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बीए पास है गिरोह का सरगना सुनील, पिता के साथ स्कूटर रिपेयरिंग का करता था काम

Fri, 22 Jan 2021 11:26 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2021 11:26 PM IST
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BA is close to gang leader Sunil, used to do scooter repairing with father
सीआईए पुलिस द्वारा पकड़े गए फर्जी दस्तावेज तैयार कर गाड़ियों को बेचने वाले आरोपी को चार दिन के रिमांड पर लिया गया है। आरोपी से सरगना से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी मिल सकेगी। आरोपित सुनील चितकारा बीए पास है। पहले वह अपनी पिता के साथ स्कूटर ठीक करने का कार्य करता था और फिर गाड़ियों को खरीदने और बेचने का कार्य में लग गया है।
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आरोपी सुनील चितकारा तीन वर्ष पहले अपने गुरुग्राम में रहने वाले दोस्त सुमित से मिला। जोकि रोहतक का ही स्थायी निवासी है। सुमित कुमार ने सुनील कुमार की तीन वर्ष पहले सुरेंद्र डांगी और अमित से मुलाकात करवाई। सुरेंद्र डांगी यमुनानगर जगाधरी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी कार्यालय में क्लर्क है और अमित सरल केंद्र में कार्य करता है। मुलाकात के बाद सुनील कुमार ने फर्जी आरसी बनाने को लेकर उन्हें 65 हजार रुपये दिए जाने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद सुनील चितकारा ने गाड़ियों की फर्जी आरसी बनवाकर गाड़ियों को बेचना शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार फर्जी आरसी और गाड़ी का चेसिस नंबर बदलकर सरगना अब तक 400 से अधिक गाड़ियां बेच चुका है।
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फर्जी दस्तावेजों से आरसी बनाने का पुराना रिकॉर्ड भी खंगाल रही पुलिस
गाड़ियों की फर्जी आरसी बनाने और गाड़ी का चेसिस नंबर बदलकर उन्हें दूसरे लोगों को बेचने वाले मामले में अब पुलिस यमुनानगर जगाधरी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से पास हो चुकीं गाड़ियों के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। पुलिस ने अब तक तीन स्तरों की जांच कर ली है। इसमें फर्जी दस्तावेजों पर आरसी बनाने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। वहीं डीएसपी ने कहा कि आरसी को तैयार करने में हर प्रकार जांच की जाती है। ऐसे में अगर कोई अधिकारी भी इस मामले में संलिप्त पाया जाता है, उनके खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा।
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बैंक और लोगों के भी फर्जी दस्तावेज भी करते थे तैयार
वहीं डबवाली डीएसपी कुलदीप बैनीवाल व सीआईए इंचार्ज नरेश कुुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में गिरोह द्वारा कई गाड़ियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर गाड़ियों को खरीदना पाया गया है। आरोपी फाइनेंस की गाड़ियों की खरीदारी करते थे और बैंक अथॉरिटी के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनमें गाड़ी की कीमत अधिक दिखाकर दूसरे लोगों को बेचते थेे। जबकि इन्होंने अपने नाम पर भी 17 गाड़ियां की हुई थीं। इनके सभी दस्तावेज फर्जी हैं। दस्तावेजों में नाम, पता व अन्य जानकारी भी गलत दी गई है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और अन्य स्थानों से खरीदते थे गाड़ियां
आरोपित महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और अन्य राज्यों से भी फाइनेंस की गाड़ियों की बोली लगा खरीदते थे, जिसमें वह अपने फर्जी दस्तावेजों को जमा करवा उन गाड़ियों को किसी अन्य व्यक्ति के नाम करवा देते थे, जिसके पश्चात फाइनेंस की गाड़ियों को उत्तर भारत में खरीदारों को बेच देते थे।

बड़े अपराधी को भी गाड़ी बेचने की भी होगी जांच
डीएसपी ने बताया कि गिरोह ने कभी किसी बड़े अपराधी को कोई गाड़ी बेची हो और इसके बाद उक्त अपराधी ने उस गाड़ी का इस्तेमाल किसी बड़ी वारदात में किया हो, इसकी भी पूरी जांच की जाएगी।
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