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Sirsa News: चरवाहे के पशुओं को हांककर ले जाने पर हुआ विवाद
Mon, 09 Mar 2026 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 09 Mar 2026 11:49 PM IST
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रामनगरिया गोशाला में रखी हुई भैंस। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। मुख्यमंत्री के दौरे के चक्कर में पशुपालक के पशुओं को हांककर ले जाने के साथ साथ रामनगरिया गोशाला में भैंसों की टैगिंग करवाने पर विवाद खड़ा हो गया। इतना नहीं, टैगिंग को लेकर गोशाला में पशुओं को दौड़ाकर पकड़ा जा रहा था। वहीं, नगर परिषद के अधिकारी बेसहारा पशु पकड़ो अभियान का हवाला देते हुए नजर आए।
सोमवार को मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया तो अधिकारी भी गंभीर हो गए। वहीं, पशु मालिक व हिसार से लेकर फतेहाबाद से पशुपालक और जागरूक नागरिक गोशाला पहुंच गए। गोसेवा आयोग के नियमों तक हवाला देते हुए कार्रवाई की बात कही।
हैरानी की बात है कि दुधारू पशुओं को नगर परिषद की टीम हांककर लाई थी और पशुपालक की सुनवाई करने से पहले ही सभी पशुओं की टैगिंग शुरू कर दी। जबकि नियमानुसार एक झुंड में पकड़कर लाए गए पशुओं को टैगिंग करना जरूरी नहीं होता है।
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मामला उस समय ज्यादा विवादित हो गया जब गोशाला में पशु चिकित्सकों ने गोसेवा आयोग के नियमों की परवाह किए बिना भैंसों की टैगिंग कर दी। जबकि नियमानुसार भैंस की टैगिंग नहीं की जा सकती है।
गोसेवा आयोग के टैग भैंसों को नहीं लगाए जा सकते : गांव कुलेरी निवासी दिनेश पारिक ने बताया कि दौलत राम के पास गाय लेने के लिए आना था। इनका फोन गया कि गाय और भैंस पकड़ ली हैं। गोशाला कमेटी के कमेटी व अधिकारियों ने कोई बात नहीं की। गोसेवा आयोग की गाइडलाइन के अंदर नहीं है कि भैंसों को पकड़ा जाए। गोशाला अपनी रिपोर्ट में इसको शामिल कर पैसा सरकार से लेगी।
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सिरसा। मुख्यमंत्री के दौरे के चक्कर में पशुपालक के पशुओं को हांककर ले जाने के साथ साथ रामनगरिया गोशाला में भैंसों की टैगिंग करवाने पर विवाद खड़ा हो गया। इतना नहीं, टैगिंग को लेकर गोशाला में पशुओं को दौड़ाकर पकड़ा जा रहा था। वहीं, नगर परिषद के अधिकारी बेसहारा पशु पकड़ो अभियान का हवाला देते हुए नजर आए।
सोमवार को मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया तो अधिकारी भी गंभीर हो गए। वहीं, पशु मालिक व हिसार से लेकर फतेहाबाद से पशुपालक और जागरूक नागरिक गोशाला पहुंच गए। गोसेवा आयोग के नियमों तक हवाला देते हुए कार्रवाई की बात कही।
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हैरानी की बात है कि दुधारू पशुओं को नगर परिषद की टीम हांककर लाई थी और पशुपालक की सुनवाई करने से पहले ही सभी पशुओं की टैगिंग शुरू कर दी। जबकि नियमानुसार एक झुंड में पकड़कर लाए गए पशुओं को टैगिंग करना जरूरी नहीं होता है।
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मामला उस समय ज्यादा विवादित हो गया जब गोशाला में पशु चिकित्सकों ने गोसेवा आयोग के नियमों की परवाह किए बिना भैंसों की टैगिंग कर दी। जबकि नियमानुसार भैंस की टैगिंग नहीं की जा सकती है।
गोसेवा आयोग के टैग भैंसों को नहीं लगाए जा सकते : गांव कुलेरी निवासी दिनेश पारिक ने बताया कि दौलत राम के पास गाय लेने के लिए आना था। इनका फोन गया कि गाय और भैंस पकड़ ली हैं। गोशाला कमेटी के कमेटी व अधिकारियों ने कोई बात नहीं की। गोसेवा आयोग की गाइडलाइन के अंदर नहीं है कि भैंसों को पकड़ा जाए। गोशाला अपनी रिपोर्ट में इसको शामिल कर पैसा सरकार से लेगी।