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Sirsa News: किसान आंदोलन ने रखी भाजपा की हार की नींव
Wed, 05 Jun 2024 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 05 Jun 2024 01:14 AM IST
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सिरसा। पंजाब से लगती सिरसा की बेल्ट में किसान आंदोलन का बड़ा असर देखने को मिला। चुनाव प्रचार के समय भाजपा प्रत्याशी को बार-बार विरोध का सामना करना पड़ रहा था और किसान सवालों के जवाब मांग रहे थे। ऐसे में किसानों ने भाजपा के खिलाफ जमकर मतदान किया। पंजाब से लगती कालांवाली, रानियां और डबवाली बेल्ट में कांग्रेस प्रत्याशी को अच्छे वोट मिले।
आंकड़ों के अनुसार डबवाली से 34205 , कालांवाली से 42113 और रानियां से 28201 वोट कांग्रेस को मिले। इन्हीं तीन क्षेत्रों में कुमारी सैलजा ने सबसे ज्यादा प्रचार-प्रसार पर फोक्स किया था। क्योंकि इन क्षेत्रों में किसान आंदोलन और तंवर की खुद की छवि का असर देखने को मिल रहा था। जहां किसान आंदोलन का नुकसान भाजपा प्रत्याशी को हुआ है। वहीं डेरों की ओर से कोई खास मदद इस बार मतदान में भाजपा को नहीं मिल पाई। डेरा सच्चा सौदा के बूथों पर कांग्रेस को अच्छी लीड मिली है। 20 प्रतिशत डेरा समर्थकों ने भाजपा को भी मतदान किया है। लेकिन 80 प्रतिशत झुकाव डेरों को कांग्रेस की ओर देखने को मिला है। सिरसा के साथ पूरे प्रदेश में डेरा का समर्थन कहीं न कहीं कांग्रेस को जाता हुआ दिखा है। जिसके चलते राजनीतिक समीकरणों में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। ऐसे में विधानसभा चुनाव को लेकर डेरों की गतिविधियां अभी से तेज हो गई हैं।
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रानियां, ऐलनाबाद और सिरसा शहर में भाजपा को नुकसान
भाजपा प्रत्याशी अशोक तंवर पर उनके दल बदलने की छवि बड़ी भारी पड़ी है। इसी छवि के कारण उन्हें रानियां, ऐलनाबाद और सिरसा शहर में नुकसान उठाना पड़ा है। एक पार्टी के प्रति स्थिरता न होना कहीं न कहीं लोगों को अखरा और लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
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भाजपा नेताओं का भीतरघात प्रत्याशी पर पड़ा भारी
लोकसभा चुनावों में पहली बार भाजपा संगठन में आपसी लड़ाई देखने को मिली है। जहां भाजपा के कई नेता पहले दिन से अशोक तंवर को प्रत्याशी बनाने और भाजपा ज्वाइन करवाने से नाराज थे। इसके अतिरिक्त संघ के कई नेताओं ने इसको लेकर नाराजगी जताई थी और आलाकमान को अवगत करवाया था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दो बार दौरा कर सभी को मनाने का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर भाजपा पार्टी के चुनाव फंड को लेकर जिलाध्यक्ष और पन्ना प्रमुखों के बीच खींचतान होना चर्चाओं में रहा। जिसका नुकसान प्रत्याशी को उठाना पड़ा। इतना ही नहीं, भाजपा नेता गोबिंद कांडा के साथ जिलाध्यक्ष की नहीं बनना और दरकिनार करना सिरसा और ऐलनाबाद क्षेत्र में चर्चा बना रहा। इसका नुकसान भी प्रत्याशी को हुआ। अहम बात यह है कि सिरसा में प्रत्याशी से ज्यादा भाजपा के दूसरे नेता चर्चाओं में रहे। जिसका खामियाजा प्रत्याशी को हुआ और इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व हाईकमान को अवगत करवाया गया।
ये रहा जीत हार का अंतर
सिरसा
सैलजा - 72399
तंवर - 59049
अंतर - 13350
-
डबवाली
सैलजा - 72806
तंवर - 38601
अंतर - 34205
--
कालावांली
सैलजा - 77618
तंवर-- 35505
अंतर - 42113
--
रानियां
सैलजा - 72380
तंवर - 44179
अंतर - 28201
-
ऐलनाबाद -
सैलजा - 74662
तंवर - 47446
अंतर-- 27216
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आंकड़ों के अनुसार डबवाली से 34205 , कालांवाली से 42113 और रानियां से 28201 वोट कांग्रेस को मिले। इन्हीं तीन क्षेत्रों में कुमारी सैलजा ने सबसे ज्यादा प्रचार-प्रसार पर फोक्स किया था। क्योंकि इन क्षेत्रों में किसान आंदोलन और तंवर की खुद की छवि का असर देखने को मिल रहा था। जहां किसान आंदोलन का नुकसान भाजपा प्रत्याशी को हुआ है। वहीं डेरों की ओर से कोई खास मदद इस बार मतदान में भाजपा को नहीं मिल पाई। डेरा सच्चा सौदा के बूथों पर कांग्रेस को अच्छी लीड मिली है। 20 प्रतिशत डेरा समर्थकों ने भाजपा को भी मतदान किया है। लेकिन 80 प्रतिशत झुकाव डेरों को कांग्रेस की ओर देखने को मिला है। सिरसा के साथ पूरे प्रदेश में डेरा का समर्थन कहीं न कहीं कांग्रेस को जाता हुआ दिखा है। जिसके चलते राजनीतिक समीकरणों में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। ऐसे में विधानसभा चुनाव को लेकर डेरों की गतिविधियां अभी से तेज हो गई हैं।
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रानियां, ऐलनाबाद और सिरसा शहर में भाजपा को नुकसान
भाजपा प्रत्याशी अशोक तंवर पर उनके दल बदलने की छवि बड़ी भारी पड़ी है। इसी छवि के कारण उन्हें रानियां, ऐलनाबाद और सिरसा शहर में नुकसान उठाना पड़ा है। एक पार्टी के प्रति स्थिरता न होना कहीं न कहीं लोगों को अखरा और लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
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भाजपा नेताओं का भीतरघात प्रत्याशी पर पड़ा भारी
लोकसभा चुनावों में पहली बार भाजपा संगठन में आपसी लड़ाई देखने को मिली है। जहां भाजपा के कई नेता पहले दिन से अशोक तंवर को प्रत्याशी बनाने और भाजपा ज्वाइन करवाने से नाराज थे। इसके अतिरिक्त संघ के कई नेताओं ने इसको लेकर नाराजगी जताई थी और आलाकमान को अवगत करवाया था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दो बार दौरा कर सभी को मनाने का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर भाजपा पार्टी के चुनाव फंड को लेकर जिलाध्यक्ष और पन्ना प्रमुखों के बीच खींचतान होना चर्चाओं में रहा। जिसका नुकसान प्रत्याशी को उठाना पड़ा। इतना ही नहीं, भाजपा नेता गोबिंद कांडा के साथ जिलाध्यक्ष की नहीं बनना और दरकिनार करना सिरसा और ऐलनाबाद क्षेत्र में चर्चा बना रहा। इसका नुकसान भी प्रत्याशी को हुआ। अहम बात यह है कि सिरसा में प्रत्याशी से ज्यादा भाजपा के दूसरे नेता चर्चाओं में रहे। जिसका खामियाजा प्रत्याशी को हुआ और इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व हाईकमान को अवगत करवाया गया।
ये रहा जीत हार का अंतर
सिरसा
सैलजा - 72399
तंवर - 59049
अंतर - 13350
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डबवाली
सैलजा - 72806
तंवर - 38601
अंतर - 34205
कालावांली
सैलजा - 77618
तंवर
अंतर - 42113
रानियां
सैलजा - 72380
तंवर - 44179
अंतर - 28201
-
ऐलनाबाद -
सैलजा - 74662
तंवर - 47446
अंतर