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Rohtak News: कुलदेवी शीतला माता की पूजा कर महिलाओं ने मांगी मन्नत
Tue, 18 Mar 2025 02:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 18 Mar 2025 02:16 AM IST
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17सीटीके16...शीतला माता मंदिर में माता रानी की पूजा करते श्रद्धालु। स्रोत: संवाद
शहर के माता दरवाजा स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में सोमवार को बासोड़ा पर्व मनाया गया। होली के बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। श्रद्धालु महिलाओं ने शीतला माता के दरबार व मंदिर के बाहर गुड़, चावल, नारियल व अन्य सामग्री अर्पित कर मन्नतें मांगी। इसके चलते मंदिर के अंदर व बाहर दिनभर चहल-पहल बनी रही।
होली के बाद सोमवार को शीतला माता मंदिर में बासोड़ा पूजन हुआ। मंदिर में अलसुबह ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं पूजन के लिए पहुंचना शुरू हो गईं। किसी ने बाहर चौराहे पर तो किसी ने अंदर मंदिर में माता के दरबार में प्रसाद चढ़ाया व ज्योत जगाई। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख शांति की कामना की। मंदिर में 84 गांवों के लोगों की श्रद्धा जुड़ी है। इसकी वजह शीतला माता का इन गांवों की कुलदेवी के रूप में पूजा जाना है।
मंदिर के महंत थानेश्वर दास ने बताया बासोड़ा की पूर्व संध्या पर पूड़े, गुलगुले, मीठे चावल, दलिया और मीठी रोटी बनाई जाती है। इसके अगले दिन सुबह इनका भोग लगाया जाता है। होली के बाद सोमवार को यह पहला मेला रहा। अब मंगलवार को दोबारा से भोजन बनाया जाएगा व मंगलवार रात 12 बजे के बाद से बुधवार दोपहर 2 बजे तक माता की पूजा होगी।
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होली के बाद सोमवार को शीतला माता मंदिर में बासोड़ा पूजन हुआ। मंदिर में अलसुबह ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं पूजन के लिए पहुंचना शुरू हो गईं। किसी ने बाहर चौराहे पर तो किसी ने अंदर मंदिर में माता के दरबार में प्रसाद चढ़ाया व ज्योत जगाई। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख शांति की कामना की। मंदिर में 84 गांवों के लोगों की श्रद्धा जुड़ी है। इसकी वजह शीतला माता का इन गांवों की कुलदेवी के रूप में पूजा जाना है।
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मंदिर के महंत थानेश्वर दास ने बताया बासोड़ा की पूर्व संध्या पर पूड़े, गुलगुले, मीठे चावल, दलिया और मीठी रोटी बनाई जाती है। इसके अगले दिन सुबह इनका भोग लगाया जाता है। होली के बाद सोमवार को यह पहला मेला रहा। अब मंगलवार को दोबारा से भोजन बनाया जाएगा व मंगलवार रात 12 बजे के बाद से बुधवार दोपहर 2 बजे तक माता की पूजा होगी।
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