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जिले के आठ हाई स्कूल और दो मिडिल स्कूल अपग्रेड
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सिरसा। शिक्षा विभाग की ओर से जिले के दस स्कूलों को अपग्रेड कर दिया गया है, जिनमें आठ हाई स्कूल और दो मिडिल स्कूल हैं। इन स्कूलों में गांव अरनियांवाली का मैट्रिक स्कूल सीनियर सेकेंडरी, जीएचएस ओटू को सीनियर सेकेंडरी, जीएचएस झोरडरोही को भी सीनियर सेकेंडरी बनाया गया है। इसके अलावा जीएचएस चोरमार खेड़ा, जीएचएस नकौड़ा, जीएचएस मटदादू, जीएचएस ममेरा कलां, जीएचएस जलालआना, जीएमएस नीमला मिडिल से सीनियर सेकेंडरी, जीएमएस नटार मिडिल से सीनियर सेकेंडरी शामिल है। स्कूलों के अपग्रेड होने पर संबंधित गांवों के ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने खुशी जताई है।
वहीं गांव अरनियांवाली की ग्राम पंचायत व ग्रामीणों की मेहनत आखिरकार रंग ले ही आई। पिछले करीब 19 सालों से गांव में चल रहा मैट्रिक का स्कूल अब विभाग की ओर से 12वीं तक कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों में खुशी है। ग्रामीणों ने स्कूल के अपग्रेड होने की खुशी में स्कूल में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पूर्व मैट्रिक तक स्कूल होने के कारण वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित थे। खासकर लड़कियों की शिक्षा को लेकर, क्योंकि आसपास कोई स्कूल नहीं होने के कारण उन्हें शिक्षा के लिए सिरसा जाना पड़ता था। सिरसा जाने के लिए गांव में आवागमन के साधन भी पर्याप्त नहीं थे, जिससे समस्या और भी विकट थी। अधिकतर लड़कियां तो अपनी पढ़ाई भी आगे नहीं बढ़ा पाती थी।
इन गांवों के लोग भी आते थे पहले स्कूल में पढ़ने
गांव के बड़े बुजुर्गों ने बताया कि गांव में वर्ष 1954 में 8वीं तक के स्कूल का निर्माण किया गया था। तब से लेकर 2000 तक 8वीं तक का स्कूल चलता रहा। इसके बाद 2000 में इनेलो सरकार में स्कूल को अपग्रेड कर मैट्रिक तक का कर दिया गया। 2000 से लेकर अब तक स्कूल मैट्रिक तक का ही चल रहा था। गांव के सरपंच प्रदीप कुमार व समस्त ग्रामीण स्कूल के अपग्रेडेशन को लेकर पिछले दो सालों से लगातार प्रयासरत थे। आखिरकार उनकी प्रयास रंग लाया और विभाग ने स्कूल को अपग्रेड कर 12वीं तक कर दिया है, जोकि ग्रामीणों के लिए खुशी की बात है। ग्रामीणों ने बताया कि किसी समय में गांव के स्कूल में निर्बाण, दड़बा कलां, रूपाणा, रंधावा, बकरियांवाली, गुडियाखेड़ा, धिंगतानियां सहित करीब दर्जनों गांवों से बच्चे पढ़ने के लिए आते थे।
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ये बोले सरपंच:
गांव के सरपंच प्रदीप कुमार ने बताया कि ग्रामीणों के लिए स्कूल अपग्रेडेशन की मांग सबसे महत्वपूर्ण थी। क्योंकि स्कूल अपग्रेडेशन न होने के कारण खासकर लड़कियां अपनी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ा पाती थी। पिछले दो सालों से वे ग्रामीणों के सहयोग से इसी प्रयास में लगे हुए थे। आखिरकार उनका प्रयास रंग लाया और विभाग ने स्कूल को अपग्रेडेशन करने का पत्र जारी कर दिया, जोकि ग्रामीणों के साथ-साथ शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए भी अच्छी खबर है।
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वहीं गांव अरनियांवाली की ग्राम पंचायत व ग्रामीणों की मेहनत आखिरकार रंग ले ही आई। पिछले करीब 19 सालों से गांव में चल रहा मैट्रिक का स्कूल अब विभाग की ओर से 12वीं तक कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों में खुशी है। ग्रामीणों ने स्कूल के अपग्रेड होने की खुशी में स्कूल में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पूर्व मैट्रिक तक स्कूल होने के कारण वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित थे। खासकर लड़कियों की शिक्षा को लेकर, क्योंकि आसपास कोई स्कूल नहीं होने के कारण उन्हें शिक्षा के लिए सिरसा जाना पड़ता था। सिरसा जाने के लिए गांव में आवागमन के साधन भी पर्याप्त नहीं थे, जिससे समस्या और भी विकट थी। अधिकतर लड़कियां तो अपनी पढ़ाई भी आगे नहीं बढ़ा पाती थी।
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इन गांवों के लोग भी आते थे पहले स्कूल में पढ़ने
गांव के बड़े बुजुर्गों ने बताया कि गांव में वर्ष 1954 में 8वीं तक के स्कूल का निर्माण किया गया था। तब से लेकर 2000 तक 8वीं तक का स्कूल चलता रहा। इसके बाद 2000 में इनेलो सरकार में स्कूल को अपग्रेड कर मैट्रिक तक का कर दिया गया। 2000 से लेकर अब तक स्कूल मैट्रिक तक का ही चल रहा था। गांव के सरपंच प्रदीप कुमार व समस्त ग्रामीण स्कूल के अपग्रेडेशन को लेकर पिछले दो सालों से लगातार प्रयासरत थे। आखिरकार उनकी प्रयास रंग लाया और विभाग ने स्कूल को अपग्रेड कर 12वीं तक कर दिया है, जोकि ग्रामीणों के लिए खुशी की बात है। ग्रामीणों ने बताया कि किसी समय में गांव के स्कूल में निर्बाण, दड़बा कलां, रूपाणा, रंधावा, बकरियांवाली, गुडियाखेड़ा, धिंगतानियां सहित करीब दर्जनों गांवों से बच्चे पढ़ने के लिए आते थे।
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ये बोले सरपंच:
गांव के सरपंच प्रदीप कुमार ने बताया कि ग्रामीणों के लिए स्कूल अपग्रेडेशन की मांग सबसे महत्वपूर्ण थी। क्योंकि स्कूल अपग्रेडेशन न होने के कारण खासकर लड़कियां अपनी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ा पाती थी। पिछले दो सालों से वे ग्रामीणों के सहयोग से इसी प्रयास में लगे हुए थे। आखिरकार उनका प्रयास रंग लाया और विभाग ने स्कूल को अपग्रेडेशन करने का पत्र जारी कर दिया, जोकि ग्रामीणों के साथ-साथ शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए भी अच्छी खबर है।