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आनंदगढ़ में मंदिर के भूमि विवाद ने पकड़ा तूल
अमर उाला ब्यूरो/सिरसा
Updated Sun, 01 Jan 2017 11:36 PM IST
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बड़ागुढा खंड के गांव आनंदगढ़ में मंदिर की भूमि का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक पक्ष ने थाने में शिकायत देकर गांव के कुछ लोगों पर नशे में उनके घर घुसकर गाली-गलोच करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। वहीं शिकायतकर्ता ने इसकी प्रति राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री, आईजी हिसार रेंज, उपायुक्त एवं एसपी तथा ब्राह्मण सभा सिरसा को भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
शिकायतकर्ता महिला चंद्रावली ने बताया है कि गांव के कुछ लोग मंदिर की भूमि को लेकर उन्हें परेशान कर रहे हैं, जिसकेे चलते उनका परिवार गांव से पलायन करने को मजबूर है। बड़ागुढ़ा थाना में दी शिकायत में चंद्रावली ने कहा कि वह अपने तीन पुत्र व पुत्रवधुओं, दो पौत्रवधु, दो पोतियों के साथ रोहिड़ावाली रोड स्थित अपनी ढाणी में रहती है। आरोप लगाया गया है कि कुछ दिन पहले गांव के कुछ लोग शराब के नशे में धुत होकर उनके घर में घुस आए और बहू-बेटियों को अपशब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। विधवा चंद्रावली ने बताया कि उसका पति गांव के मंदिर में पुजारी था और मंदिर को वर्षों पहले दान में दी गई करीब नौ एकड़ भूमि पर भी वह काश्त कर रहे थे लेकिन उसके पति की मौत के बाद गांव के कुछ दबंगों ने 2009 से उन्हें मंदिर और कृषि भूमि से बेदखल करने के प्रयास किया था।
आरोप है कि 2010 में उन्होंने मंदिर का ताला तोडक़र मंदिर की पूूजा का कार्य उनसे छीन लिया, लेकिन कृषि भूमि के लिए उनके द्वारा न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। इसमें 2014 में सीनियर डिविजन न्यायालय सिरसा व अक्तूबर 2016 में सेशन अदालत द्वारा उनके पक्ष में फैसला पारित किया था लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद ग्रामीणों द्वारा कब्जा छुड़ाने के लिए उनका हुक्का-पानी बंद करते हुए सामाजिक बहिष्कार कर दिया। चंद्रावली ने आरोप लगाया कि गांव के लोग उन्हें गांव से निकालना चाहते हैं और बार-बार परेशान कर रहे हैं।
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पूरे गांव में हमारा अकेला घर होने के नाते गांव के दबंग व राजनीतिक व्यक्ति इनको संरक्षण देते हैं। विधवा ने आरोप लगाया कि उक्त लोगों के अत्याचारों से उसका परिवार तंग आ चुका है जिसके चलते वह गांव छोड़ने को मजबूर हैं।
गांव द्वारा जमीन मंदिर के नाम दान दी गई है, महिला के पुजारी पति की मृत्यु के बाद उन्होंने मंदिर की संभाल बंद कर दी तो ग्रामीणों ने जमीन भी मंदिर की होने की बात कही, जबकि काश्त करते हुए पुजारी के बेटे जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं, जिससे ग्रामीणों का विरोध है। पुजारी के परिवार का बहिष्कार करने वाले आरोप निराधार हैं।
- सरपंच प्रतिनिधि रिसाल सिंह आनंदगढ
आनंदगढ में विवादित जमीन मंदिर के नाम है जबकि काश्त उस पर पहले पुजारी का परिवार कर रहा है। इस मामले में विवाद न बढ़े जिसके चलते कुछ दिन पूर्व दोनों पक्षों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। गांव में अमन शांति बनी रहे इसके लिए मंदिर की विवादित भूमि पर धारा 145 लागू करने के लिए अधिकारियों से अनुमति के लिए रिपोर्ट भेज गई है।
--यादविंद्र सिंह थाना प्रभारी बड़ागुढ़ा
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शिकायतकर्ता महिला चंद्रावली ने बताया है कि गांव के कुछ लोग मंदिर की भूमि को लेकर उन्हें परेशान कर रहे हैं, जिसकेे चलते उनका परिवार गांव से पलायन करने को मजबूर है। बड़ागुढ़ा थाना में दी शिकायत में चंद्रावली ने कहा कि वह अपने तीन पुत्र व पुत्रवधुओं, दो पौत्रवधु, दो पोतियों के साथ रोहिड़ावाली रोड स्थित अपनी ढाणी में रहती है। आरोप लगाया गया है कि कुछ दिन पहले गांव के कुछ लोग शराब के नशे में धुत होकर उनके घर में घुस आए और बहू-बेटियों को अपशब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। विधवा चंद्रावली ने बताया कि उसका पति गांव के मंदिर में पुजारी था और मंदिर को वर्षों पहले दान में दी गई करीब नौ एकड़ भूमि पर भी वह काश्त कर रहे थे लेकिन उसके पति की मौत के बाद गांव के कुछ दबंगों ने 2009 से उन्हें मंदिर और कृषि भूमि से बेदखल करने के प्रयास किया था।
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आरोप है कि 2010 में उन्होंने मंदिर का ताला तोडक़र मंदिर की पूूजा का कार्य उनसे छीन लिया, लेकिन कृषि भूमि के लिए उनके द्वारा न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। इसमें 2014 में सीनियर डिविजन न्यायालय सिरसा व अक्तूबर 2016 में सेशन अदालत द्वारा उनके पक्ष में फैसला पारित किया था लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद ग्रामीणों द्वारा कब्जा छुड़ाने के लिए उनका हुक्का-पानी बंद करते हुए सामाजिक बहिष्कार कर दिया। चंद्रावली ने आरोप लगाया कि गांव के लोग उन्हें गांव से निकालना चाहते हैं और बार-बार परेशान कर रहे हैं।
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पूरे गांव में हमारा अकेला घर होने के नाते गांव के दबंग व राजनीतिक व्यक्ति इनको संरक्षण देते हैं। विधवा ने आरोप लगाया कि उक्त लोगों के अत्याचारों से उसका परिवार तंग आ चुका है जिसके चलते वह गांव छोड़ने को मजबूर हैं।
गांव द्वारा जमीन मंदिर के नाम दान दी गई है, महिला के पुजारी पति की मृत्यु के बाद उन्होंने मंदिर की संभाल बंद कर दी तो ग्रामीणों ने जमीन भी मंदिर की होने की बात कही, जबकि काश्त करते हुए पुजारी के बेटे जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं, जिससे ग्रामीणों का विरोध है। पुजारी के परिवार का बहिष्कार करने वाले आरोप निराधार हैं।
- सरपंच प्रतिनिधि रिसाल सिंह आनंदगढ
आनंदगढ में विवादित जमीन मंदिर के नाम है जबकि काश्त उस पर पहले पुजारी का परिवार कर रहा है। इस मामले में विवाद न बढ़े जिसके चलते कुछ दिन पूर्व दोनों पक्षों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। गांव में अमन शांति बनी रहे इसके लिए मंदिर की विवादित भूमि पर धारा 145 लागू करने के लिए अधिकारियों से अनुमति के लिए रिपोर्ट भेज गई है।
--यादविंद्र सिंह थाना प्रभारी बड़ागुढ़ा