्त कार्यालय से लेकर सीएम दरबार तक पहुंची जिसे गंभीरता से लेते हुए सीएम कार्यालय ने सीएम उड़नदस्ता को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी। हिसार कार्यालय की उड़नदस्ता टीम ने 8 अप्रैल 2019 को मामले की तह तक जांच शुरू की। जिसमें काफी गड़बड़झाला सामने आया। जांच में पाया कि रानियां में उस समय तहसीलदार रविंद्र हुड्डा व सोमनाथ नायब तहसीलदार की ड्यूटी थी। लेकिन उन्होंने ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी की जमीन पर कोर्ट का स्टे होने व मामला लोढ़ा कमेटी के अधीन होने के कारण रजिस्टरी करने से इंकार कर दिया। जिसके चलते मौके के इंतजार में विक्रेता विजयपाल ने दोनों तहसीलदारों के छुट्टी वाले दिन ऐलनाबाद के तहसीलदार संजय चौधरी को कार्यभार सौंपने के दौरान कथित मिलीभगत करके 164 कनाल 15 मरले की भूमि को प्रोमिला, बलदेव कौर सरदूलगढ़, परमजीत कौर जाटान, सुखपाल कौर, चरणजीत कौर निवासी रायपुर को बेच दी। सीएम उड़नदस्ता की टीम ने सभी बिंदुओं पर जांच करते हुए क्रेता और विक्रेताओं के बयान दर्ज करवाए। जांच में पाया कि रजिस्टरी के समय सलंग्न दस्तावेजों में पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी के डायरेक्टर अशोक द्वारा जारी किया गया पत्र फर्जी निकला। जिसकी जांच रजिस्टरी करने से पूर्व रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी तहसीलदार द्वारा की जानी थी, जिसको नजरअंदाज किया गया। निरीक्षण टीम के समक्ष कुछ कमियां नजर आई, जिसके आधार पर उड़नदस्ता टीम ने तत्कालीन तहसीलदार संजय चौधरी, रजिस्टरी क्लर्क रणसिंह, विक्रेता विजयपाल सहित 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया है।
सीएम फ्लाइंग इंचार्ज बोले
सीएम फ्लाइंग हिसार टीम के इंचार्ज डीएसपी अजय शर्मा ने बताया कि खाजाखेड़ा में पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी के नाम जमीन की खरीद फरोख्त नहीं की जा सकती थी। जिस पर सर्वोच्च न्यायालय का स्टे है तथा इस मामले की जांच लोढ़ा कमेटी द्वारा की जा रही है। इस मामले में फर्जी कागजों के आधार पर जमीन को बेचा व खरीद लिया है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
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तीन वर्ष पूर्व तहसील रानियां के गांव खाजाखेड़ा में 164 कनाल 15 मरले भूमि पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी के नाम जिसे विजयपाल निवासी सोनीपत ने पर्ल कंपनी के डायरेक्टर का हस्ताक्षर युक्त अथॉरिटी लेटर बनाकर सादेवाला के कुछ लोगों के साथ मिलकर बेचने की योजना बनाई। जिसमें पंजाब के कुछ लोग भी शामिल हुए। यह सौदा 60 लाख में तय हो गया। 20 मई 2017 को 7 लाख 72 हजार 300 रुपये के स्टांप पेपर लगाकर बिना वसीका नवीस के ड्राफ्टिंग किए कागजात तैयार करवा कर तत्कालीन तहसीलदार संजय चौधरी को प्रस्तुत किए गए। जिन्होंने विक्रेता विजयपाल द्वारा पर्ल कंपनी के सलंग्न पत्रों की जांच किए बिना ही रजिस्टरी दर्ज करवा दी। उक्त रजिस्टरी में गांव सादेवाला के प्रवीण कुमार सहित पंजाब के कुछ लोगों के नाम अलग अलग से दर्ज किए गए। इस मामले की शिकायत जिला उपायुक्त कार्यालय से लेकर सीएम दरबार तक पहुंची जिसे गंभीरता से लेते हुए सीएम कार्यालय ने सीएम उड़नदस्ता को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी। हिसार कार्यालय की उड़नदस्ता टीम ने 8 अप्रैल 2019 को मामले की तह तक जांच शुरू की। जिसमें काफी गड़बड़झाला सामने आया। जांच में पाया कि रानियां में उस समय तहसीलदार रविंद्र हुड्डा व सोमनाथ नायब तहसीलदार की ड्यूटी थी। लेकिन उन्होंने ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी की जमीन पर कोर्ट का स्टे होने व मामला लोढ़ा कमेटी के अधीन होने के कारण रजिस्टरी करने से इंकार कर दिया। जिसके चलते मौके के इंतजार में विक्रेता विजयपाल ने दोनों तहसीलदारों के छुट्टी वाले दिन ऐलनाबाद के तहसीलदार संजय चौधरी को कार्यभार सौंपने के दौरान कथित मिलीभगत करके 164 कनाल 15 मरले की भूमि को प्रोमिला, बलदेव कौर सरदूलगढ़, परमजीत कौर जाटान, सुखपाल कौर, चरणजीत कौर निवासी रायपुर को बेच दी। सीएम उड़नदस्ता की टीम ने सभी बिंदुओं पर जांच करते हुए क्रेता और विक्रेताओं के बयान दर्ज करवाए। जांच में पाया कि रजिस्टरी के समय सलंग्न दस्तावेजों में पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी के डायरेक्टर अशोक द्वारा जारी किया गया पत्र फर्जी निकला। जिसकी जांच रजिस्टरी करने से पूर्व रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी तहसीलदार द्वारा की जानी थी, जिसको नजरअंदाज किया गया। निरीक्षण टीम के समक्ष कुछ कमियां नजर आई, जिसके आधार पर उड़नदस्ता टीम ने तत्कालीन तहसीलदार संजय चौधरी, रजिस्टरी क्लर्क रणसिंह, विक्रेता विजयपाल सहित 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया है।
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सीएम फ्लाइंग इंचार्ज बोले
सीएम फ्लाइंग हिसार टीम के इंचार्ज डीएसपी अजय शर्मा ने बताया कि खाजाखेड़ा में पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट्री कंपनी के नाम जमीन की खरीद फरोख्त नहीं की जा सकती थी। जिस पर सर्वोच्च न्यायालय का स्टे है तथा इस मामले की जांच लोढ़ा कमेटी द्वारा की जा रही है। इस मामले में फर्जी कागजों के आधार पर जमीन को बेचा व खरीद लिया है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
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