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धान के अवशेषों में आगजनी की 14 लोकेशन मिली, 285 पर पहुंचा एक्यूआई
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रात के समय धान के अवशेषों में लगाई गई आग
- फोटो : Sirsa
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सिरसा। किसान गेहूं की बिजाई के लिए धान के अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं। हरसेक द्वारा रविवार को आग लगी होने की 14 जगह चिह्नित की गई। कृृषि विभाग की टीमें इन गहों पर जाकर जांच करने में जुटी हुई है। वहीं विभाग की ओर से अब तक 39 किसानों के चालान काटे गए हैं। इन किसानों पर एक लाख 7 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं गांव के पूर्व सरपंचों और कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। धान के अवशेषों से निकलने वाला जहरीला धुआं स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है। जिले में एयर क्वालिटी इंडेक्स अब 285 तक पहुंच गया है।
दिवाली के दिन जिले का एक्यूआई 470 के पास पहुंच गया था। बीते चार दिनों में एक्यूआई लेवल में गिरावट तो आई लेकिन इस गिरावट से भी एक्यूआई लेवल खतरे के निशान पर चल रहा है। एक्यूआई लेवल खतरे का होने पर सांस लेने वाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। वहीं किसानों ने तेजी से धान के अवशेषों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया है। जुर्माने से बचने के लिए अधिकतर किसान रात के समय धान के अवशेषों को आग लगा रहे है। वहीं रात सर्द होने के चलते अवशेषों से निकलने वाला धुआं आसमान की ओर ना जाकर निचली स्तह पर ही फैल जाता है जिससे पारदर्शिता कम हो जाती है।
अवशेष प्रबंधन के समय को बचाने के लिए कर रहे है आग के हवाले
फसल अवशेषों को जमीन में सीधे ही समावेश करने की प्रक्रिया सरल है, परंतु इसमें कुछ कठिनाइयां भी हैं। जैसे दो फसलों के बीच का अंतर कम होना। अवशेषों को जमीन में मिलाने के लिए समय लगता है। ऐसे में किसान धान के अवशेषों को आग लगाकर नष्ट कर रहा है। ताकि समय रहते वह रबी फसलों की बिजाई कर सके।
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धान के अवशेषों को जलाने वाले किसानों पर हरसेक के माध्यम से नजर रखी जा रही है। लोकेशन मिलने पर टीम जांच के लिए भी जा रही है। किसान धान के अवशेषों को भूमि में दबाएं ताकि भूूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहे।
-डॉ. बाबूलाल, उपनिदेशक, कृषि विभाग सिरसा।
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दिवाली के दिन जिले का एक्यूआई 470 के पास पहुंच गया था। बीते चार दिनों में एक्यूआई लेवल में गिरावट तो आई लेकिन इस गिरावट से भी एक्यूआई लेवल खतरे के निशान पर चल रहा है। एक्यूआई लेवल खतरे का होने पर सांस लेने वाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। वहीं किसानों ने तेजी से धान के अवशेषों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया है। जुर्माने से बचने के लिए अधिकतर किसान रात के समय धान के अवशेषों को आग लगा रहे है। वहीं रात सर्द होने के चलते अवशेषों से निकलने वाला धुआं आसमान की ओर ना जाकर निचली स्तह पर ही फैल जाता है जिससे पारदर्शिता कम हो जाती है।
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अवशेष प्रबंधन के समय को बचाने के लिए कर रहे है आग के हवाले
फसल अवशेषों को जमीन में सीधे ही समावेश करने की प्रक्रिया सरल है, परंतु इसमें कुछ कठिनाइयां भी हैं। जैसे दो फसलों के बीच का अंतर कम होना। अवशेषों को जमीन में मिलाने के लिए समय लगता है। ऐसे में किसान धान के अवशेषों को आग लगाकर नष्ट कर रहा है। ताकि समय रहते वह रबी फसलों की बिजाई कर सके।
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धान के अवशेषों को जलाने वाले किसानों पर हरसेक के माध्यम से नजर रखी जा रही है। लोकेशन मिलने पर टीम जांच के लिए भी जा रही है। किसान धान के अवशेषों को भूमि में दबाएं ताकि भूूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहे।
-डॉ. बाबूलाल, उपनिदेशक, कृषि विभाग सिरसा।

नेशनल हाईवे पर छाई हल्की स्मॉग- फोटो : Sirsa