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चंडीगढ़ की कंपनी ने सिरसा के किसान से लाखों ठगे

Sun, 15 Nov 2015 01:58 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो Updated Sun, 15 Nov 2015 01:58 AM IST
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Millions of farmers cheated the company of Chandigarh

बेटे को विदेश में बेहतर तालीम की हसरत में एक किसान विदेश भेजने वाली कंपनी के हाथों लाखों की धोखाधड़ी का शिकार हो गया।

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पीड़ित किसान को चंडीगढ़ के सेक्टर 35सी स्थित उक्त कंपनी ने  45 लाख रुपये की चपत लगाई है। कंपनी ने पीड़ित के पुत्र को आस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर स्थित कॉलेज में प्रवेश दिलवाने का वादा किया था।

स्वयं के साथ हुई बेमानी से आहत किसान पुलिस अधीक्षक संगीता कालिया से मिला और न्याय की गुहार लगाई।

पुलिस अधीक्षक ने तमाम कागजात को देखकर उपपुलिस अधीक्षक मुख्यालय को कार्रवाई के आदेश देकर पांच दिनों के भीतर मामले की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

जानकारी के अनुसार सिरसा के गांव सिकंदरपुर निवासी किसान शमशेर सिंह की इच्छा थी कि उसका पुत्र नवनीत सिंह विदेश में जाकर एमबीबीएस की पढ़ाई करे और बड़ा डॉक्टर बनकर स्वदेश लौटे।
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नवनीत सिंह के कई दोस्त आस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने के लिए गए हुए हैं। उसने साल 2014 में मेडिकल विषय से कक्षा बारहवीं पास की।

एक दिन उसने एक पंजाबी टीवी चैनल पर बच्चों को विदेश में भेजने का कार्यक्रम देखा। कार्यक्रम में चंडीगढ़ स्थित एक कंपनी की डायरेक्टर वीना गोयल बोल रही थी कि उनकी कंपनी ने भारत से काफी बच्चे विदेशों में पढ़ने के लिए भेजे हैं।
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नवनीत ने पिता शमशेर सिंह को कंपनी के बारे में बताया। किसान शमशेर सिंह चंडीगढ़ के सेक्टर 35-सी स्थित उक्त कंपनी के कार्यालय में पहुंचा।

यहां पर कंपनी की डायरेक्टर वीना गोयल व राजेश्वर से शमशेर सिंह की बातचीत हुई। उक्त दोनों पदाधिकारी चंडीगढ़ के सेक्टर 44-बी में रहते हैं।

उक्त दोनों ने कहा कि कंपनी नवनीत को एमबीबीएस के लिए आस्ट्रेलिया भेज देगी और मेलबर्न शहर स्थित एक नामी कॉलेज में उसे प्रवेश में दिलवाया जाएगा।

कंपनी के पदाधिकारियों ने नवनीत सिंह का इंटरव्यू लिया और उसकी काउंसलिंग की गई । दस नवंबर 2014 को कंपनी की तरफ से शमशेर सिंह को बताया गया कि उसके पुत्र को मेलबर्न कॉलेज में प्रवेश दिलवाया दिया गया है।

इसके बाद कंपनी ने शमशेर से बीस लाख रुपये जमा करवा लिए। कुछ दिन बाद एफडीआर बनाने के नाम पर 18 लाख रुपये वसूल किए गए।

किसान खुश था कि उसका सपना पूरा होने जा रहा है, पुत्र को विदेशी कॉलेज में प्रवेश मिल गया। खुशी में शमशेर सिंह ने अपने सभी रिश्तेदारों को बुलवाकर शानदार पार्टी आयोजित की।

26 नवंबर 2014 को कंपनी ने फिर से उसे फोन करके तीन लाख 12 हजार 592 रुपये देने को कहा। यह रकम में उसने अन्य रकम की भांति बैंक के माध्यम से कंपनी डायरेक्टर के अकाउंट में जमा करवा दी।

जनवरी 2015 में शमशेर सिंह ने कंपनी पदाधिकारियों से कहा कि उसके पुत्र के दोस्तों की ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई शुरू हो चुकी है अगर जल्दी नहीं भेजा गया तो नवनीत पढ़ाई में पिछड़ जाएगा।

इसलिए जल्दी से नवनीत को आस्ट्रेलिया भेजा जाए। शमशेर सिंह की बात का कंपनी डायरेक्टर ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और टाल मटोल व बहाने बाजी शुरू कर दी।

इन बातों से शमशेर को कंपनी पदाधिकारियों की नीयत पर संदेह हो गया। उसने नई दिल्ली एंबेसी और मेलबॉर्न कॉलेज से संपर्क किया तो उसे जवाब मिला कि कंपनी ने किसी अन्य लड़के का वीजा लगवाकर उसे आस्ट्रेलिया भेजा है।


स्वयं के साथ कंपनी द्वारा की गई बेईमानी, जालसाजी से आहत शमशेर सिंह ने कंपनी से अपना रुपया वापस मांगा लेकिन कंपनी पदाधिकारियों ने साफ मना कर दिया।

पीड़ित का अपने पुत्र को विदेश में पढ़ाकर उसे बड़ा डॉक्टर बनाने का सपना चकनाचूर होने के बाद उसने आरोपियों को सबक सिखाने की ठानी।

शुक्रवार दोपहर को शमशेर सिंह पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और नवनियुक्त एसपी संगीता कालिया से आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगाई।

फरियादी से सारी बात सुनने और कागजात देखने के बाद पुलिस अधीक्षक ने उपपुलिस अधीक्षक को कार्रवाई करके पांच दिनों के अंदर इसी रिपोर्ट दिखाने का आदेश दिया।

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