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बिज्जूवाली के बाशिंदे मोल में पानी लेने के लिए विवश
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गोरीवाला। गांव बिज्जूवाली में पेयजल संकट के कारण बाशिंदों के समक्ष विषम स्थितियां उत्पन्न हो गई है। करीब 15 दिनों से बाशिंदों को पानी खरीदकर पीने के लिए विवश होना पड़ रहा है। एक टैंकर पानी मंगाने के लिए लोगों को 500 रुपये खर्च करना पड़ा है।
जनस्वास्थ्य विभाग गांव बिज्जूवाली के जलघर में अब तक नहरी पानी का विकल्प मुहैया नहीं करवा पाया है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। जलघर की डिग्गियों में नहरी पानी खत्म होते ही जलघर से पेयजल आपूर्ति बंद हो जाती है, जो कि अगली नहरी टर्न पर ही बहाल हो पाती है। इस समय अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों के जलघरों से जुड़े लोग अपने स्तर पर ही पानी का प्रबंध करते हैं। जलघर के निर्मित होने के समय से लेकर आज तक नहरी पानी का विकल्प सही न होने के कारण पेयजल संकट बना रहता है। जलघर में पानी 10 दिन में ही खत्म हो जाता है, जबकि नहरों में गर्मियों में 24 दिन और आम मौसम में 15 दिनों में पानी छोड़ा जाता है।
गांव के जलघर में बोरिंग ट्यूबवेल के पानी की गुणवत्ता सही नहीं होने के कारण जलघर में पानी खत्म होने पर ग्रामीणों को 500 रुपये में टैंकर खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। ग्रामीण कृष्ण कुमार, अनिल कुमार, वेद प्रकाश, संटी लाल, सतीश कुमार मांगेराम, सुंदर, सोमबीर, संजय व पवन कुमार आदि का कहना है कि जलघर में निर्मित डिग्गियों की क्षमता को विस्तृत कर अन्य स्थान पर बोरिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पानी का संकट नहीं हो सके। नहरी पानी बहुत कम मात्रा में पहुंचता है।
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नहर के बिना किसी सूचना के बंद हो जाने के कारण पेयजल की समस्या पैदा हुई है। इसके साथ ही जिस माइनर से पानी जलघर तक पहुंचता है, उसकी रिपेयरिंग का कार्य चल रहा है। विभाग हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। शीघ्र ही पानी की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
जेई हेमंत सिंगला।
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जनस्वास्थ्य विभाग गांव बिज्जूवाली के जलघर में अब तक नहरी पानी का विकल्प मुहैया नहीं करवा पाया है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। जलघर की डिग्गियों में नहरी पानी खत्म होते ही जलघर से पेयजल आपूर्ति बंद हो जाती है, जो कि अगली नहरी टर्न पर ही बहाल हो पाती है। इस समय अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों के जलघरों से जुड़े लोग अपने स्तर पर ही पानी का प्रबंध करते हैं। जलघर के निर्मित होने के समय से लेकर आज तक नहरी पानी का विकल्प सही न होने के कारण पेयजल संकट बना रहता है। जलघर में पानी 10 दिन में ही खत्म हो जाता है, जबकि नहरों में गर्मियों में 24 दिन और आम मौसम में 15 दिनों में पानी छोड़ा जाता है।
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गांव के जलघर में बोरिंग ट्यूबवेल के पानी की गुणवत्ता सही नहीं होने के कारण जलघर में पानी खत्म होने पर ग्रामीणों को 500 रुपये में टैंकर खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। ग्रामीण कृष्ण कुमार, अनिल कुमार, वेद प्रकाश, संटी लाल, सतीश कुमार मांगेराम, सुंदर, सोमबीर, संजय व पवन कुमार आदि का कहना है कि जलघर में निर्मित डिग्गियों की क्षमता को विस्तृत कर अन्य स्थान पर बोरिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पानी का संकट नहीं हो सके। नहरी पानी बहुत कम मात्रा में पहुंचता है।
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नहर के बिना किसी सूचना के बंद हो जाने के कारण पेयजल की समस्या पैदा हुई है। इसके साथ ही जिस माइनर से पानी जलघर तक पहुंचता है, उसकी रिपेयरिंग का कार्य चल रहा है। विभाग हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। शीघ्र ही पानी की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
जेई हेमंत सिंगला।