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Sirsa News: सीडीएलयू में खुलेगा भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र
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सिरसा। सीडीएलयू में एमओयू साईन के दौरान उपस्थितसिरसा। सीडीएलयू में एमओयू साईन के दौरान उपस्थि
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय और शोभा देवी रामानंद बंसल फाउंडेशन, सिरसा के बीच शुक्रवार को एमओयू हुआ। विश्वविद्यालय में शोभा देवी रामानंद बंसल भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र की स्थापना की जाएगी। शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष समारोह ने शिक्षा जगत में नई संभावनाओं के द्वार खोले और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की दिशा में पहल की है।
इस एमओयू पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो. अशोक शर्मा ने हस्ताक्षर किए। जबकि फाउंडेशन की ओर से शिक्षाविद एवं फाउंडेशन अध्यक्ष कुमुद बंसल ने दस्तखत किए। इस कार्यक्रम का संचालन प्रो. पंकज शर्मा, निदेशक सामुदायिक संबंध, सीडीएलयू ने किया।
कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा कि यह एमओयू भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करने और उन्हें उच्च शिक्षा की मुख्यधारा में एकीकृत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र से विद्यार्थियों को परंपरागत भारतीय मूल्यों से परिचित कराने के साथ-साथ वैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक सोच का भी विकास होगा, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और सक्षम बनेंगे।
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इस अवसर पर डॉ. संजू बाला ढुल, निदेशक भारतीय ज्ञान प्रणाली, ज्ञान प्रणाली, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रोफेसर राजकुमार ,डीन यूनिवर्सिटी स्कूल फॉर ग्रेजुएट स्टडीज प्रोफेसर सुशील, प्रोफेसर काशिफ, डॉ. मंजू नेहरा, फाउंडेशन के उपाध्यक्ष अरविंद बंसल और कोषाध्यक्ष वसुधा बंसल आदि मौजूद रहे।
निगरानी के लिए सलाहकार समिति गठित
फाउंडेशन की अध्यक्ष कुमुद बंसल ने कहा कि यह केंद्र शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों क्षेत्रों में मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति एनईपी 2020 और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी। संस्कृत भारती के सहयोग से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। एमओयू के अनुसार केंद्र के संचालन और विकास की निगरानी के लिए कुलपति की अध्यक्षता में एक सलाहकार समिति गठित की जाएगी। इसमें विश्वविद्यालय और फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारतीय ज्ञान प्रणाली के बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। यह एमओयू दस वर्षों तक प्रभावी रहेगा और आवश्यकता अनुसार इसका नवीनीकरण किया जा सकेगा।
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इस एमओयू पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो. अशोक शर्मा ने हस्ताक्षर किए। जबकि फाउंडेशन की ओर से शिक्षाविद एवं फाउंडेशन अध्यक्ष कुमुद बंसल ने दस्तखत किए। इस कार्यक्रम का संचालन प्रो. पंकज शर्मा, निदेशक सामुदायिक संबंध, सीडीएलयू ने किया।
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कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा कि यह एमओयू भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करने और उन्हें उच्च शिक्षा की मुख्यधारा में एकीकृत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र से विद्यार्थियों को परंपरागत भारतीय मूल्यों से परिचित कराने के साथ-साथ वैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक सोच का भी विकास होगा, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और सक्षम बनेंगे।
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इस अवसर पर डॉ. संजू बाला ढुल, निदेशक भारतीय ज्ञान प्रणाली, ज्ञान प्रणाली, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रोफेसर राजकुमार ,डीन यूनिवर्सिटी स्कूल फॉर ग्रेजुएट स्टडीज प्रोफेसर सुशील, प्रोफेसर काशिफ, डॉ. मंजू नेहरा, फाउंडेशन के उपाध्यक्ष अरविंद बंसल और कोषाध्यक्ष वसुधा बंसल आदि मौजूद रहे।
निगरानी के लिए सलाहकार समिति गठित
फाउंडेशन की अध्यक्ष कुमुद बंसल ने कहा कि यह केंद्र शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों क्षेत्रों में मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति एनईपी 2020 और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी। संस्कृत भारती के सहयोग से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। एमओयू के अनुसार केंद्र के संचालन और विकास की निगरानी के लिए कुलपति की अध्यक्षता में एक सलाहकार समिति गठित की जाएगी। इसमें विश्वविद्यालय और फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारतीय ज्ञान प्रणाली के बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। यह एमओयू दस वर्षों तक प्रभावी रहेगा और आवश्यकता अनुसार इसका नवीनीकरण किया जा सकेगा।