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कृषि कानूनों के विरोध में दो गुटों में बंटा किसान आंदोलन

Sat, 10 Oct 2020 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 11:27 PM IST
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Farmer movement divided into two groups to protest against agricultural laws
कृषि कानून के विरोध में पूतला फूंकते हुए। - फोटो : Sirsa
तीन कृषि कानूनों के विरोध में शहीद भगत सिंह स्टेडियम के बाहर धरने पर बैठे किसान नेताओं ने शनिवार को डिप्टी सीएम का बाबा भूमणशाह चौक पर पुतला जलाया। वहीं दूसरी ओर गुरुद्वारा दसवीं पातशाही में किसान संगठनों ने मीटिंग करके अपना-अलग आंदोलन चलाने का फैसला लिया और इसको लेकर रणनीति बनाई। ऐसे में सिरसा में अब सोमवार से दो किसान आंदोलन अलग-अलग जगहों पर चलेंगे। किसान आंदोलन दो गुटों में बंट गया।
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शनिवार को सिरसा में शहीद भगत सिंह स्टेडियम के बाहर धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर सिरसा पहुंचीं। उन्होंने किसानों को संबोधित किया। इसके बाद शाम को किसानों ने बाबा भूमणशाह चौक पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के पुतले की शवयात्रा निकाल कर उसे फूंका। किसान नेता मंदीप नथवाल ने कहा कि 15 अक्तूबर हरियाणा में एक ट्रैक्टर जत्था निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम चुनावों से पहले भाजपा के विरोधी थे, अब उसी सरकार में भागीदार है। उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार तीन कानूनों को वापस नहीं लेती।
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नया किसान आंदोलन चलाने को लेकर 21 सदस्यीय कमेटी गठित
किसान नेताओं ने गुरुद्वारा दशम पातशाही में शनिवार शाम को बैठक कर 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। किसान नेता जसबीर सिंह भाटी ने इसकी अध्यक्षता करते हुए 12 अक्तूबर से लघु सचिवालय पर किसान आंदोलन चलाने की घोषणा की। कमेटी की ओर से बनाई गई रणनीति के तहत 12 अक्तूबर को लघु सचिवालय में धरना दिया जाएगा। 13 अक्तूबर को सांसद सुनीता दुग्गल के आवास का घेराव किया जाएगा। 14 अक्तूबर को एमएसपी अधिकार दिवस मनाया जाएगा। 15 अक्तूबर को सिरसा के विधायक गोपाल कांडा के आवास का घेराव किया जाएगा। 16 अक्तूबर को उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आवास का घेराव करने के बाद 17 अक्तूबर को बिजली एवं जेल मंत्री रणजीत सिंह के आवास का घेराव होगा। मीटिंग में किसान नेता जसबीर सिंह भाटी, विनोद दड़बी, लखविंद्र सिंह, कामरेड स्वर्ण सिंह विर्क, गुरनाम सिंह झब्बर, मंजीत सिंह, प्रकाश ममेरां, गुरलाल, पावेल, नवदीप सिंह, मैक्स साहुवाला, रणधीर जोधकां, सुरेश ढाका, राजकुमार शेखूपुरिया, संदीप शेरपुरा, संत प्रकाश सिंह, अरविंद रायपुरा, सुरजीत सिंह, गुरदास सिंह, रोशन सुचान, गुरदास सिंह कालांवाली, विकास खिचड़, मंदीप आजाद, हैप्पी बक्शी, तिलक राज, बिंद्र सिंह, डॉ. सुखेदव जम्मू ने हिस्सा लिया।
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राष्ट्रीय किसान संगठन हरियाणा के अध्यक्ष जसबीर सिंह भाटी ने बताया कि छह अक्तूबर को हम भी दुष्यंत चौटाला की कोठी घेरने के कार्यक्रम में साथ थे। बाद में हमें ऐसे संगठनों का आंदोलन एक तरह से नाटक नजर आया। भाटी ने कहा कि उसके बाद कलाकार अलग हो गए और किसान अलग हो गए। उन्होंने धरना दे रहे किसानों को कलाकार की संज्ञा देते हुए कहा कि वे सिलसिलेवार तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे और इसे नतीजे तक लेकर जाएंगे।
छह अक्तूबर के आंदोलन के बाद से आई दरार
20 सितंबर को सिरसा में किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए राजमार्ग जाम किया था। तब तमाम संगठन एक मंच पर नजर आए थे। इसके बाद छह अक्तूबर को डिप्टी सीएमके आवास का घेराव किया जाना था। किसानों द्वारा अवरोधक पार करने के प्रयास पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे थे। रात को किसानों ने बाबा भूमणशाह चौक पर धरना दिया गया। सुबह प्रशासन ने करीब सवा सौ किसानों को गिरफ्तार किया था और अज्ञात किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद से किसानों के आंदोलन में दरार आ गई।
हमारा आंदोलन भी किसानों के लिए : भारूखेड़ा
वहीं हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि उन्हें शाम को ही पता चला कि कुछ किसान संगठनों ने मीटिंग की है। यदि वे अलग होकर आंदोलन चलाना चाहते हैं तो उनके फैसले का स्वागत है। क्योंकि आंदोलन किसानों के लिए है। हमारा आंदोलन भी किसानों के लिए है। यदि किसी किसान संगठन को किसी बात को लेकर नाराजगी थी तो उन्हें धरने पर आकर अपनी बातचीत रखनी चाहिए थी।

बड़े किसान नेताओं को अनदेखा किया : जसबीर भाटी
राष्ट्रीय किसान संगठन के अध्यक्ष जसबीर सिंह भाटी ने बताया कि 6 अक्तूबर को धरने पर बड़े किसान नेताओं को अनदेखा किया गया। धरने पर बैठने से पहले फैसला हुआ था कि स्टेज पर 17 संगठनों के किसान नेता बैठेंगे, लेकिन चार संगठनों के किसान नेता भी नहीं बैठ पाए। हमारे पास सभी किसान संगठन है। जो धरना चल रहा है वह योगेंद्र यादव का है। हमें खट्टर सरकार का इस्तीफा मांगना चाहिए। भैंस मरेगी, चिचडियां साथ मरेगी। यदि खट्टर इस्तीफा देगा तो दुष्यंत कैसे रह जाएगा। उनके साथ सभी पार्टियों के नेता है, लेकिन धरना किसानों का होगा। नेताओं का नहीं।
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