फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   difference in report of agriculture and revenue department

कृषि विभाग और राजस्व विभाग की रिपोर्ट में सर्वे में अंतर

Sat, 05 Sep 2020 11:39 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 11:39 PM IST
विज्ञापन
difference in report of agriculture and revenue department
जिले में सफेद मक्खी व उखेड़ा रोग की चपेट में आने पर उपायुक्त ने राजस्व व कृषि विभाग के अधिकारियों को सर्वे करने के आदेश जारी किए थे। दोनों विभागों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जब अपनी और कृषि विभाग की रिपोर्ट का मिलान किया तो दोनों के आंकड़ों में नुकसान का अंतर काफी ज्यादा है। हालांकि उपायुक्त ने दोनों विभागों को रिपोर्ट कंपाइल करने और दुरुस्त करने के आदेश दिए हैं। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में 45 हजार एकड़ तो कृषि विभाग के सर्वे में 1.70 लाख एकड़ नरमा की फसल में नुकसान है।
विज्ञापन

बता दें कि जिले में करीब दो लाख 10 हजार हेक्टेयर में कपास और नरमा की खेती होती है। राजस्व विभाग को तहसील से आई रिपोर्ट अनुसार नरमा में सफेद मक्खी व उखेड़ा रोग का प्रकोप करीब 45 हजार 700 एकड़ में है। राजस्व विभाग को गांवों में नियुक्त पटवारियों की ओर से रिपोर्ट भेजी गई है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रानियां क्षेत्र में 25 हजार एकड़, ऐलनाबाद में 1985 एकड़, चोपटा में करीब 12 हजार एकड़, गोरीवाला में 6500 एकड़ में सफेद मक्खी व उखेड़ा रोग के प्रभाव से फसलें खराब हुई है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कालांवाली, डबवाली और सिरसा ब्लॉक में सफेद मक्खी व उखेड़ा रोग का प्रभाव नहीं है।
विज्ञापन

वहीं कृषि विभाग ने सफेद मक्खी व उखेड़ा रोग का प्रकोप पूरे जिले में एक लाख 70 हजार एकड़ में है। कृषि विभाग ने पूरे जिले की अपनी रिपोर्ट उपायुक्त को भेजी है। कृषि विभाग अनुसार ओढ़ां में भी नुकसान है। कृषि विभाग ने पांच प्रतिशत नुकसान को सर्वे में शामिल किया है। बता दें कि 2015 में भी सिरसा में सफेद मक्खी का प्रकोप था, तब सरकार ने 967 करोड़ का मुआवजा बीमा कंपनी से किसानों को दिलवाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

उपायुक्त ने किया था गांवों का दौरा
पिछले दिनों जिला में कपास की फसल पर सफेद मक्खी के प्रकोप की सूचना के उपरांत उपायुक्त रमेश चंद्र बिढ़ाण, कृषि वैज्ञानिकों व कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अबकी बार बारिश के कारण मौसम में नमी रही। नमी का मौसम सफेद मक्खी के अनुकूल है।

किसान अपनाएं ये विधि
उप निदेशक कृषि डॉ. बाबूलाल ने बताया कि किसान अपने खेतों में कृषि विशेषज्ञों की राय के अनुसार ही खेतों में दवा का छिड़काव करें। हल्की मिट्टी में उगाई गई कपास में उपयुक्त खाद प्रबंधन के लिए पत्तों पर 2.5 किलोग्राम यूरिया प्रति 100 लीटर पानी या पोटैशियम नाइट्रेट की 2.0 किलोग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी की दर से प्रति एकड़ में आवश्यकतानुसार 2-3 बार छिड़काव करें। सफेद मक्खी के लिए स्पाइरोमेसिफेन ऑबेरॉन 22.9 एससी की 240 मिली मात्रा या नीम आधारित कीटनाशक की 1.0 लीटर मात्रा या पाइरीप्रोक्सीफेन 10 ईसी की 400 मिली. मात्रा को 200-250 लीटर पानी की दर से एक एकड़ में बारी-बारी से निचली पत्तियों तक छिड़काव करें। यदि कपास के पत्ते ज्यादा काले दिखाई दे तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की 600 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि किसान फसलों में पेराविल्ट बीमारी के आशंकित इलाकों में कोबाल्ट क्लोराइड की 2.0 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी की दर से एक एकड़ में 24-48 घंटों के अंदर छिड़काव करें।
कोट्स
दोनों विभाग रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह अभी अंतिम सर्वे नहीं है, शुरुआती आकलन है। किसानों को नुकसान की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।
- रमेश चंद्र बिढ़ाण, उपायुक्त सिरसा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed