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'सूचना नहीं हमें मिलती है तारीखें': हरियाणा में आरटीआई एक्टिविस्ट परेशान, राज्यपाल को देंगे मांग पत्र
Sun, 04 Oct 2026 03:11 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 04 Oct 2026 03:11 PM IST
सार
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने राज्य सूचना आयोग पर आरोप लगाया कि 30 दिन में दी जाने वाली सूचना के लिए कई बार वर्षों लग जाते हैं लेकिन सूचना नहीं मिल पाती।
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आरटीआई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
हरियाणा में सूचना का अधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने और राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रदेश के प्रमुख आरटीआई एक्टिविस्ट 12 अक्टूबर को राज्यपाल को मांग पत्र देंगे। राष्ट्रीय सूचना अधिकार दिवस पर विभिन्न जिलों के एक्टिविस्ट राज्यपाल के समक्ष अपनी मांगें रखेंगे।
राज्य सूचना आयोग पर लगाए आरोप
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं जन अभियान मंच के अध्यक्ष पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि राज्य सूचना आयोग सूचना हासिल करने में आवेदकों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत 30 दिन में दी जाने वाली सूचना के लिए भी आवेदकों को बार-बार तारीखें मिलती हैं और कई मामलों में वर्षों तक सूचना नहीं मिलती।
कपूर के अनुसार, कई मामलों में जन सूचना अधिकारी सूचना उपलब्ध नहीं कराते और प्रथम अपीलीय अधिकारी अपील की सुनवाई नहीं करते। इसके बाद राज्य सूचना आयोग में दायर दूसरी अपील भी लंबे समय तक लंबित रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार सरकारी दस्तावेजों को निजी सूचना बताकर जानकारी देने से इनकार किया जाता है।
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उनका आरोप है कि लंबित मामलों को खत्म करने के लिए कई दूसरी अपीलों को अपीलकर्ता की सुनवाई किए बिना ही प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास वापस भेज दिया जाता है। इससे आवेदक वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाता रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के आदेशों की प्रतियां महीनों तक नहीं मिलतीं और कई आदेश आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं किए जाते। एक्टिविस्टों ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्यपाल को मांग पत्र दिया जाएगा। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर सड़क पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
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राज्य सूचना आयोग पर लगाए आरोप
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं जन अभियान मंच के अध्यक्ष पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि राज्य सूचना आयोग सूचना हासिल करने में आवेदकों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत 30 दिन में दी जाने वाली सूचना के लिए भी आवेदकों को बार-बार तारीखें मिलती हैं और कई मामलों में वर्षों तक सूचना नहीं मिलती।
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कपूर के अनुसार, कई मामलों में जन सूचना अधिकारी सूचना उपलब्ध नहीं कराते और प्रथम अपीलीय अधिकारी अपील की सुनवाई नहीं करते। इसके बाद राज्य सूचना आयोग में दायर दूसरी अपील भी लंबे समय तक लंबित रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार सरकारी दस्तावेजों को निजी सूचना बताकर जानकारी देने से इनकार किया जाता है।
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उनका आरोप है कि लंबित मामलों को खत्म करने के लिए कई दूसरी अपीलों को अपीलकर्ता की सुनवाई किए बिना ही प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास वापस भेज दिया जाता है। इससे आवेदक वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाता रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के आदेशों की प्रतियां महीनों तक नहीं मिलतीं और कई आदेश आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं किए जाते। एक्टिविस्टों ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्यपाल को मांग पत्र दिया जाएगा। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर सड़क पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।