{"_id":"5da0b3ad8ebc3e013549ad12","slug":"farmers-locked-the-market-committees-gate-for-making-gold-bid-sirsa-news-rtk522645361","type":"story","status":"publish","title_hn":"नरमे की बोली शुरू न होने को लेकर किसानों ने मार्केट कमेटी के गेट पर जड़ा ताला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नरमे की बोली शुरू न होने को लेकर किसानों ने मार्केट कमेटी के गेट पर जड़ा ताला
विज्ञापन
मार्केट कमेटी के ताला बंद कर नारेबाजी करते किसान।
- फोटो : Sirsa
नअनाज मंडी सिरसा में किसानों ने नरमे व कपास की सरकारी बोली न होने को लेकर शुक्रवार सुबह मार्केट कमेटी के गेट पर ताला जड़ कर नारेबाजी करनी शुरू कर दी। किसानों ने करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया। मार्केट कमेटी सचिव विकास सेतिया ने सीसीआई के अधिकारियों को मौके पर बुलाने का आश्वासन दिया। किसानों तथा सीसीआई की एक बैठक बुलाई। जिसमें सीसीआई ने फैक्ट्रियों के साथ एग्रीमेंट न होने की बात कही। लेकिन सीसीआई के अधिकारियों के आश्वासनों से किसान संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने अपना धरना जारी रखने का फैसला किया।
शुक्रवार को जिले के अलग अलग गांवों से किसान अपने नरमे तथा कपास की फसल बेचने को लेकर मंडी में आए। किसान जब मंडी में पहुंचे तो नरमे की सीसीआई द्वारा सरकारी खरीद न कर पाने पर आक्रोशित हो गए और सभी किसान हरियाणा किसान मंच के प्रधान प्रहलाद भारूखेड़ा के साथ मार्केट कमेटी के मेन गेट के ताला जड़ दिया। गेट पर ताला जड़ने के बाद वहां पर मौजूद सभी किसान सीसीआई के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। किसान जगीर सिंह ने बताया कि आज 10 दिन से अधिक समय हो चुका है लेकिन सीसीआई उनकी फसल की खरीद नहीं कर रही। फसल की सरकारी खरीद ना होने पर किसानों ने कहा कि उन्हें कम दामों में अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। किसान तोता सिंह ने बताया कि निजी व्यापारी उनको अपने मन मुताबिक भाव दे रहे हैं जबकि सरकारी भाव 5450 रुपये प्रति क्विंटल है। ताला जड़ने के कुछ समय बाद मार्केट कमेटी के कर्मचारी किसानों को समझाने पहुंचे। लेकिन किसी ने उनकी कोई बात नहीं मानी। किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे कि जब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं होती तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे। किसान जगसीर ने बताया कि जब नरमे की फसल का समय निकल जाएगा तब सीसीआई बोली करेगी। इसका पूरा फायदा केवल व्यापारियों को जाएगा।
किसानों को कमेटी सचिव ने कार्यालय में बुलाया
मार्केट कमेटी के सचिव विकास सेतिया ने सभी किसानों को अपने कार्यालय में बुलाया तथा उनकी समस्या सुनी। उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि सीसीआई से उनकी बात हो गई है, उनका कहना है कि अभी तक फैक्ट्रियों के साथ उनका एग्रीमेंट नहीं हुआ है जिसको लेकर वे खरीद नहीं कर सकते। तभी किसान बोले कि इस फसल का सीजन चला जाएगा तब होगा क्या एग्रीमेंट। किसानों ने सचिव की कोई बात नहीं सुनी और किसान हरनेक सिंह, कुलवंत सिंह तथा प्रहलाद भारूखेड़ा बोले कि जब तक सरकारी खरीद नहीं होती तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे। जिस पर सचिव ने सीसीआई के मैनेजर से बात कि और किसानों को बताया कि वह शाम को चार बजे कार्यालय में आ जाएं। वहां पर किसानों तथा सीसीआई के अधिकारियों की बैठक करवा दी जाएगी।
विज्ञापन
शाम चार बजे शुरू हुई बैठक
शाम को चार बजे सीसीआई के अधिकारियों, किसानों तथा मार्केट कमेटी के सचिव की बैठक हुई। जिसमें सीसीआई की ओर से डिप्टी मैनेजर ईयू ईंगले तथा सहायक प्रबंधक आरके शर्मा वहां पर आए। किसानों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि जब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं की जाएगी तब तक किसान धरने पर रहेंगे। इस पर सीसीआई के अधिकारियों ने कहा कि वह फैक्टरी मालिकों से मिन्नतें कर रहे हैं कि वह उनके साथ एग्रीमेंट कर लें। लेकिन कोई भी एग्रीमेंट करने को तैयार नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि गांठ से बिनौला व रूई अलग करने के लिए फैक्टरी संचालकों को उन्होंने 791 रुपये प्रति गांठ का रेट दिया। गांठ तैयार करके फैक्टरी संचालक देंगे। लेकिन मालिकों का कहना है कि वह 850 रुपये प्रति गांठ से करें तो एग्रीमेंट हो सकता है। इस पर सीसीआई मैनेजर ईंगले ने कि वह खुद से यह एग्रीमेंट नहीं कर सकते तथा ऊपर से उन्हें आदेश नहीं आ रहे है। इसके साथ ही किसानों की फसलों में नमी की मात्रा अधिक आ रही है। अगर किसान की फसल में 12 प्रतिशत से अधिक नमी आती है तो सीसीआई उसकी खरीद नहीं करेगी। किसानों ने सीसीआई के अधिकारियों की कोई भी बात मानने से मना कर दिया और किसान संघ के प्रधान प्रहलाद ने कहा कि सीसीआई जिस प्रकार से खरीद नहीं कर रही है। उस हिसाब से लगता है कि वह सीधे तौर पर निजी व्यापारियों को लाभ पहुंचाना चाह रहे हैं। इस पर सीसीआई के डिप्टी मैनेजर ईयू ईंगले ने कहा कि वे किसानों को एक वीडियो दिखाएगा कि सीसीआई की प्रकिया कैसे होती है तो इस पर वहां पर बैठे सभी किसान बोल पड़े कि उनका पेट वीडियो से नहीं भरता उनकी फसल की खरीद होनी चाहिए।
चार सदस्यों की बनाई कमेटी
बैठक के दौरान मार्केट कमेटी के सचिव विकास सेतिया, किसान संघ प्रधान प्रहलाद तथा एक अन्य किसान, सीसीआई अधिकारी तथा सभी फैक्टरी संचालक मौजूद थे। वहां पर किसानों तथा कमेटी सचिव ने मुद्दा उठाया कि किसानों की मंडी में बोली होने के बाद फैक्टरी में भाव कम ज्यादा क्यों होता है तथा वजन में भी कम ज्यादा आता है। किसानों ने कहा कि उनके साथ धोखा धड़ी हो रही है। जिस पर मार्केट कमेटी के सचिव ने चार लोगों की कमेटी का गठन किया, जिसमें एक किसान, एक कमेटी का सदस्य, एक आढ़ती तथा एक फैक्टरी का कर्मचारी रहेगा। अगर ऐसी कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच की जाएगी।
किसान दूसरे दिन भी रहेंगे धरने पर
हरियाणा किसान मंच के प्रधान प्रहलाद ने बताया कि अभी तक सीसीआई ने कोई जवाब नहीं दिया है कि वह खरीद करेगी। जब तक सीसीआई खरीद नहीं करेगी तब तक कोई भी किसान धरने से नहीं उठेगा। प्रहलाद ने बताया कि सीसीआई अधिकारियों का कहना है कि वे एक या दो दिन में बोली करवा देंगे। पर इन दिनों में जो किसानों का नरमा निजी व्यापारियों को जाएगा उसका नुकसान कौन भरेगा। किसान घाटे में अपनी फसल बेचने को मजबूर है।
अभी तक एग्रीमेंट फाइनल नहीं हुआ है। सीसीआई के अधिकारियों ने फैक्टरी संचालकों के साथ बैठक की है। जिसमें अभी तक एग्रीमेंट फाइनल नहीं हुआ है। जैसे ही एग्रीमेंट फाइनल होता है तो सरकारी खरीद शुरू कर दी जाएगी।
-विकास सेतिया, मार्केट कमेटी सचिव, सिरसा।
विज्ञापन
शुक्रवार को जिले के अलग अलग गांवों से किसान अपने नरमे तथा कपास की फसल बेचने को लेकर मंडी में आए। किसान जब मंडी में पहुंचे तो नरमे की सीसीआई द्वारा सरकारी खरीद न कर पाने पर आक्रोशित हो गए और सभी किसान हरियाणा किसान मंच के प्रधान प्रहलाद भारूखेड़ा के साथ मार्केट कमेटी के मेन गेट के ताला जड़ दिया। गेट पर ताला जड़ने के बाद वहां पर मौजूद सभी किसान सीसीआई के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। किसान जगीर सिंह ने बताया कि आज 10 दिन से अधिक समय हो चुका है लेकिन सीसीआई उनकी फसल की खरीद नहीं कर रही। फसल की सरकारी खरीद ना होने पर किसानों ने कहा कि उन्हें कम दामों में अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। किसान तोता सिंह ने बताया कि निजी व्यापारी उनको अपने मन मुताबिक भाव दे रहे हैं जबकि सरकारी भाव 5450 रुपये प्रति क्विंटल है। ताला जड़ने के कुछ समय बाद मार्केट कमेटी के कर्मचारी किसानों को समझाने पहुंचे। लेकिन किसी ने उनकी कोई बात नहीं मानी। किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे कि जब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं होती तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे। किसान जगसीर ने बताया कि जब नरमे की फसल का समय निकल जाएगा तब सीसीआई बोली करेगी। इसका पूरा फायदा केवल व्यापारियों को जाएगा।
विज्ञापन
किसानों को कमेटी सचिव ने कार्यालय में बुलाया
मार्केट कमेटी के सचिव विकास सेतिया ने सभी किसानों को अपने कार्यालय में बुलाया तथा उनकी समस्या सुनी। उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि सीसीआई से उनकी बात हो गई है, उनका कहना है कि अभी तक फैक्ट्रियों के साथ उनका एग्रीमेंट नहीं हुआ है जिसको लेकर वे खरीद नहीं कर सकते। तभी किसान बोले कि इस फसल का सीजन चला जाएगा तब होगा क्या एग्रीमेंट। किसानों ने सचिव की कोई बात नहीं सुनी और किसान हरनेक सिंह, कुलवंत सिंह तथा प्रहलाद भारूखेड़ा बोले कि जब तक सरकारी खरीद नहीं होती तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे। जिस पर सचिव ने सीसीआई के मैनेजर से बात कि और किसानों को बताया कि वह शाम को चार बजे कार्यालय में आ जाएं। वहां पर किसानों तथा सीसीआई के अधिकारियों की बैठक करवा दी जाएगी।
विज्ञापन
शाम चार बजे शुरू हुई बैठक
शाम को चार बजे सीसीआई के अधिकारियों, किसानों तथा मार्केट कमेटी के सचिव की बैठक हुई। जिसमें सीसीआई की ओर से डिप्टी मैनेजर ईयू ईंगले तथा सहायक प्रबंधक आरके शर्मा वहां पर आए। किसानों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि जब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं की जाएगी तब तक किसान धरने पर रहेंगे। इस पर सीसीआई के अधिकारियों ने कहा कि वह फैक्टरी मालिकों से मिन्नतें कर रहे हैं कि वह उनके साथ एग्रीमेंट कर लें। लेकिन कोई भी एग्रीमेंट करने को तैयार नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि गांठ से बिनौला व रूई अलग करने के लिए फैक्टरी संचालकों को उन्होंने 791 रुपये प्रति गांठ का रेट दिया। गांठ तैयार करके फैक्टरी संचालक देंगे। लेकिन मालिकों का कहना है कि वह 850 रुपये प्रति गांठ से करें तो एग्रीमेंट हो सकता है। इस पर सीसीआई मैनेजर ईंगले ने कि वह खुद से यह एग्रीमेंट नहीं कर सकते तथा ऊपर से उन्हें आदेश नहीं आ रहे है। इसके साथ ही किसानों की फसलों में नमी की मात्रा अधिक आ रही है। अगर किसान की फसल में 12 प्रतिशत से अधिक नमी आती है तो सीसीआई उसकी खरीद नहीं करेगी। किसानों ने सीसीआई के अधिकारियों की कोई भी बात मानने से मना कर दिया और किसान संघ के प्रधान प्रहलाद ने कहा कि सीसीआई जिस प्रकार से खरीद नहीं कर रही है। उस हिसाब से लगता है कि वह सीधे तौर पर निजी व्यापारियों को लाभ पहुंचाना चाह रहे हैं। इस पर सीसीआई के डिप्टी मैनेजर ईयू ईंगले ने कहा कि वे किसानों को एक वीडियो दिखाएगा कि सीसीआई की प्रकिया कैसे होती है तो इस पर वहां पर बैठे सभी किसान बोल पड़े कि उनका पेट वीडियो से नहीं भरता उनकी फसल की खरीद होनी चाहिए।
चार सदस्यों की बनाई कमेटी
बैठक के दौरान मार्केट कमेटी के सचिव विकास सेतिया, किसान संघ प्रधान प्रहलाद तथा एक अन्य किसान, सीसीआई अधिकारी तथा सभी फैक्टरी संचालक मौजूद थे। वहां पर किसानों तथा कमेटी सचिव ने मुद्दा उठाया कि किसानों की मंडी में बोली होने के बाद फैक्टरी में भाव कम ज्यादा क्यों होता है तथा वजन में भी कम ज्यादा आता है। किसानों ने कहा कि उनके साथ धोखा धड़ी हो रही है। जिस पर मार्केट कमेटी के सचिव ने चार लोगों की कमेटी का गठन किया, जिसमें एक किसान, एक कमेटी का सदस्य, एक आढ़ती तथा एक फैक्टरी का कर्मचारी रहेगा। अगर ऐसी कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच की जाएगी।
किसान दूसरे दिन भी रहेंगे धरने पर
हरियाणा किसान मंच के प्रधान प्रहलाद ने बताया कि अभी तक सीसीआई ने कोई जवाब नहीं दिया है कि वह खरीद करेगी। जब तक सीसीआई खरीद नहीं करेगी तब तक कोई भी किसान धरने से नहीं उठेगा। प्रहलाद ने बताया कि सीसीआई अधिकारियों का कहना है कि वे एक या दो दिन में बोली करवा देंगे। पर इन दिनों में जो किसानों का नरमा निजी व्यापारियों को जाएगा उसका नुकसान कौन भरेगा। किसान घाटे में अपनी फसल बेचने को मजबूर है।
अभी तक एग्रीमेंट फाइनल नहीं हुआ है। सीसीआई के अधिकारियों ने फैक्टरी संचालकों के साथ बैठक की है। जिसमें अभी तक एग्रीमेंट फाइनल नहीं हुआ है। जैसे ही एग्रीमेंट फाइनल होता है तो सरकारी खरीद शुरू कर दी जाएगी।
-विकास सेतिया, मार्केट कमेटी सचिव, सिरसा।