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Sirsa News: अवैध होर्डिंग को लेकर प्रशासन सख्त, होगी कार्रवाई, सरकारी साइटों पर लगे निजी होर्डिंग
Fri, 05 Apr 2024 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 05 Apr 2024 11:27 PM IST
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सरकारी साइटों पर लगे अवैध होर्डिंग।
सिरसा। लोकसभा चुनावों को लेकर आचार संहिता लगी हुई है। अवैध होर्डिंग व फ्लेक्स बोर्ड को लेकर नगर परिषद नियमित रूप से कार्रवाई कर रही है। सरकारी यूनिपोल पर मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए होर्डिंग व बैनर लगाए जा रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग मतदान के लिए पहुंचे। वहीं शहर में बिजली के खंबों पर अवैध होर्डिंग व बैनर लगाने से फ्लेक्स प्रिंटिंग वाले बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में इन अवैध होर्डिंग बोर्ड लगाने वाले फ्लेक्स प्रिंट वालों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई का मन बना लिया है।
यह शहर की सुंदरता को खराब करने में लगे हुए है। शहर की दीवारों पर पोस्टर लगाकर गंदा किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन दीवारों पर जिन कंपनियों व संस्थान की ओर से विज्ञापन प्रकाशित करवाया गया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पोस्टर बनाने वाली एजेंसी पर भी प्रशासन कार्रवाई करेगा।
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उपायुक्त ने दिए थे निर्देश
बता दें कि उपायुक्त आरके सिंह ने फ्लेक्स प्रिंटर वालों को विशेष निर्देश दिए थे कि फ्लेक्स व प्रिंटर वाले होर्डिंग व बैनर पर अपने कंपनी का नाम और मोबाइल नंबर देंगे। भले ही यह आदेश आचार संहिता के अनुरूप लागू किए गए थे। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार नियमित रूप से यह नियम है कि एजेंसी अपना नाम जारी करेगी।
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नगर परिषद को इतना हुआ नुकसान
नगर परिषद के पास होर्डिंग साइट - 30
नगर परिषद का अंतिम बार टेंडर हुआ - 3 साल पहले
नगर परिषद की सालाना आय होती थी-- 45 लाख रुपये
नगर परिषद को नुकसान हुआ - 1 करोड़ 25 लाख रुपये
अवैध होर्डिंग कैसे शहर में लगे
सरकारी होर्डिंगों पर फ्लेक्स और होर्डिंग एजेंसियों ने कैसे लगा दिए। यह एक बड़ा सवाल है। इसको लेकर कोई अधिकारी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहना चाहता है। वह चाहे बड़े स्तर के अधिकारी हो या छोटे अधिकारी हो। नगर परिषद के कुछ कर्मचारियों व कांग्रेस नेता वेद भाट ने बताया कि अवैध होर्डिंग में सभी मिले हुए हैं। राजनेताओं से लेकर अधिकारियों तक की सिफारिशें होर्डिंग को लेकर आती हैं। यही कारण है कि आज तक होर्डिंग का टेंडर नहीं हुआ। एजेंसियां भी इसलिए ही टेंडर नहीं लगाती कि पूरे शहर में अवैध होर्डिंग व बैनर लगते हैं। आज भी कई चौकों की दुकानों पर बड़े-बड़े कॉमर्शियल होर्डिंग नजर आते हैं।
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स्टाफ की कमी से नहीं हो पा रही कार्रवई
अधिकारियों के अनुसार अवैध होर्डिंग को सख्त कदम के लिए इंफोस्मेंट विंग की जरूरत होती है। एक स्पेशल टीम गठित होती है जिसका कार्य यही होता है। नगर परिषद के पास इतना स्टॉफ नहीं होता है। ऐसे में ठोस कार्रवाई होने में कमी रह जाती है और अवैध होर्डिंग वाले इसी का लाभ उठाते हैं।
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अवैध होर्डिंग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर में देखने को मिलता है कि दीवारों पर पोस्टर ही पोस्टर लगा दिए जाते हैं। लोगों व एजेंसी वालों को समझाना होगा कि शहर उनका अपना है। इसलिए शहर की सुंदरता को खराब न करें।
सुरेंद्र बैनीवाल, जिला नगर आयुक्त
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यह शहर की सुंदरता को खराब करने में लगे हुए है। शहर की दीवारों पर पोस्टर लगाकर गंदा किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन दीवारों पर जिन कंपनियों व संस्थान की ओर से विज्ञापन प्रकाशित करवाया गया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पोस्टर बनाने वाली एजेंसी पर भी प्रशासन कार्रवाई करेगा।
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उपायुक्त ने दिए थे निर्देश
बता दें कि उपायुक्त आरके सिंह ने फ्लेक्स प्रिंटर वालों को विशेष निर्देश दिए थे कि फ्लेक्स व प्रिंटर वाले होर्डिंग व बैनर पर अपने कंपनी का नाम और मोबाइल नंबर देंगे। भले ही यह आदेश आचार संहिता के अनुरूप लागू किए गए थे। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार नियमित रूप से यह नियम है कि एजेंसी अपना नाम जारी करेगी।
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नगर परिषद को इतना हुआ नुकसान
नगर परिषद के पास होर्डिंग साइट - 30
नगर परिषद का अंतिम बार टेंडर हुआ - 3 साल पहले
नगर परिषद की सालाना आय होती थी
नगर परिषद को नुकसान हुआ - 1 करोड़ 25 लाख रुपये
अवैध होर्डिंग कैसे शहर में लगे
सरकारी होर्डिंगों पर फ्लेक्स और होर्डिंग एजेंसियों ने कैसे लगा दिए। यह एक बड़ा सवाल है। इसको लेकर कोई अधिकारी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहना चाहता है। वह चाहे बड़े स्तर के अधिकारी हो या छोटे अधिकारी हो। नगर परिषद के कुछ कर्मचारियों व कांग्रेस नेता वेद भाट ने बताया कि अवैध होर्डिंग में सभी मिले हुए हैं। राजनेताओं से लेकर अधिकारियों तक की सिफारिशें होर्डिंग को लेकर आती हैं। यही कारण है कि आज तक होर्डिंग का टेंडर नहीं हुआ। एजेंसियां भी इसलिए ही टेंडर नहीं लगाती कि पूरे शहर में अवैध होर्डिंग व बैनर लगते हैं। आज भी कई चौकों की दुकानों पर बड़े-बड़े कॉमर्शियल होर्डिंग नजर आते हैं।
स्टाफ की कमी से नहीं हो पा रही कार्रवई
अधिकारियों के अनुसार अवैध होर्डिंग को सख्त कदम के लिए इंफोस्मेंट विंग की जरूरत होती है। एक स्पेशल टीम गठित होती है जिसका कार्य यही होता है। नगर परिषद के पास इतना स्टॉफ नहीं होता है। ऐसे में ठोस कार्रवाई होने में कमी रह जाती है और अवैध होर्डिंग वाले इसी का लाभ उठाते हैं।
अवैध होर्डिंग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर में देखने को मिलता है कि दीवारों पर पोस्टर ही पोस्टर लगा दिए जाते हैं। लोगों व एजेंसी वालों को समझाना होगा कि शहर उनका अपना है। इसलिए शहर की सुंदरता को खराब न करें।
सुरेंद्र बैनीवाल, जिला नगर आयुक्त