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टेंडर में धांधली का आरोप, ठेकेदारों ने दिया धरना
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नगर परिषद कार्यालय के बाहर धरना देते ठेकेदार।
- फोटो : Sirsa
वीरवार को ठेकेदारों ने नगर परिषद में ईओ कार्यालय के समक्ष धरना देकर टेंडर में धांधली किए जाने का आरोप लगाया। ठेकेदारों के धरने के सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ठेकेदारों को कहा कि वे धरना कार्यालय में न लगाए, बल्कि गेट पर लगाए।
इसके बाद ठेकेदारों ने नप के गेट के आगे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। साथ ही टेंडर में धांधली की शिकायत सीएम, डिप्टी सीएम व उपायुक्त को दी। करीब 300 गलियां बनाने का प्रस्ताव करीब तीन साल पहले हाउस की मीटिंग में पास हुआ था। नियमानुसार तीन साल पहले पास हुआ प्रस्ताव यदि एक साल तक लागू नहीं होता तो उसे दोबारा से पास करना पड़ता है। नगर परिषद की एमई शाखा ने कुछ दिनों पहले 124 गलियों के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। लगभग साढ़े 12 करोड़ के इस कार्य के लिए कई फर्मों द्वारा विधिवत टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई थी। ठेकेदार राजेंद्रपाल जिंदल, कुलदीप सिंह, दीपक कुमार, विजय कुमार, दीपक, राकेश कुमार ने बताया कि गलियों के टेंडर नगर परिषद कार्यालय में खोलने की बजाए नगर परिषद के ईओ व कार्यकारी अभियंता की कोठी में ही खोले गए। जिन ठेकेदारों के टेंडर खोले गए हैं, केवल उन्हीं ठेकेदारों को कोठी पर बुलाया गया था। शेष ठेकेदारों को न तो सूचना दी गई और न ही कोठी में घुसने दिया। ठेकेदारों के आरोप है कि दि कंवरपुरा फर्म, गुरु कृपा, दी सिरसा राधे कोआपरेटिव, दि सिरसा अंकुश, दी सिरसा सरस्वती, दी सागर सोसाइटी के टेंडर खोले गए। धरना दे रहे ठेकेदारों के आरोप है कि इन फर्म संचालकों ने अधिकारियों के साथ सेटिंग करके उन्हें टेंडर अलॉट किए हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की है।
पहले भी चल रही है 528 गलियों की विजिलेंस जांच
नगर परिषद में टेंडर धांधली में शिकायतें कई बार हुई है। कमेटी ने कुछ साल पहले 528 गलियों के टेंडर लगाए थे। जिसकी अभी तक विजिलेंस जांच है। इसमें कई ऐसी गलियां थी, जिनकी फिजिबिल्टी रिपोर्ट सही थी, लेकिन कागजों में उन्हें दोबारा से बना दिया गया। नप में ठेकेदार आपस में मिलीभगत करके ही टेंडर भरते हैं।
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वीरवार दोपहर बाद आए एसएमएस
धरना दे रहे ठेकेदारों ने बताया कि टेंडर की टेक्निकल बिड खुलते ही आवेदन करने वाली एजेंसी को एसएमएस आता है। ठेकेदार के सामने ही अधिकारी टेंडर खोलते हैं और उन्हें बताते हैं कि आपके कागजात में खामियां है या नहीं। हस्ताक्षर करवाए जाते हैं। साथ ही टेक्निकल बिड खुलते ही मोबाइल पर एसएमएस आता है। लेकिन हमें एसएमएस ही नहीं आया। वीरवार को धरना देने के बाद दोपहर ढाई बजे नप अधिकारियों ने टेक्निकल बिड रद्द की। तब ब्लॉक किए हुए एसएमएस आए। ठेकेदारों ने कहा कि उन्होंने नप द्वारा निर्धारित किए गए रेट से ज्यादा में टेंडर भरे थे। परंतु जिन 6 फर्मों को टेंडर अलॉट किए गए, उन्होंने 15 से 20 प्रतिशत माइनस में टेंडर भरे। उनके ज्यादा रेट भरने पर भी टेक्निकल बिड रद्द कर दी।
कोट्स
तीन दिन से टेंडर खोलने की प्रक्रिया चल रही है। हर गली के टेंडर के साथ काफी कागजात हैं। इसलिए कागजात चेक करने में काफी समय लग रहा है। जिन फर्मों ने शर्तें पूरी की, उन्हें ही टेंडर अलॉट किए गए।
- अमित पंघाल, कार्यकारी अभियंता, नगर परिषद सिरसा।
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इसके बाद ठेकेदारों ने नप के गेट के आगे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। साथ ही टेंडर में धांधली की शिकायत सीएम, डिप्टी सीएम व उपायुक्त को दी। करीब 300 गलियां बनाने का प्रस्ताव करीब तीन साल पहले हाउस की मीटिंग में पास हुआ था। नियमानुसार तीन साल पहले पास हुआ प्रस्ताव यदि एक साल तक लागू नहीं होता तो उसे दोबारा से पास करना पड़ता है। नगर परिषद की एमई शाखा ने कुछ दिनों पहले 124 गलियों के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। लगभग साढ़े 12 करोड़ के इस कार्य के लिए कई फर्मों द्वारा विधिवत टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई थी। ठेकेदार राजेंद्रपाल जिंदल, कुलदीप सिंह, दीपक कुमार, विजय कुमार, दीपक, राकेश कुमार ने बताया कि गलियों के टेंडर नगर परिषद कार्यालय में खोलने की बजाए नगर परिषद के ईओ व कार्यकारी अभियंता की कोठी में ही खोले गए। जिन ठेकेदारों के टेंडर खोले गए हैं, केवल उन्हीं ठेकेदारों को कोठी पर बुलाया गया था। शेष ठेकेदारों को न तो सूचना दी गई और न ही कोठी में घुसने दिया। ठेकेदारों के आरोप है कि दि कंवरपुरा फर्म, गुरु कृपा, दी सिरसा राधे कोआपरेटिव, दि सिरसा अंकुश, दी सिरसा सरस्वती, दी सागर सोसाइटी के टेंडर खोले गए। धरना दे रहे ठेकेदारों के आरोप है कि इन फर्म संचालकों ने अधिकारियों के साथ सेटिंग करके उन्हें टेंडर अलॉट किए हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की है।
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पहले भी चल रही है 528 गलियों की विजिलेंस जांच
नगर परिषद में टेंडर धांधली में शिकायतें कई बार हुई है। कमेटी ने कुछ साल पहले 528 गलियों के टेंडर लगाए थे। जिसकी अभी तक विजिलेंस जांच है। इसमें कई ऐसी गलियां थी, जिनकी फिजिबिल्टी रिपोर्ट सही थी, लेकिन कागजों में उन्हें दोबारा से बना दिया गया। नप में ठेकेदार आपस में मिलीभगत करके ही टेंडर भरते हैं।
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वीरवार दोपहर बाद आए एसएमएस
धरना दे रहे ठेकेदारों ने बताया कि टेंडर की टेक्निकल बिड खुलते ही आवेदन करने वाली एजेंसी को एसएमएस आता है। ठेकेदार के सामने ही अधिकारी टेंडर खोलते हैं और उन्हें बताते हैं कि आपके कागजात में खामियां है या नहीं। हस्ताक्षर करवाए जाते हैं। साथ ही टेक्निकल बिड खुलते ही मोबाइल पर एसएमएस आता है। लेकिन हमें एसएमएस ही नहीं आया। वीरवार को धरना देने के बाद दोपहर ढाई बजे नप अधिकारियों ने टेक्निकल बिड रद्द की। तब ब्लॉक किए हुए एसएमएस आए। ठेकेदारों ने कहा कि उन्होंने नप द्वारा निर्धारित किए गए रेट से ज्यादा में टेंडर भरे थे। परंतु जिन 6 फर्मों को टेंडर अलॉट किए गए, उन्होंने 15 से 20 प्रतिशत माइनस में टेंडर भरे। उनके ज्यादा रेट भरने पर भी टेक्निकल बिड रद्द कर दी।
कोट्स
तीन दिन से टेंडर खोलने की प्रक्रिया चल रही है। हर गली के टेंडर के साथ काफी कागजात हैं। इसलिए कागजात चेक करने में काफी समय लग रहा है। जिन फर्मों ने शर्तें पूरी की, उन्हें ही टेंडर अलॉट किए गए।
- अमित पंघाल, कार्यकारी अभियंता, नगर परिषद सिरसा।