फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   किसानों ने पैसे इकट्ठे कर खुद ही उठाया खालों की मरम्मत का बीड़ा

किसानों ने पैसे इकट्ठे कर खुद ही उठाया खालों की मरम्मत का बीड़ा

Sat, 07 Oct 2017 01:47 AM IST
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:47 AM IST
विज्ञापन
किसानों ने पैसे इकट्ठे कर खुद ही उठाया खालों की मरम्मत का बीड़ा
--विभाग बोला, कमेटी करवाएगी नालियों की मरम्मत
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
ओढां।
बड़ागुढा खंड के गांव अलीकां में नहरी एवं सिंचाई विभाग की कार्य प्रणाली से खफा किसानों ने अपने स्तर पर नालियों (खालों) की मरम्मत का बीड़ा उठाया है। किसानों का कहना है कि खालों की हालत जर्जर होने के कारण उनके खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा जिसके चलते रकबा क्षेत्र के किसानाें ने पैसे एकत्र कर मजबूरन खालों की मुरम्मत का कार्य चलाना पड़ा। किसानों ने विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार अवगत करवाने के बावजूद अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
शेखूपुरा माइनर के मोघों के नीचे पड़ने वाले रकबा क्षेत्र में जो पूर्व में खाल बने हुए हैं वे जगह-जगह से लिकेज होेने के कारण बार-बार टूटते रहते हैं। इससे उनके खेतों में पानी नहीं पहुंच पाता। 17025 मोघा के अधीनस्थ पड़ने वाले किसान श्यामलाल, बंसीलाल, राजू सिंह, निशान सिंह, जयदयाल व हरदेव सिंह आदि ने बताया कि उनका रकबा जिस खाल से सिंचित होता है वह खाल काफी पुराना हो चुका है और उसका अंदरूनी व बाहरी हिस्सा जगह-जगह से लिकेज होने से खाल टूटता रहता है। इसके चलते उनके खेतों में ठीक तरह से पानी नहीं पहुंच पाता। उक्त किसानों ने बताया कि उन्होंने इस बारे विभाग को कई बार अवगत करवा दिया लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया। इस विभागीय अनदेखी के चलते उक्त किसानों ने रकबा क्षेत्र के अनुसार पैसे एकत्र कर अपने स्तर पर खाल की मुरम्मत करने का कार्य शुरू किया है।
विज्ञापन

विभाग के भरोसे नहीं छोड़ सकते काम
वहीं मोघा नंबर 10108 के अधीन पड़ने वाले अलीकां, भीमां, थराज व पंजुआना के किसान राजू ग्रोवर, हंसराज, बलविंद्र सिंह, मक्खन सिंह आदि का कहना है कि उनके खाल की भी हालत अति जर्जर है। जिसके चलते उन्होंने भी रकबा के हिसाब से पैसे एकत्र कर मुरम्मत का कार्य शुरू किया है। उन्होंने बताया कि खरीफ की फसल तो जैसे-तैसे पूरी कर ली लेकिन अब रबी की फसल का समय आने वाला है इसलिए खाल की जर्जर हालत को विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


संबंधित विभाग ने कभी सुध नहीं ली
उधर मोघा नंबर 29 हजार के किसान बलविंद्र सिंह, हरबंस सिंह, निशान सिंह, लीला सिंह व टीटू सिंह ने बताया कि उनके खाल की विभाग ने कभी भी सुध नहीं ली। खाल जगह-जगह से टूटकर खरपतवार से अटा पड़ा है जिससे पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता। इसी प्रकार मोघा नंबर 23790 के अधीन पड़ने वाले किसान जगदीश कुमार काला सिंह भोला सिंह जगसीर सिंह ने भी खाल की जर्जर हालत पर विभाग को आड़े हाथों लेते हुए बताया कि विभाग के अधिकारी किसानों की खालों संबंधी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे जिसके चलते वे आर्थिक तंगी से जूझकर रह जाते हैं। वहीं मोघा नंबर 11385 नीचे सींचित होने वाली भूमि के काश्तकार मक्खन सिंह, गुरनेब सिंह, सीमा सिंह, लाभ सिंह, सोनू राम, रामेश्वर, सीरा सिंह आदि किसानों ने भी जर्जर खाल की दशा बताते हुए कहा कि खाल जगह-जगह से लीकेज होने के कारण पानी उनके खेतों तक नहीं पहुंच पाता। जिसके चलते उन्होंने भी पैसे इक ट्ठे कर खाल की मुरम्मत करने का कार्य शुरू किया है।

बॉक्स :-
हम नाबार्ड से पैसा लेकर खाल की मरम्मत या नया खाल बनाते हैं। उस समय 20 वर्ष के लिए एक कमेटी का गठन किया जाता है और कमेटी किसान से प्रति एकड़ के हिसाब से 50 रुपये लेती है। ये पैसा कमेटी के खाते में जमा होता है। 20 साल तक अगर खाल टूटता है तो नियमानुसार उस पैसे के ब्याज से ही खाल की मरम्मत करवाना होता है। विभाग खाल रिपेयर नहीं करवाता।
-डीके गर्ग, एसडीओ सब-डिवीजन पंजुआना
--------------------------------------------
फोटो :23: गांव अलीकां में जर्जर खाल का दृश्य
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed