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डेरा और आसपास के तीन गांवों में जारी रहा कर्फ्यू
Updated Wed, 30 Aug 2017 12:16 AM IST
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डेरा और आसपास के तीन गांवों में जारी रहा कर्फ्यू
सेना ने डाला हुआ है दोनों डेरा के आगे डेरा
कालोनियों के बाहर बिछाई कटीले तारों की बाड़
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
एक ओर जहां सिरसा शहर में मंगलवार को सुबह सात बजे से लेकर शाम सात बजे तक कर्फ्यू में ढील रही वहीं शाह सतनाम चौक से लेकर नया डेरा तक और उसके आसपास के गांव नेजिया, बेगू और बाजेकां में कर्फ्यू जारी रहा। सेना ने दोनों डेरा के बाहर डेरा डाला हुआ है। डेरा से बाहर आने वाले श्रद्धालुओं को रोडवेज बसों के द्वारा बस स्टैंड तक पहुंचाया जा रहा है। मंगलवार को करीब 650 लोग डेरा और आसपास की कॉलोनियाें से बाहर आए।
शाह सतनाम चौक पर कीर्तिनगर पुलिस चौकी के सामने सबसे पहला नाका लगाया हुआ है। पिछले दो दिन से इस नाके की कमान सीआरपीएफ के जवानों के हाथों में है। साथ ही हरियाणा पुलिस भी लगी हुई। पुलिस ने इस ओर की आवाजाही पूरी तरह से बंद की गई है। यही से कर्फ्यू की हद शुरू होती है। इससे 100 मीटर आगे जगदंबा पेपर मिल से पहले बड़ा नाका लगाया हुआ है। जिसे भेद पाना उपद्रवियों के लिए आसान नहीं है। वहां पर हरियाणा पुलिस, महिला और पुरुष, सीआरपीएफ, सेना के जवान और आरएएफ के जवान तैनात हैं। शाह सतनाम चौक से बड़ा नाका तक की सुरक्षा में आईटीबीपी के जवान लगे हुए हैैं। इससे आगे परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। आगे की कमान सेना के हाथों में है। पुराना डेरा के आगे सेना के जवान तैनात हैं। पुराना डेरा से लेकर बेगू गांव तक सेना के जवान हैं। बेगू से नया डेरा और नेजिया नाका तक सेना ने पूरी तरह से कमान संभाली हुई है। डेरा के आगे सेना की मूवमेंट ही डेरा में रह रहे लोगों में दहशत पैदा कर रही है और लोग डेरा से बाहर निकलकर आ रहे है। शासन की ओर से जैसे ही इशारा मिलेगा सेना सर्चिंग आपरेशन शुरू कर देगी। हालांकि उपायुक्त प्रभजोत सिंह और एसपी अश्विन शैणवी साफ कर चुके हैं कि सेना की डेरा में जाने की कोई योजना नहीं है।
उधर, डेरा से श्रद्धालुओं का पलायन मंगलवार को भी जारी रहा। डेरा और आसपास की क ॉलोनी में आकर ठहरे करीब 650 श्रद्धालुओं को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। प्रशासन की ओर से डेरा से निकलने गए श्रद्धालुओं को बसों के माध्यम से चौपटा पहुंचाया गया था। जहां पर इन प्रेमियों की तलाशी ली गई और उनकी छंटनी गई। जो श्रद्धालु सरदूलगढ़, नोहर-भादरा, फतेहाबाद अथवा डबवाली की ओर जाना चाहते थे, उन्हें चोपटा से बस सेवाएं मुहैया करवाई गई। डेरा से चोपटा तक फ्री बस सेवा प्रदान की गई। चोपटा से अपने गंतव्य तक का किराया श्रद्धालुओं को स्वयं वहन करना पड़ा। सुरक्षा के दृष्टिगत प्रशासन की ओर से चोपटा को सेंटर बनाया गया था।
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सत्संग के बहाने बुलाया, कहा बाबा खुद प्रसाद देंगे
डेरा से बाहर आए श्रद्धालुओं में अधिकतर अबोहर, टोहना, कैथल सूरतगढ़ और अनूपगढ़ के थे। अधिकतर का कहना है कि उन्हें उनके ब्लाक भंगीदास ने कहा था कि 25 अगस्त को सिरसा में बड़ा सत्संग है। जिसके चलते वे सिरसा पहुंचे। शुक्रवार शाम तक उनसे कहा गया कि डेरा प्रमुख देर से सत्संग शुरू करंगे। उन्हें कुछ नहीं बताया। बाद में कहा गया कि बाबा उन्हें खुद प्रसाद देंगे। पर बाद में उन्हें पता चला कि बाहर दंगा फसाद हो रहा है। वे डर के मारे में बाहर नहीं आर पर बाद में सब कुछ शांत होने पर वे बाहर आए। पहले उन्हें रोका गया था पर इस बार उन्हें किसी ने नहीं रोका।
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सेना ने डाला हुआ है दोनों डेरा के आगे डेरा
कालोनियों के बाहर बिछाई कटीले तारों की बाड़
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
एक ओर जहां सिरसा शहर में मंगलवार को सुबह सात बजे से लेकर शाम सात बजे तक कर्फ्यू में ढील रही वहीं शाह सतनाम चौक से लेकर नया डेरा तक और उसके आसपास के गांव नेजिया, बेगू और बाजेकां में कर्फ्यू जारी रहा। सेना ने दोनों डेरा के बाहर डेरा डाला हुआ है। डेरा से बाहर आने वाले श्रद्धालुओं को रोडवेज बसों के द्वारा बस स्टैंड तक पहुंचाया जा रहा है। मंगलवार को करीब 650 लोग डेरा और आसपास की कॉलोनियाें से बाहर आए।
शाह सतनाम चौक पर कीर्तिनगर पुलिस चौकी के सामने सबसे पहला नाका लगाया हुआ है। पिछले दो दिन से इस नाके की कमान सीआरपीएफ के जवानों के हाथों में है। साथ ही हरियाणा पुलिस भी लगी हुई। पुलिस ने इस ओर की आवाजाही पूरी तरह से बंद की गई है। यही से कर्फ्यू की हद शुरू होती है। इससे 100 मीटर आगे जगदंबा पेपर मिल से पहले बड़ा नाका लगाया हुआ है। जिसे भेद पाना उपद्रवियों के लिए आसान नहीं है। वहां पर हरियाणा पुलिस, महिला और पुरुष, सीआरपीएफ, सेना के जवान और आरएएफ के जवान तैनात हैं। शाह सतनाम चौक से बड़ा नाका तक की सुरक्षा में आईटीबीपी के जवान लगे हुए हैैं। इससे आगे परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। आगे की कमान सेना के हाथों में है। पुराना डेरा के आगे सेना के जवान तैनात हैं। पुराना डेरा से लेकर बेगू गांव तक सेना के जवान हैं। बेगू से नया डेरा और नेजिया नाका तक सेना ने पूरी तरह से कमान संभाली हुई है। डेरा के आगे सेना की मूवमेंट ही डेरा में रह रहे लोगों में दहशत पैदा कर रही है और लोग डेरा से बाहर निकलकर आ रहे है। शासन की ओर से जैसे ही इशारा मिलेगा सेना सर्चिंग आपरेशन शुरू कर देगी। हालांकि उपायुक्त प्रभजोत सिंह और एसपी अश्विन शैणवी साफ कर चुके हैं कि सेना की डेरा में जाने की कोई योजना नहीं है।
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उधर, डेरा से श्रद्धालुओं का पलायन मंगलवार को भी जारी रहा। डेरा और आसपास की क ॉलोनी में आकर ठहरे करीब 650 श्रद्धालुओं को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। प्रशासन की ओर से डेरा से निकलने गए श्रद्धालुओं को बसों के माध्यम से चौपटा पहुंचाया गया था। जहां पर इन प्रेमियों की तलाशी ली गई और उनकी छंटनी गई। जो श्रद्धालु सरदूलगढ़, नोहर-भादरा, फतेहाबाद अथवा डबवाली की ओर जाना चाहते थे, उन्हें चोपटा से बस सेवाएं मुहैया करवाई गई। डेरा से चोपटा तक फ्री बस सेवा प्रदान की गई। चोपटा से अपने गंतव्य तक का किराया श्रद्धालुओं को स्वयं वहन करना पड़ा। सुरक्षा के दृष्टिगत प्रशासन की ओर से चोपटा को सेंटर बनाया गया था।
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सत्संग के बहाने बुलाया, कहा बाबा खुद प्रसाद देंगे
डेरा से बाहर आए श्रद्धालुओं में अधिकतर अबोहर, टोहना, कैथल सूरतगढ़ और अनूपगढ़ के थे। अधिकतर का कहना है कि उन्हें उनके ब्लाक भंगीदास ने कहा था कि 25 अगस्त को सिरसा में बड़ा सत्संग है। जिसके चलते वे सिरसा पहुंचे। शुक्रवार शाम तक उनसे कहा गया कि डेरा प्रमुख देर से सत्संग शुरू करंगे। उन्हें कुछ नहीं बताया। बाद में कहा गया कि बाबा उन्हें खुद प्रसाद देंगे। पर बाद में उन्हें पता चला कि बाहर दंगा फसाद हो रहा है। वे डर के मारे में बाहर नहीं आर पर बाद में सब कुछ शांत होने पर वे बाहर आए। पहले उन्हें रोका गया था पर इस बार उन्हें किसी ने नहीं रोका।