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Sirsa News: क्रियात्मक अनुसंधान से शिक्षण प्रक्रिया में होता है निरंतर सुधार
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सिरसा। नेशनल कॉलेज ऑफ एजुकेशन महाविद्यालय में रिसर्च कमेटी की ओर से विस्तार व्याख्यान का आयोजन करवाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षण अभ्यास में जाने से पहले प्रभावी शिक्षण कौशल एवं क्रियात्मक अनुसंधान संबंधी जानकारी प्रदान करना रहा। इस कार्यक्रम में एमएम कॉलेज की प्राचार्या डॉ. जनक रानी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।
उन्होंने बताया कि क्रियात्मक अनुसंधान विद्यार्थियों को अपनी शिक्षण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार करने का अवसर प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को क्रियात्मक अनुसंधान की अवधारणा, उसकी प्रक्रिया तथा शिक्षण प्रशिक्षण में उसके व्यावहारिक महत्व से परिचित कराना था। उन्होंने कहा कि यह शिक्षक के लिए निरंतर सुधार का एक सशक्त उपकरण है।
इसके माध्यम से वह शिक्षण प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक ढंग से हल कर सकता है। उन्होंने क्रियात्मक अनुसंधान के चरणों-समस्या की पहचान, योजना निर्माण, क्रियान्वयन, अवलोकन व चिंतन पर विस्तार से चर्चा कर कई व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
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इसके पश्चात उन्होंने छात्रध्यापकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि प्रभावी शिक्षण के लिए शिक्षक का संप्रेषण कौशल, प्रश्न पूछने की कला, शिक्षा प्रबंधन व छात्रों की जरूरतों को समझना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ साथ उन्होंने किसी भी विषय को पढ़ाने के लिए शिक्षण सामग्री का कैसे प्रयोग करना है, से संबंधित जानकारी दी।
प्रश्न सत्र के दौरान विद्यार्थियों के प्रश्नों का निदान भी किया गया। यह विस्तार व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। अंत में कॉलेज प्राचार्या डॉ. पूनम मिगलानी ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न देकर धन्यवाद किया। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन इंचार्ज कुसुमलता की ओर से करवाया गया।
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उन्होंने बताया कि क्रियात्मक अनुसंधान विद्यार्थियों को अपनी शिक्षण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार करने का अवसर प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को क्रियात्मक अनुसंधान की अवधारणा, उसकी प्रक्रिया तथा शिक्षण प्रशिक्षण में उसके व्यावहारिक महत्व से परिचित कराना था। उन्होंने कहा कि यह शिक्षक के लिए निरंतर सुधार का एक सशक्त उपकरण है।
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इसके माध्यम से वह शिक्षण प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक ढंग से हल कर सकता है। उन्होंने क्रियात्मक अनुसंधान के चरणों-समस्या की पहचान, योजना निर्माण, क्रियान्वयन, अवलोकन व चिंतन पर विस्तार से चर्चा कर कई व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
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इसके पश्चात उन्होंने छात्रध्यापकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि प्रभावी शिक्षण के लिए शिक्षक का संप्रेषण कौशल, प्रश्न पूछने की कला, शिक्षा प्रबंधन व छात्रों की जरूरतों को समझना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ साथ उन्होंने किसी भी विषय को पढ़ाने के लिए शिक्षण सामग्री का कैसे प्रयोग करना है, से संबंधित जानकारी दी।
प्रश्न सत्र के दौरान विद्यार्थियों के प्रश्नों का निदान भी किया गया। यह विस्तार व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। अंत में कॉलेज प्राचार्या डॉ. पूनम मिगलानी ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न देकर धन्यवाद किया। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन इंचार्ज कुसुमलता की ओर से करवाया गया।