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विजिलेंस ने तलब किया डी प्लान के तहत हुए कार्यों का रिकॉर्ड
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शहर के बरनाला रोड पर लगी लोहे की ग्रिल, जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है।
- फोटो : Sirsa
विजिलेंस ने नगर परिषद सिरसा से 2012 से लेकर 2015 तक के विकास कार्यों का रिकॉर्ड तलब किया है। विजिलेंस को रिकॉर्ड देने के लिए नगर परिषद के कर्मचारी काफी जद्दोजहद कर रहे हैं। विजिलेंस को रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के लिए ईओ ने एकाउंट शाखा को भी हिदायतें दी हैं। हालांकि नप की एमई शाखा ने बुधवार को विजिलेंस को रिकॉर्ड तैयार करके भेज दिया। लेकिन यह रिकॉर्ड पूरा नहीं है। विजिलेंस के अधिकारी इस रिकॉर्ड से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में पूरा रिकॉर्ड मिलने पर विजिलेंस के चंडीगढ़ मुख्यालय से तकनीकि अधिकारी सिरसा में आकर साइट का निरीक्षण करेंगे।
नगर परिषद ने 2012 में सिरसा में डी प्लान के तहत शहर के बस स्टैंड से लेकर बाबा भूमनशाह चौक तक लाखों रुपये की लागत से लोहे की ग्रिल लगाई थी। इसके साथ ही आंबेडकर चौक, शाह सतनाम सिंह चौक व परशुराम चौक पर ट्रैफिक सिग्नल की लाइटें लगाई थीं। इस विकास कार्यों में धांधली के आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग को की गई थी। नगर परिषद ने 2015 में शहर में 530 गलियों के विकास कार्य करवाए थे। लेकिन इन गलियों के निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग करने की शिकायतें हुई। तब इसकी जांच भी विजिलेंस को सौंपी गई। विजिलेंस इन गलियों की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान करीब 28 गलियों के विजिलेंस ने सैंपल भी लिए हैं। हालांकि विजिलेंस ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 2018 में विजिलेंस विभाग के मुख्यालय में भेज दी थी। जांच रिपोर्ट में गली निर्माण में कमियां गिनाई गईं और 30 लाख रुपये की रिकवरी ठेकेदारों से करने की बात कही गई। लेकिन इस जांच रिपोर्ट का मुख्यालय अपने स्तर पर आकलन कर रहा है। इसलिए मुख्यालय ने नप से गलियों और डी प्लान का रिकॉर्ड मांगा है। रिकॉर्ड मिलने के बाद मुख्यालय से विजिलेंस के तकनीकि अधिकारी आकर साइट का निरीक्षण करेंगे।
530 गलियों और डी प्लान के तहत होने वाले कार्यों की विजिलेंस जांच कर रही है। मुख्यालय ने कुछ बिंदुओं पर रिकॉर्ड मांगा था, लेकिन नप ने अभी आधा अधूरा रिकॉर्ड ही उपलब्ध करवाया है। यह रिकॉर्ड मुख्यालय में भेजा जाएगा।
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- गुरमीत सिंह, इंस्पेक्टर, विजिलेंस विभाग सिरसा।
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नगर परिषद ने 2012 में सिरसा में डी प्लान के तहत शहर के बस स्टैंड से लेकर बाबा भूमनशाह चौक तक लाखों रुपये की लागत से लोहे की ग्रिल लगाई थी। इसके साथ ही आंबेडकर चौक, शाह सतनाम सिंह चौक व परशुराम चौक पर ट्रैफिक सिग्नल की लाइटें लगाई थीं। इस विकास कार्यों में धांधली के आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग को की गई थी। नगर परिषद ने 2015 में शहर में 530 गलियों के विकास कार्य करवाए थे। लेकिन इन गलियों के निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग करने की शिकायतें हुई। तब इसकी जांच भी विजिलेंस को सौंपी गई। विजिलेंस इन गलियों की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान करीब 28 गलियों के विजिलेंस ने सैंपल भी लिए हैं। हालांकि विजिलेंस ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 2018 में विजिलेंस विभाग के मुख्यालय में भेज दी थी। जांच रिपोर्ट में गली निर्माण में कमियां गिनाई गईं और 30 लाख रुपये की रिकवरी ठेकेदारों से करने की बात कही गई। लेकिन इस जांच रिपोर्ट का मुख्यालय अपने स्तर पर आकलन कर रहा है। इसलिए मुख्यालय ने नप से गलियों और डी प्लान का रिकॉर्ड मांगा है। रिकॉर्ड मिलने के बाद मुख्यालय से विजिलेंस के तकनीकि अधिकारी आकर साइट का निरीक्षण करेंगे।
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530 गलियों और डी प्लान के तहत होने वाले कार्यों की विजिलेंस जांच कर रही है। मुख्यालय ने कुछ बिंदुओं पर रिकॉर्ड मांगा था, लेकिन नप ने अभी आधा अधूरा रिकॉर्ड ही उपलब्ध करवाया है। यह रिकॉर्ड मुख्यालय में भेजा जाएगा।
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- गुरमीत सिंह, इंस्पेक्टर, विजिलेंस विभाग सिरसा।