{"_id":"61f6d65e90db194d0a11587f","slug":"farmer-surendra-of-village-ludesar-made-the-barren-land-fertile-with-beans-sirsa-news-hsr623149364","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव लुदेसर के किसान सुरेंद्र कुमार गाट ने सेम से बंजर हुई जमीन को बनाया उपजाऊ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव लुदेसर के किसान सुरेंद्र कुमार गाट ने सेम से बंजर हुई जमीन को बनाया उपजाऊ
विज्ञापन
किसान सुरेंद्र कुमार द्वारा उगाई गई फसल का दृश्य। संवाद
- फोटो : Sirsa
गांव लुदेसर के किसान सुरेंद्र ने सेम से बंजर हुई जमीन को बनाया उपजाऊ
28 एकड़ जमीन में तीन किलोमीटर दूर से बालू मिट्टी लाकर डाली और अब वहां लहलहाने लगी फसलें
नरेश बैनीवाल
नाथुसरी चोपटा (सिरसा)। किसान अपनी मेहनत और लग्न के बल पर बंजर जमीन से भी फसलों की पैदावार लेने का माद्दा रखते हैं। हरियाणा के सिरसा जिले के नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के करीब 25 गांव में 20000 एकड़ जमीन सेम के कारण बंजर हो चुकी है। किसानों की आमदनी बिल्कुल ही कम हो गई है। ऐसे में गांव लुदेसर (सिरसा)के किसान सुरेंद्र कुमार गाट ने हिम्मत हारने की बजाय सेम से बंजर हुई जमीन में फसल उगाकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखा।
सेम के कारण जमीन में पानी खड़ा रहने से फसल उगने बंद हो गई लेकिन सुरेंद्र कुमार ने 28 एकड़ जमीन में किलोमीटर दूर से मिट्टी लाकर सेम ग्रस्त जमीन में डालकर फसल उगाने का जरिया खोजा। जोकि पूरी तरह कामयाब रहा और बंजर जमीन में फसलें लहलहाने लगी। सुरेंद्र कुमार का कहना है कि सेम ग्रस्त जमीन में पैदावार लेने की तकनीक को देख कर गांव के अन्य कई किसान भी अपनी जमीनों में मिट्टी डलवा कर फसल उगाने लगे। संवाद
पहले पांच एकड़ जमीन में मिट्टी डालकर दो तक साल पैदावार ली फिर 28 एकड़ में शुरू की खेती
गांव लुदेसर के किसान सुरेंद्र कुमार गाट ने बताया कि साल 1995 में क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में सेम ग्रस्त जमीन का दायरा बढ़ने लगा। इसी दौरान उनके 28 एकड़ खेत में सेम के कारण जमीन में पानी खड़ा रहने लगा और लवणता बढ़ गई। जिसके कारण जमीन बंजर होने लगी। कई वर्षों तक तो उन्होंने धान इत्यादि की खेती की लेकिन जमीन में लवणता की मात्रा बढ़ने से बीज उगने भी बंद हो गए। इस दौरान उन्होंने साल 1999 से लेकर साल 2015 तक खेती से वंचित रहना पड़ा। तब उन्होंने अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए सेम ग्रस्त जमीन से पैदावार लेने के तरीके खोजने शुरू किए। तभी राजस्थान के रावतसर क्षेत्र से सेम ग्रस्त जमीनों में फसल उगाने के बारे में पता चला। तो वहां पर जाकर देखा कि किसान दूर दराज से बालू मिट्टी लाकर सेम ग्रस्त जमीन में डाल रहे हैं और जिससे जमीन में खड़ा पानी सूखाकर जमीन को उपजाऊ बना रहे हैं। तभी उन्होंने अपने भाई राजेंद्र कुमार से सलाह मशवरा करके साल 2015 में प्रयोग के तौर पर 5 एकड़ जमीन में तीन किलोमीटर दूर से मिट्टी लाकर डाली तथा उसमें फसल उगाकर देखी तो बीज भी उगने लगे और फसल भी ठीक-ठाक हुई। दो साल तक हर मौसम की फसलें उग लेने के बाद उन्होंने पूरे खेत 28 एकड़ में मिट्टी डालने का संकल्प लिया और ट्रैक्टरों से निकटवर्ती गांव रुपावास से मिट्टी लाकर डाली और उसमें गेहूं की फसल उगा कर अच्छी पैदावार होने लगी। उसके बाद 3 वर्ष से पूरे खेत में दोनों मौसम की फसलें गेहूं, सरसों, कपास, नरमा, बाजरा इत्यादि की पैदावार लेकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना लिया है। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके तजुर्बे को देखकर गांव के अन्य किसानों ने भी अपने खेतों में मिट्टी भर्ती करवा कर फसल उगानी शुरू कर दी है जिससे सेम ग्रस्त जमीन में फसलें लहलहाने लगी हैं।
विज्ञापन
सरकार को सहायता करनी चाहिए : सुरेंद्र
सुरेंद्र कुमार का कहना है कि सरकार द्वारा क्षेत्र से सेम की समस्या को खत्म करने के लिए वादे तो किए जाते हैं लेकिन करीब 30 वर्ष से सेम की समस्या गंभीर बनी हुई है तब किसानों ने अपने बलबूते पर सेम से बंजर जमीन को उपजाऊ करने का जो बीड़ा उठाया है उसके तहत सरकार को सहायता करनी चाहिए। इनका कहना है कि सरकार द्वारा सौर ऊर्जा के ट्यूबवेल लगवा कर सेम के पानी को सेम नाले में डालने के लिए प्रोजेक्ट को तत्परता से लागू करना चाहिए। ताकि बंजर जमीन से पैदा लेकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
विज्ञापन
28 एकड़ जमीन में तीन किलोमीटर दूर से बालू मिट्टी लाकर डाली और अब वहां लहलहाने लगी फसलें
नरेश बैनीवाल
नाथुसरी चोपटा (सिरसा)। किसान अपनी मेहनत और लग्न के बल पर बंजर जमीन से भी फसलों की पैदावार लेने का माद्दा रखते हैं। हरियाणा के सिरसा जिले के नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के करीब 25 गांव में 20000 एकड़ जमीन सेम के कारण बंजर हो चुकी है। किसानों की आमदनी बिल्कुल ही कम हो गई है। ऐसे में गांव लुदेसर (सिरसा)के किसान सुरेंद्र कुमार गाट ने हिम्मत हारने की बजाय सेम से बंजर हुई जमीन में फसल उगाकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखा।
सेम के कारण जमीन में पानी खड़ा रहने से फसल उगने बंद हो गई लेकिन सुरेंद्र कुमार ने 28 एकड़ जमीन में किलोमीटर दूर से मिट्टी लाकर सेम ग्रस्त जमीन में डालकर फसल उगाने का जरिया खोजा। जोकि पूरी तरह कामयाब रहा और बंजर जमीन में फसलें लहलहाने लगी। सुरेंद्र कुमार का कहना है कि सेम ग्रस्त जमीन में पैदावार लेने की तकनीक को देख कर गांव के अन्य कई किसान भी अपनी जमीनों में मिट्टी डलवा कर फसल उगाने लगे। संवाद
विज्ञापन
पहले पांच एकड़ जमीन में मिट्टी डालकर दो तक साल पैदावार ली फिर 28 एकड़ में शुरू की खेती
गांव लुदेसर के किसान सुरेंद्र कुमार गाट ने बताया कि साल 1995 में क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में सेम ग्रस्त जमीन का दायरा बढ़ने लगा। इसी दौरान उनके 28 एकड़ खेत में सेम के कारण जमीन में पानी खड़ा रहने लगा और लवणता बढ़ गई। जिसके कारण जमीन बंजर होने लगी। कई वर्षों तक तो उन्होंने धान इत्यादि की खेती की लेकिन जमीन में लवणता की मात्रा बढ़ने से बीज उगने भी बंद हो गए। इस दौरान उन्होंने साल 1999 से लेकर साल 2015 तक खेती से वंचित रहना पड़ा। तब उन्होंने अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए सेम ग्रस्त जमीन से पैदावार लेने के तरीके खोजने शुरू किए। तभी राजस्थान के रावतसर क्षेत्र से सेम ग्रस्त जमीनों में फसल उगाने के बारे में पता चला। तो वहां पर जाकर देखा कि किसान दूर दराज से बालू मिट्टी लाकर सेम ग्रस्त जमीन में डाल रहे हैं और जिससे जमीन में खड़ा पानी सूखाकर जमीन को उपजाऊ बना रहे हैं। तभी उन्होंने अपने भाई राजेंद्र कुमार से सलाह मशवरा करके साल 2015 में प्रयोग के तौर पर 5 एकड़ जमीन में तीन किलोमीटर दूर से मिट्टी लाकर डाली तथा उसमें फसल उगाकर देखी तो बीज भी उगने लगे और फसल भी ठीक-ठाक हुई। दो साल तक हर मौसम की फसलें उग लेने के बाद उन्होंने पूरे खेत 28 एकड़ में मिट्टी डालने का संकल्प लिया और ट्रैक्टरों से निकटवर्ती गांव रुपावास से मिट्टी लाकर डाली और उसमें गेहूं की फसल उगा कर अच्छी पैदावार होने लगी। उसके बाद 3 वर्ष से पूरे खेत में दोनों मौसम की फसलें गेहूं, सरसों, कपास, नरमा, बाजरा इत्यादि की पैदावार लेकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना लिया है। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके तजुर्बे को देखकर गांव के अन्य किसानों ने भी अपने खेतों में मिट्टी भर्ती करवा कर फसल उगानी शुरू कर दी है जिससे सेम ग्रस्त जमीन में फसलें लहलहाने लगी हैं।
विज्ञापन
सरकार को सहायता करनी चाहिए : सुरेंद्र
सुरेंद्र कुमार का कहना है कि सरकार द्वारा क्षेत्र से सेम की समस्या को खत्म करने के लिए वादे तो किए जाते हैं लेकिन करीब 30 वर्ष से सेम की समस्या गंभीर बनी हुई है तब किसानों ने अपने बलबूते पर सेम से बंजर जमीन को उपजाऊ करने का जो बीड़ा उठाया है उसके तहत सरकार को सहायता करनी चाहिए। इनका कहना है कि सरकार द्वारा सौर ऊर्जा के ट्यूबवेल लगवा कर सेम के पानी को सेम नाले में डालने के लिए प्रोजेक्ट को तत्परता से लागू करना चाहिए। ताकि बंजर जमीन से पैदा लेकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।