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एक एकड़ में देसी किस्म की प्याज लगा किसान ने घर की आर्थिक स्थिति को बनाया मजबूत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jan 2022 11:06 PM IST
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Farmer planted indigenous variety of onion in one acre, strengthened the economic condition of the house
खेत में लगी हुए प्याज की पौध। - फोटो : Sirsa
चोपटा। राजस्थान की सीमा से सटे हरियाणा के पैंतालिसा क्षेत्र के गांव बरासरी के किसान मानस्वरुप अपने खेत में ही देसी किस्म के प्याज लगाकर लाखों रुपये की कमाई कर रहा है। परंपरागत खेती में घाटे के चलते घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए परंपरागत खेती के साथ 1 एकड़ में 3 साल पहले देसी किस्म के प्याज की बिजाई की। इससे उसे परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदनी भी शुरू हो गई। अब हर साल उसे करीब डेढ़ लाख रुपये के अतिरिक्त कमाई होने लगी। सबसे बड़ी बात यह है कि मान स्वरूप अपने खेत में ही प्याज की पौध तैयार करता है। प्याज की खेती ने मात्र 8वीं तक पढ़ेे किसान मानस्वरूप को हरियाणा के साथ-साथ निकटवर्ती राजस्थान के आस-पास के गांवों में अलग पहचान भी दिलवाई।
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गांव माखोसरानी के प्रगतिशील किसान सुभाष चंद्र से प्रेरणा लेकर शुरू की प्याज बिजाई
किसान मानस्वरूप ने बताया कि रेतीली जमीन व नहरी पानी की हमेशा कमी के कारण परंपरागत खेती में अच्छी बारिश होने पर तो बचत हो जाती वरना घाटा ही लगता। उसने खेती के साथ अन्य कमाई का जरिया खोजना शुरू किया। ऐसे में गांव माखोसरानी के प्रगतिशील किसान अपने रिश्तेदार सुभाष चंद्र से प्रेरणा लेकर 3 साल पहले 1 एकड़ में प्याज की खेती शुरू की। जिससे उसे करीब 2 लाख रुपये की कमाई हुई। जिसमें 50 हजार रुपये बीज व दवाइयों इत्यादि का खर्चा हो गया। मान स्वरूप ने बताया कि देसी किस्म के प्याज की पौध सितंबर में तैयार करनी शुरू की जाती है और दिसंबर में लगाई जाती है। प्याज की खेती से पिछले 3 साल से हर वर्ष मान स्वरूप को करीब डेढ़ लाख रुपये की बचत हो जाती है। इसके अलावा इसी जमीन में सावन की फसल की भी पैदावार भी ली जा सकती है। जिससे परंपरागत खेती की आमदनी के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई होने से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत रहने लगी। उन्होंने बताया कि बिना किसी सरकारी सहायता के अपना खुद के पैसों से देसी किस्म के प्याज लगाने का व्यवसाय शुरू किया है। गांव के कई युवा उनके व्यवसाय को देखकर सब्जी लगाने का काम करने लगे हैं। किसान खेती के साथ इस तरह के व्यवसाय से कमाई करके आत्मनिर्भर बन सकते हैं। मानस्वरूप ने बताया कि अगर सरकारी सहायता मिल जाए तो सब्जी के व्यवसाय को और ज्यादा बढ़ा सकता है। जिससे अन्य लोगों को भी रोजगार दिया जा सकता है।
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