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Sirsa News: नवसंवत पर डेरा बाबा सरसाई नाथ में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, नवाया शीश
Wed, 10 Apr 2024 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 10 Apr 2024 12:10 AM IST
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सरसाईंनाथ मंदिर में श्रद्धालु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नववर्ष विक्रमी संवत 2081 के अवसर पर शहर के बाबा सरसाईंनाथ डेरा में विशाल मेले व भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर से लेकर परशुराम चौक तक लोगों की लाइनें लगी रहीं। सिरसा जिले के साथ लगते क्षेत्र राजस्थान व पंजाब से भी श्रद्धालुओं ने आकर शीश नवाया।
सिरसा शहर के संस्थापक बाबा सरसाईंनाथ के डेरे में मंगलवार को नवसंवत्सर धूमधाम के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर शीश नवाकर सुख समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम को लेकर मंदिर को भव्य रूप से सजाया। अल सुबह से ही श्रद्धालु डेरा में आने शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर भगवा रंग की चादर, प्रसाद आदि चढ़ाकर मन्नत मांगी। वहीं लोगों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
पूरा दिन चलता रहा बाबा का गुणगान
सरसाईंनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भजन संकीर्तन का भी आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न भजन मंडली के कलाकारों ने बाबा की महिमा का गुणगान किया। भजन संकीर्तन के लोगों ने झूमकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। मंदिर के बाहर मेले में 50 से ज्यादा फड़ी वालों ने अपने फड़ियां लगाकर समान बेचा। इस दौरान मेले में महिलाओं व श्रद्धालुओं ने खूब खरीदारी की।
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सरसाईंनाथ ने की थी सिरसा की स्थापना
डेरा के महंत बाबा सुंदराईनाथ ने बताया कि सिरसा नगरी बाबा सरसाईंनाथ ने बसाई थी। जिसकी नींव नवसंवत के अवसर पर रखी गई थी। इसलिए नवसंवत पर जिलावासी यहां सपरिवार आकर शीश नवाते हैं। उन्होंने बताया कि डेरा मुगलकालीन है। यहां मुगल शहंशाह शाहजहां के बेटे दारा शिकोह को जीवनदान मिला था। इसके बाद मुगल बादशाह ने डेरे में भव्य गुंबद का निर्माण करवाया, जो आज भी ज्यों का त्यों हैं। डेरा प्रेम व भाईचारे का संदेश देता है तथा यहां पर हर धर्म के लोग आते हैं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को मंदिर की प्रसाद वितरण समिति की ओर से चूरमे का प्रसाद वितरित किया गया।
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सिरसा। नववर्ष विक्रमी संवत 2081 के अवसर पर शहर के बाबा सरसाईंनाथ डेरा में विशाल मेले व भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर से लेकर परशुराम चौक तक लोगों की लाइनें लगी रहीं। सिरसा जिले के साथ लगते क्षेत्र राजस्थान व पंजाब से भी श्रद्धालुओं ने आकर शीश नवाया।
सिरसा शहर के संस्थापक बाबा सरसाईंनाथ के डेरे में मंगलवार को नवसंवत्सर धूमधाम के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर शीश नवाकर सुख समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम को लेकर मंदिर को भव्य रूप से सजाया। अल सुबह से ही श्रद्धालु डेरा में आने शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर भगवा रंग की चादर, प्रसाद आदि चढ़ाकर मन्नत मांगी। वहीं लोगों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
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पूरा दिन चलता रहा बाबा का गुणगान
सरसाईंनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भजन संकीर्तन का भी आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न भजन मंडली के कलाकारों ने बाबा की महिमा का गुणगान किया। भजन संकीर्तन के लोगों ने झूमकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। मंदिर के बाहर मेले में 50 से ज्यादा फड़ी वालों ने अपने फड़ियां लगाकर समान बेचा। इस दौरान मेले में महिलाओं व श्रद्धालुओं ने खूब खरीदारी की।
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सरसाईंनाथ ने की थी सिरसा की स्थापना
डेरा के महंत बाबा सुंदराईनाथ ने बताया कि सिरसा नगरी बाबा सरसाईंनाथ ने बसाई थी। जिसकी नींव नवसंवत के अवसर पर रखी गई थी। इसलिए नवसंवत पर जिलावासी यहां सपरिवार आकर शीश नवाते हैं। उन्होंने बताया कि डेरा मुगलकालीन है। यहां मुगल शहंशाह शाहजहां के बेटे दारा शिकोह को जीवनदान मिला था। इसके बाद मुगल बादशाह ने डेरे में भव्य गुंबद का निर्माण करवाया, जो आज भी ज्यों का त्यों हैं। डेरा प्रेम व भाईचारे का संदेश देता है तथा यहां पर हर धर्म के लोग आते हैं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को मंदिर की प्रसाद वितरण समिति की ओर से चूरमे का प्रसाद वितरित किया गया।