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मां ने कहा-बेटा तूने कहा था कि मैं तेरा सपना पूरा करूंगा
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ओढां। ओढां की आईटीआई में बुधवार को करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसे 19 साल नुहियांवाली निवासी रमेश कुमार ने वीरवार रात्रि दम तोड़ दिया। इस घटना की सूचना रमेश के घर दूसरे दिन दोपहर को पहुंची। अपने बेटे की सकुशल वापसी की दुआ कर रही उसकी मां सिलोचना देवी को जैसे ही उसके बेटे के न रहने की सूचना दी गई तो वह बेसुध हो गई। अपने बेटे का अंतिम बार मुंह देखते समय उसने रोते हुए कहा कि तूने तो कहा था कि वह उसका सपना पूरा करेगा। लेकिन वह उसे यूं छोड़कर क्यों चला गया। मुझे कुछ नहीं सिर्फ तूं वापिस चाहिए। वहीं रमेश के पिता देवीलाल के मुंह से रह-रहकर एक ही बात निकल रही थी कि आईटीआई ने उसके बेटे को निगल लिया। काश वह घटना केे दिन घर पर रह जाता।
घटना के दिन बुधवार सुबह रमेश की मां सिलोचना ने मायके राजस्थान में जाना था। जिस पर उसने उसे बस स्टैंड तक छोड़कर आने के लिए कहा था लेकिन रमेश ने कहा कि उसका आईटीआई जाने का समय हो गया है। रमेश आनन-फानन में अपनी मां को बस स्टेंड तक छोड़ आया था। रमेश के सहपाठियों विशाल, राकेश व योगेश ने बताया कि वह अक्सर यही जिक्र करता था कि इलेक्ट्रिक का कोर्स करने के बाद गांव मेें खुलने वाले सोलर प्लांट में उसे अच्छी नौकरी मिल जाएगी। रमेश के टीचर रहे पवन देमीवाल, विजय पाल व वकील गोदारा ने बताया कि रमेश बेहद ही शांत एवं सरल स्वभाव का होने के साथ-साथ पढ़ाई मेें भी काफी अग्रणी था। रमेश के दादा रूलीचंद, चाचा धर्मपाल व डॉ. राजपाल के अनुसार उसकी इलेक्ट्रिक में रुचि थी। वह अक्सर यही कहता था कि कोर्स पूरा करने के बाद वह कोई अच्छी नौकरी करना चाहेगा। घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए रमेश पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी भी कर लेता था।
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घटना के दिन बुधवार सुबह रमेश की मां सिलोचना ने मायके राजस्थान में जाना था। जिस पर उसने उसे बस स्टैंड तक छोड़कर आने के लिए कहा था लेकिन रमेश ने कहा कि उसका आईटीआई जाने का समय हो गया है। रमेश आनन-फानन में अपनी मां को बस स्टेंड तक छोड़ आया था। रमेश के सहपाठियों विशाल, राकेश व योगेश ने बताया कि वह अक्सर यही जिक्र करता था कि इलेक्ट्रिक का कोर्स करने के बाद गांव मेें खुलने वाले सोलर प्लांट में उसे अच्छी नौकरी मिल जाएगी। रमेश के टीचर रहे पवन देमीवाल, विजय पाल व वकील गोदारा ने बताया कि रमेश बेहद ही शांत एवं सरल स्वभाव का होने के साथ-साथ पढ़ाई मेें भी काफी अग्रणी था। रमेश के दादा रूलीचंद, चाचा धर्मपाल व डॉ. राजपाल के अनुसार उसकी इलेक्ट्रिक में रुचि थी। वह अक्सर यही कहता था कि कोर्स पूरा करने के बाद वह कोई अच्छी नौकरी करना चाहेगा। घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए रमेश पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी भी कर लेता था।
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