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संसाधन व सुविधाओं की कमी के बावजूद दुश्मनों से लड़े देश के वीर जवान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jan 2022 11:39 PM IST
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Despite the lack of resources and facilities, the brave soldiers of the country fought with the enemies
सिरसा। देश की आजादी को 75 वर्ष चुके हैं। आजादी में सैन्य जवानों के योगदान को भूला पाना नामुमकिन है। अगर कुछ वर्ष पहले की बात करें तो व्यवस्थाओं में बहुत परिवर्तन हुआ है। जहां पहले संसाधनों व सुविधाओं की कमी थी तथा चुनौतियां ज्यादा थी वहीं अब की तस्वीर बदल चुकी है। भारतीय सेना बहुत ज्यादा हाईटेक हो चुकी है। सुविधाओं में विस्तार होने से सैन्य जवानों की ताकत भी बढ़ी है। सैन्य हथियार, उपकरण व सैनिकों की वर्दी में बहुत ज्यादा परिवर्तन हुआ है, जो देश की सुरक्षा में अहम योगदान साबित हो रहा है। सेना से सेवानिवृत्त हो चुके जवानों से बात की तो उनका कहना है कि देश की सेना पहले के मुकाबले अब बहुत ज्यादा मजबूत हुई है। पहले जवान संसाधनों की कमी के बावजूद देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर मुस्तैद रहकर देशवासियों को सुरक्षा मुहैया करवाते थे। परंतु पिछले कुछ सालों में भारतीय सेना की तस्वीर बदल गई है। इसकी गिनती दुनिया की ताकतवर सेनाओं में होती है, जिससे टक्कर लेना हर किसी के बस की बात नहीं है।
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पहले से ज्यादा ताकतवर हुई भारतीय सेना
सेवानिवृत्त कैप्टन हिम्मत सिंह ने बताया कि आज भारतीय सेना की ताकत बढ़ी है। उनके पास बहुत ही हाईटेक हथियार है तथा अनेकों ऐसे उपकरण हैं, जिससे दुश्मनों का चुटकियों में सफाया किया जा सकता है। परंतु पहले भारतीय सेना के पास संसाधनों की कमी थी, तथा चुनौतियां ज्यादा थी। कैप्टन हिम्मत सिंह ने बताया कि उनका सेना में वर्ष 1980 में सिपाही के पद पर चयन हुआ था। इसके बाद वे हवलदार, सुबेदार, लेफ्टिनेंट के पदों पर रहकर अपनी सेवाएं दी। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को 2010 को उन्हें कैप्टन बनाया गया। 2010 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने बताया कि पहले भारतीय सेना सुविधाओं के मामले में बहुत कमजोर थी। वर्ष 2014 के बाद भारतीय सेना में बहुत बदलाव हुआ है। मौजूद समय में देश के जवान हाईटेक हथियारों से लैस है तथा इनके पास बहुत नई तकनीक के उपकरण है। जिससे दुश्मनों के ठिकानों को ढूंढकर उनका खात्मा किया जा सकता है। पहले के समय जवानों के पास संसाधनों की कमी थी, इसके बावजूद देश की सुरक्षा के लिए जवान विभिन्न परिस्थितियों का सामना करके भी सीमाओं पर डटकर देश की रक्षा के लिए तैनात रहते थे।
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बांग्लादेश युद्ध में बेखौफ होकर लड़े थे दुश्मनों से
कैप्टन कमल कुटलेडिया का भारतीय सेना में वर्ष 1970 में चयन हुआ। इस दौरान उन्होंने वर्ष 1971 को बांग्लादेश के युद्ध में हिस्सा लिया था तथा 1980 में वे जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। कैप्टन कमल ने बताया कि वे 1970 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए तो उनको नागालैंड में नियुक्त किया गया था। इसी दौरान 1971 में हुए बांग्लादेश के युद्ध के दौरान उन्हें वहां बुला लिया गया। उन्होंने बताया कि वे युद्ध के अंतिम दिनों में वहां पहुंचे थे तथा दुश्मनों से जमकर लोहा लिया। कैप्टन कमल ने बताया कि उनकी नई भर्ती हुई थी तथा ज्यादा अनुभव नहीं था। फिर भी अधिकारियों के निर्देशन में लड़ाई में हिस्सा लिया तथा बेखौफ होकर लड़े थे। दो दिन बाद ही सीज फायर हो गया था। उन्होंने बताया कि आज भारतीय सेना पहले के मुकाबले काफी मजबूत है। आज भारतीय सेना का मुकाबला कर पाना बहुत मुश्किल है।
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