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कृषि कानून ः दूसरी बार दो फाड़ हुआ किसान आंदोलन
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16 अक्तूबर को दोनों गुटों को एक किया गया तो एक-दूसरे के गले में हार डालते हुए किसान नेता। फाइल फोटो
- फोटो : Sirsa
तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा किसान आंदोलन अब दूसरी बार दो फाड़ हो गया। दोनों गुटों में रविवार को गुरुद्वारा साहिब में वार्ता के लिए करवाए गए प्रयास सिरे नहीं चढ़े। ऐसे में अब किसान नेता जसबीर सिंह भाटी गुट के किसान नेताओं ने शहीद भगत सिंह स्टेडियम के पक्का मोर्चा से अपने आप को अलग कर लिया। ऐसे में सिरसा में चल रहा किसान आंदोलन किसान नेताओं की नेतागिरी के कारण दो फाड़ हो गया।
पिछले कुछ दिनों से शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चल रहे पक्का मोर्चा धरने पर किसान नेताओं में मन मुटाव था। उस समय हो गया जब पांच नवंबर को सिरसा में पांच जगहों पर किसान नेताओं ने अपना अलग-अलग धरना लगाया था। हालांकि पहले घोषणा हुई थी कि सिर्फ साहुवाला प्रथम में ही किसान नेशनल हाईवे नंबर दस पर जाम लगाएंगे। लेकिन अलग-अलग किसान नेताओं ने पांच जगहों पर जाम लगा दिया। पिछले कुछ दिनों से जसबीर सिंह भाटी गुट के नेताओं से पक्का मोर्चा धरना से किनारा कर लिया था। रविवार को गुरुद्वारा चिल्ला साहिब में चार सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय कमेटी की बैठक बुलाई गई। मीटिंग में दस सदस्यीय ही पहुंचे। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर अनदेखी के आरोप लगाए और दोनों में काफी बहसबाजी भी हुई। इसके बाद फैसला हुआ कि सभी अपने अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। तब भारूखेड़ा और भाटी गुट ने अलग आंदोलन चलाने का फैसला लिया। भाटी गुट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे 16 नवंबर की लोक पंचायत में हिस्सा नहीं लेंगे। यह कार्यक्रम 12 सदस्यीय कमेटी की राय से नहीं लिया गया। साथ ही पांच नवंबर को एक ही जगह पर साहुवाला पर रोड जाम करना था, लेकिन पांच जगहों पर अलग-अलग कार्यक्रम रख दिए गए।
धरने पर ही हुई थी गहमागहमी
पांच नवंबर के बाद धरने के कुछ दिनों बाद ही सिरसा में पक्का मोर्चा धरने पर किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख और प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा की आपस में गहमागहमी हो गई थी। हालांकि कुछ किसान नेताओं ने दोनों को शांत करवा दिया था। आंदोलन के दो फाड़ होने के संकेत उसी दिन ही मिल गए थे, लेकिन रविवार को गुरुद्वारा साहिब में हुई दोनों पक्षों में मीटिंग में दोनों गुटों ने अलग होने की घोषणा कर दी। बता दें कि 6 अक्तूबर को सिरसा में तीन कृषि कानूनों के विरोध में भारी संख्या में किसान इकट्ठा हुए थे। इसके बाद किसानों ने डिप्टी सीएम के घर का घेराव करना था, पुलिस ने उन्हें बाबा भूमणशाह चौक पर रोक लिया। इसके बाद किसान गुटों में मतभेद पैदा हो गए। प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने शहीद भगत सिंह स्टेडियम पर पक्का मोर्चा नाम से धरना लगा लिया। जबकि जसबीर सिंह भाटी गुट ने लघु सचिवालय पर धरना लगा दिया। लेकिन 16 अक्तूबर को गुरुद्वारा कमेटी ने दोनों धड़ों को एक जुट किया और आंदोलन के संबंध में फैसला लेने के लिए 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। बाकायदा लघु सचिवालय पर धरने पर बैठे जसबीर सिंह भाटी गुट के किसान नेताओं को सम्मान के साथ पक्के मोर्चा धरने पर लाया गया और उन्हें हार डालकर स्वागत किया गया। परंतु अब फिर से किसान नेताओं के धड़े अलग-अलग हो गए।
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कोट
12 सदस्यीय कमेटी का दोबारा से गठन किया जाएगा। 16 नवंबर को लोक पंचायत की तैयारियां की जा रही है। इसके बाद 26 नवंबर को दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
-प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा किसान मंच।
कोट
हम 16 नवंबर की लोक पंचायत में हिस्सा नहीं लेंगे। हमारा किसान आंदोलन अलग से चलेगा और 26 व 27 नवंबर को दिल्ली कूच के लिए गांवों में जनसंपर्क चलाया जाएगा।
-जसबीर सिंह भाटी, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान संगठन।
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पिछले कुछ दिनों से शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चल रहे पक्का मोर्चा धरने पर किसान नेताओं में मन मुटाव था। उस समय हो गया जब पांच नवंबर को सिरसा में पांच जगहों पर किसान नेताओं ने अपना अलग-अलग धरना लगाया था। हालांकि पहले घोषणा हुई थी कि सिर्फ साहुवाला प्रथम में ही किसान नेशनल हाईवे नंबर दस पर जाम लगाएंगे। लेकिन अलग-अलग किसान नेताओं ने पांच जगहों पर जाम लगा दिया। पिछले कुछ दिनों से जसबीर सिंह भाटी गुट के नेताओं से पक्का मोर्चा धरना से किनारा कर लिया था। रविवार को गुरुद्वारा चिल्ला साहिब में चार सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय कमेटी की बैठक बुलाई गई। मीटिंग में दस सदस्यीय ही पहुंचे। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर अनदेखी के आरोप लगाए और दोनों में काफी बहसबाजी भी हुई। इसके बाद फैसला हुआ कि सभी अपने अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। तब भारूखेड़ा और भाटी गुट ने अलग आंदोलन चलाने का फैसला लिया। भाटी गुट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे 16 नवंबर की लोक पंचायत में हिस्सा नहीं लेंगे। यह कार्यक्रम 12 सदस्यीय कमेटी की राय से नहीं लिया गया। साथ ही पांच नवंबर को एक ही जगह पर साहुवाला पर रोड जाम करना था, लेकिन पांच जगहों पर अलग-अलग कार्यक्रम रख दिए गए।
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धरने पर ही हुई थी गहमागहमी
पांच नवंबर के बाद धरने के कुछ दिनों बाद ही सिरसा में पक्का मोर्चा धरने पर किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख और प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा की आपस में गहमागहमी हो गई थी। हालांकि कुछ किसान नेताओं ने दोनों को शांत करवा दिया था। आंदोलन के दो फाड़ होने के संकेत उसी दिन ही मिल गए थे, लेकिन रविवार को गुरुद्वारा साहिब में हुई दोनों पक्षों में मीटिंग में दोनों गुटों ने अलग होने की घोषणा कर दी। बता दें कि 6 अक्तूबर को सिरसा में तीन कृषि कानूनों के विरोध में भारी संख्या में किसान इकट्ठा हुए थे। इसके बाद किसानों ने डिप्टी सीएम के घर का घेराव करना था, पुलिस ने उन्हें बाबा भूमणशाह चौक पर रोक लिया। इसके बाद किसान गुटों में मतभेद पैदा हो गए। प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने शहीद भगत सिंह स्टेडियम पर पक्का मोर्चा नाम से धरना लगा लिया। जबकि जसबीर सिंह भाटी गुट ने लघु सचिवालय पर धरना लगा दिया। लेकिन 16 अक्तूबर को गुरुद्वारा कमेटी ने दोनों धड़ों को एक जुट किया और आंदोलन के संबंध में फैसला लेने के लिए 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। बाकायदा लघु सचिवालय पर धरने पर बैठे जसबीर सिंह भाटी गुट के किसान नेताओं को सम्मान के साथ पक्के मोर्चा धरने पर लाया गया और उन्हें हार डालकर स्वागत किया गया। परंतु अब फिर से किसान नेताओं के धड़े अलग-अलग हो गए।
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12 सदस्यीय कमेटी का दोबारा से गठन किया जाएगा। 16 नवंबर को लोक पंचायत की तैयारियां की जा रही है। इसके बाद 26 नवंबर को दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
-प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा किसान मंच।
कोट
हम 16 नवंबर की लोक पंचायत में हिस्सा नहीं लेंगे। हमारा किसान आंदोलन अलग से चलेगा और 26 व 27 नवंबर को दिल्ली कूच के लिए गांवों में जनसंपर्क चलाया जाएगा।
-जसबीर सिंह भाटी, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान संगठन।