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नगर परिषद की लापरवाही से लटका नंदीशाला का निर्माण
Updated Thu, 29 Mar 2018 01:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
नगर परिषद सिरसा के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कैटल फ्री सिरसा के मिशन को कामयाब करने के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी योजना को भी नगर परिषद के अधिकारियों की वजह से झटका लगा है। गांव केलनियां में नंदीशाला के निर्माण का कार्य पूरा होने की बजाय लटक गया है। नगर परिषद के ठेकेदार को जमानत राशि भी लौटा दी है। नंदीशाला के निर्माण के लिए फिर से टेंडर प्रक्रिया दोहराई जाएगी।
गौरतलब हो कि सिरसा शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए गांव केलनियां में नंदीशाला के निर्माण का फैसला लिया गया था। इस बारे में नगर परिषद की ओर से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था और इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया भी अपनाई। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने पर एक ठेकेदार ने ठेका भी हासिल कर लिया, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी ठेकेदार को डिजाइन ही मुहैया नहीं करवा पाएं और निर्माण कार्य समय पर शुरू ही नहीं हो पाया। नगर परिषद के अधिकारियों ने अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए ठेकेदार की जमानत राशि भी लौटा दी, जिसकी वजह से एक बार फिर नंदीशाला के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया दोहराई जाएगी।
एनआईटी से पास करवाना था डिजाइन
नंदीशाला के निर्माण के लिए स्थानीय निकाय विभाग द्वारा इस शर्त पर अनुमति दी गई थी कि नंदीशाला का डिजाइन और स्ट्रक्चर एनआईटी कुरुक्षेत्र से पास करवाकर किया जाए। नगर परिषद के अधिकारियों की यह जिम्मेवारी थी कि वे एनआईटी कुरुक्षेत्र से डिजाइन पास करवाते, लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने यहां पर लापरवाही बरती और एनआईटी से डिजाइन ही अप्रूव नहीं करवाया। बगैर डिजाइन अप्रूव किए निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता था। नप अधिकारियों ने यहां पर अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए ही टेंडर को कैंसिल करने का षड्यंत्र रचा और ठेकेदार की जमानत राशि लौटा दी। नियमानुसार काम न करने पर ठेकेदार की राशि जब्त कर ली जाती है।
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ठेकेदार को भी हुआ नुकसान
नंदीशाला का निर्माण करने के लिए ठेका लेने वाले ठेकेदार को भी नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से नुकसान झेलना पड़ा। उसने निर्माण कार्य के लिए मशीनरी और अन्य संसाधन जुटा लिए, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी काम शुरू नहीं करवा सकें। काम शुरू होने में देरी और निर्माण सामग्री महंगी होने से ठेकेदार को सीधे-सीधे नुकसान होने लगा। बताया जाता है कि इस मामले में ठेकेदार ने नगर परिषद के अधिकारियों को जब आड़े हाथ लिया, तब नगर परिषद के अधिकारियों ने ठेकेदार की जमानत राशि लौटाकर अपनी खाल बचाई।
जमानत राशि लौटाई : एमई
नगर परिषद के पालिका अभियंता राकेश पूनियां ने बताया कि ठेकेदार को जमानत राशि लौटा दी गई है। नंदीशाला के निर्माण के लिए टेक्निकल अप्रूवल नहीं आई है, फाइल स्थानीय निकाय विभाग के पास है। जब अप्रूवल आएगी, तब दोबारा टेंडर किए जाएंगे।
क्या है सिस्टम
नगर परिषद द्वारा किए जाने वाले कार्य के लिए सर्वप्रथम एस्टीमेट बनाया जाता है। नगर परिषद के अधिकारी ही एस्टीमेट तैयार करते हैं। एस्टीमेट को अप्रूवल के लिए स्थानीय निकाय विभाग को भेजा जाता है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा वर्क आर्डर दिया जाता है, जिस पर ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया जाता है। नंदीशाला के निर्माण के मामले में तमाम औपचारिकताएं नगर परिषद द्वारा की गई। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा नंदीशाला के डिजाइन और स्ट्रक्चर के लिए एनआईटी कुरुक्षेत्र से पास करवाने की शर्त रखी, जिसे नगर परिषद के अधिकारियों को पूरा करना था, लेकिन नप अधिकारियों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। परिणाम स्वरूप वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया। यदि ठेकेदार द्वारा वर्क आर्डर के बाद काम शुरू नहीं किया जाता, तब उसकी जमानत राशि जब्त की जा सकती थी। ठेकेदार की जमानत राशि वापस लौटाने का कोई प्रावधान नहीं होता, लेकिन इस मामले में चूंकि नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही रही, इसलिए उन्होंने ठेकेदार को पैसा लौटाने में ही अपनी भलाई समझी।
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सिरसा।
नगर परिषद सिरसा के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कैटल फ्री सिरसा के मिशन को कामयाब करने के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी योजना को भी नगर परिषद के अधिकारियों की वजह से झटका लगा है। गांव केलनियां में नंदीशाला के निर्माण का कार्य पूरा होने की बजाय लटक गया है। नगर परिषद के ठेकेदार को जमानत राशि भी लौटा दी है। नंदीशाला के निर्माण के लिए फिर से टेंडर प्रक्रिया दोहराई जाएगी।
गौरतलब हो कि सिरसा शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए गांव केलनियां में नंदीशाला के निर्माण का फैसला लिया गया था। इस बारे में नगर परिषद की ओर से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था और इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया भी अपनाई। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने पर एक ठेकेदार ने ठेका भी हासिल कर लिया, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी ठेकेदार को डिजाइन ही मुहैया नहीं करवा पाएं और निर्माण कार्य समय पर शुरू ही नहीं हो पाया। नगर परिषद के अधिकारियों ने अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए ठेकेदार की जमानत राशि भी लौटा दी, जिसकी वजह से एक बार फिर नंदीशाला के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया दोहराई जाएगी।
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एनआईटी से पास करवाना था डिजाइन
नंदीशाला के निर्माण के लिए स्थानीय निकाय विभाग द्वारा इस शर्त पर अनुमति दी गई थी कि नंदीशाला का डिजाइन और स्ट्रक्चर एनआईटी कुरुक्षेत्र से पास करवाकर किया जाए। नगर परिषद के अधिकारियों की यह जिम्मेवारी थी कि वे एनआईटी कुरुक्षेत्र से डिजाइन पास करवाते, लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने यहां पर लापरवाही बरती और एनआईटी से डिजाइन ही अप्रूव नहीं करवाया। बगैर डिजाइन अप्रूव किए निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता था। नप अधिकारियों ने यहां पर अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए ही टेंडर को कैंसिल करने का षड्यंत्र रचा और ठेकेदार की जमानत राशि लौटा दी। नियमानुसार काम न करने पर ठेकेदार की राशि जब्त कर ली जाती है।
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ठेकेदार को भी हुआ नुकसान
नंदीशाला का निर्माण करने के लिए ठेका लेने वाले ठेकेदार को भी नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से नुकसान झेलना पड़ा। उसने निर्माण कार्य के लिए मशीनरी और अन्य संसाधन जुटा लिए, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी काम शुरू नहीं करवा सकें। काम शुरू होने में देरी और निर्माण सामग्री महंगी होने से ठेकेदार को सीधे-सीधे नुकसान होने लगा। बताया जाता है कि इस मामले में ठेकेदार ने नगर परिषद के अधिकारियों को जब आड़े हाथ लिया, तब नगर परिषद के अधिकारियों ने ठेकेदार की जमानत राशि लौटाकर अपनी खाल बचाई।
जमानत राशि लौटाई : एमई
नगर परिषद के पालिका अभियंता राकेश पूनियां ने बताया कि ठेकेदार को जमानत राशि लौटा दी गई है। नंदीशाला के निर्माण के लिए टेक्निकल अप्रूवल नहीं आई है, फाइल स्थानीय निकाय विभाग के पास है। जब अप्रूवल आएगी, तब दोबारा टेंडर किए जाएंगे।
क्या है सिस्टम
नगर परिषद द्वारा किए जाने वाले कार्य के लिए सर्वप्रथम एस्टीमेट बनाया जाता है। नगर परिषद के अधिकारी ही एस्टीमेट तैयार करते हैं। एस्टीमेट को अप्रूवल के लिए स्थानीय निकाय विभाग को भेजा जाता है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा वर्क आर्डर दिया जाता है, जिस पर ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया जाता है। नंदीशाला के निर्माण के मामले में तमाम औपचारिकताएं नगर परिषद द्वारा की गई। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा नंदीशाला के डिजाइन और स्ट्रक्चर के लिए एनआईटी कुरुक्षेत्र से पास करवाने की शर्त रखी, जिसे नगर परिषद के अधिकारियों को पूरा करना था, लेकिन नप अधिकारियों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। परिणाम स्वरूप वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया। यदि ठेकेदार द्वारा वर्क आर्डर के बाद काम शुरू नहीं किया जाता, तब उसकी जमानत राशि जब्त की जा सकती थी। ठेकेदार की जमानत राशि वापस लौटाने का कोई प्रावधान नहीं होता, लेकिन इस मामले में चूंकि नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही रही, इसलिए उन्होंने ठेकेदार को पैसा लौटाने में ही अपनी भलाई समझी।