{"_id":"a8e86cd06a0cee11a1da80209843a241","slug":"woman-falls-from-moving-train-by-sliding-foot","type":"story","status":"publish","title_hn":" चलती ट्रेन में चढ़ते वक्त पैर फिसलने से महिला गिरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चलती ट्रेन में चढ़ते वक्त पैर फिसलने से महिला गिरी
रोहतक
Updated Tue, 17 Jun 2014 02:42 AM IST
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रोहतक जंक्शन पर चलती ट्रेन में चढ़ रही महिला का पैर फिसलने से दर्दनाक हादसा हो गया। महिला ट्रेन और प्लेटफार्म के बीच फंस गई और 600 मीटर तक घिसटती चली गई। हो-हल्ला सुन सब मदद के लिए दौड़े तो चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए। बुरी तरह से घायल महिला ट्रेन रुकने के बाद भी 25 मिनट तक फंसी रही।
स्टेशन पर अव्यवस्थाएं इतनी कि कटर तक नहीं मिला। हथौड़े से प्लेटफार्म तोड़कर ट्रेन के पायदान को खोला गया। तब जाकर महिला को निकाला जा सका। जिंदगी और मौत के बीच झूल रही महिला को पीजीआई ले जाया गया। देर रात तक वह ऑपरेशन थिएटर में ही भर्ती थी। महिला की हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना रोहतक जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक की है। सोमवार दोपहर बाद 3 बजकर 40 मिनट पर ईएमयू में दिल्ली निवासी नीलम शर्मा चढ़ रही थी। रोहतक निवासी उसकी भाभी अनीता शर्मा ट्रेन में पहले चढ़ चुकी थी, लेकिन नीलम के चढ़ पाने से पहले ही ट्रेन चल पड़ी। जैसे ही वह चढ़ने लगी तो अचानक उसका पैर फिसल गया।
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उसे अनीता ने पकड़ रखा था, इसलिए वह प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच में घिसटने लगी। लोगों ने शोर मचाया और जीआरपी के जवान भी दौड़े। प्लेटफार्म पर इंजन से आगे तक हलचल देख चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए तक वह करीब 600 मीटर दूर तक घिसटती आ चुकी थी।
ट्रेन रुकते ही महिला को निकालने का प्रयास शुरू हुआ, लेकिन वह बुरी तरह फंस गई। हथौड़ा लाकर प्लेटफार्म तोड़ा गया तो दूसरी तरफ ट्रेन का पायदान खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। 25 मिनट बाद लहूलुहान हालत में महिला को बाहर निकाल तत्काल पीजीआई ले जाया गया।
वहां देर रात तक उसका ऑपरेशन चल रहा था। बताया गया है कि हाथ-पैर तो ठीक हैं, लेकिन पीठ बुरी तरह कुचल चुकी है। रेलवे के चिकित्सक डॉ. बी. के. अरोड़ा ने मौके पर पहुंचकर घायल को प्राथमिक इलाज दिया।
दिल्ली निवासी 37 वर्षीय नीलम शर्मा पत्नी महेश शर्मा रोहतक आजाद नगर में अपनी भाभी अनीता शर्मा से मिलने आई थी। दोनों को दिल्ली जाना था। रेलवे जंक्शन पर पहुंची तो टिकट खिड़की पर भीड़ लगी थी। जब तक टिकट हाथ में आती ट्रेन ने सीटी मार दी। ट्रेन में अनीता पहले चढ़ गई।
नीलम भी दौड़ते हुए चढ़ने लगी, उसका हाथ अनीता ने पकड़ा ही था कि संतुलन बिगड़ गया। नीचे लटकने के बाद भी अनीता ने हौसला बनाए रखा और नीलम का हाथ नहीं छोड़ा।
रेलवे के पास लोहा और प्लेटफार्म काटने के लिए कटर तक की व्यवस्था नहीं है। हथौड़े से प्लेटफार्म तोड़ा गया। सीमेंट तो उखड़ा लेकिन उसमें लोहे की रॉड काटने की व्यवस्था नहीं होने से महिला को निकालने में काफी दिक्कत हुई। अगर इन 25 मिनट में कहीं अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती।
स्टेशन अधीक्षक बीएस मीना का कहना है कि बहुत ही कम समय में हथौड़े से प्लेटफार्म तोड़कर महिला को निकाल लिया गया। अब कटर नहीं है तो यह ऊपर की व्यवस्था है।
जीआरपी इंसपेक्टर एमपी सिंह ने कहा कि हल्ला सुनकर जीआरपी सिपाहियों ने दौड़कर ट्रेन रुकवाई। यहां कई बार लोगों को चलती ट्रेन में चढ़ने से रोका जाता है, लेकिन यात्री जल्दबाजी में रहता है।
मैं अपनी दुकान पर खड़ा था। दो महिलाएं दौड़ती हुई आईं। ट्रेन की रवानगी का समय हो चुका था और ट्रेन रवाना होने को थी। एक महिला ट्रेन में चढ़ी ही थी कि ट्रेन चल पड़ी। मैं भी थोड़ा घबराया, क्योंकि दूसरी महिला अभी नहीं चढ़ सकी थी। दोनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया।
मुझे लगा कि अब कुछ भी हो सकता है, क्योंकि पहियों की गति हलकी सी बढ़ चुकी थी। दूसरी महिला ने जैसे ही पैर रखने के लिए उठाया कि वह नीचे गिर पड़ी। उसका आधा शरीर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच में फंस चुका था। वह चीखने लगी। डिब्बे में सवार महिला भी रोने लगी।
लोगों ने ट्रेन रुकवाने के लिए शोर मचाया। इंजन की और मैं भी दौड़ा। आखिर ट्रेन रुकी तो महिला तड़फने लगी। लगभग वह बेहोशी जैसी हालत में थी। लोग इधर-उधर दौड़े। उसे बाहर खींचने का प्रयास भी किया, लेकिन वह बुरी तरह फंस चुकी थी। बाद में हथौड़ा लाकर प्लेटफार्म तोड़ा और उसे बाहर निकाला गया। (जैसा कि प्रत्यक्षदर्शी वेंडर रोहित ने बताया)
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स्टेशन पर अव्यवस्थाएं इतनी कि कटर तक नहीं मिला। हथौड़े से प्लेटफार्म तोड़कर ट्रेन के पायदान को खोला गया। तब जाकर महिला को निकाला जा सका। जिंदगी और मौत के बीच झूल रही महिला को पीजीआई ले जाया गया। देर रात तक वह ऑपरेशन थिएटर में ही भर्ती थी। महिला की हालत गंभीर बनी हुई है।
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घटना रोहतक जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक की है। सोमवार दोपहर बाद 3 बजकर 40 मिनट पर ईएमयू में दिल्ली निवासी नीलम शर्मा चढ़ रही थी। रोहतक निवासी उसकी भाभी अनीता शर्मा ट्रेन में पहले चढ़ चुकी थी, लेकिन नीलम के चढ़ पाने से पहले ही ट्रेन चल पड़ी। जैसे ही वह चढ़ने लगी तो अचानक उसका पैर फिसल गया।
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उसे अनीता ने पकड़ रखा था, इसलिए वह प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच में घिसटने लगी। लोगों ने शोर मचाया और जीआरपी के जवान भी दौड़े। प्लेटफार्म पर इंजन से आगे तक हलचल देख चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए तक वह करीब 600 मीटर दूर तक घिसटती आ चुकी थी।
ट्रेन रुकते ही महिला को निकालने का प्रयास शुरू हुआ, लेकिन वह बुरी तरह फंस गई। हथौड़ा लाकर प्लेटफार्म तोड़ा गया तो दूसरी तरफ ट्रेन का पायदान खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। 25 मिनट बाद लहूलुहान हालत में महिला को बाहर निकाल तत्काल पीजीआई ले जाया गया।
वहां देर रात तक उसका ऑपरेशन चल रहा था। बताया गया है कि हाथ-पैर तो ठीक हैं, लेकिन पीठ बुरी तरह कुचल चुकी है। रेलवे के चिकित्सक डॉ. बी. के. अरोड़ा ने मौके पर पहुंचकर घायल को प्राथमिक इलाज दिया।
दिल्ली निवासी 37 वर्षीय नीलम शर्मा पत्नी महेश शर्मा रोहतक आजाद नगर में अपनी भाभी अनीता शर्मा से मिलने आई थी। दोनों को दिल्ली जाना था। रेलवे जंक्शन पर पहुंची तो टिकट खिड़की पर भीड़ लगी थी। जब तक टिकट हाथ में आती ट्रेन ने सीटी मार दी। ट्रेन में अनीता पहले चढ़ गई।
नीलम भी दौड़ते हुए चढ़ने लगी, उसका हाथ अनीता ने पकड़ा ही था कि संतुलन बिगड़ गया। नीचे लटकने के बाद भी अनीता ने हौसला बनाए रखा और नीलम का हाथ नहीं छोड़ा।
रेलवे के पास लोहा और प्लेटफार्म काटने के लिए कटर तक की व्यवस्था नहीं है। हथौड़े से प्लेटफार्म तोड़ा गया। सीमेंट तो उखड़ा लेकिन उसमें लोहे की रॉड काटने की व्यवस्था नहीं होने से महिला को निकालने में काफी दिक्कत हुई। अगर इन 25 मिनट में कहीं अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती।
स्टेशन अधीक्षक बीएस मीना का कहना है कि बहुत ही कम समय में हथौड़े से प्लेटफार्म तोड़कर महिला को निकाल लिया गया। अब कटर नहीं है तो यह ऊपर की व्यवस्था है।
जीआरपी इंसपेक्टर एमपी सिंह ने कहा कि हल्ला सुनकर जीआरपी सिपाहियों ने दौड़कर ट्रेन रुकवाई। यहां कई बार लोगों को चलती ट्रेन में चढ़ने से रोका जाता है, लेकिन यात्री जल्दबाजी में रहता है।
मैं अपनी दुकान पर खड़ा था। दो महिलाएं दौड़ती हुई आईं। ट्रेन की रवानगी का समय हो चुका था और ट्रेन रवाना होने को थी। एक महिला ट्रेन में चढ़ी ही थी कि ट्रेन चल पड़ी। मैं भी थोड़ा घबराया, क्योंकि दूसरी महिला अभी नहीं चढ़ सकी थी। दोनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया।
मुझे लगा कि अब कुछ भी हो सकता है, क्योंकि पहियों की गति हलकी सी बढ़ चुकी थी। दूसरी महिला ने जैसे ही पैर रखने के लिए उठाया कि वह नीचे गिर पड़ी। उसका आधा शरीर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच में फंस चुका था। वह चीखने लगी। डिब्बे में सवार महिला भी रोने लगी।
लोगों ने ट्रेन रुकवाने के लिए शोर मचाया। इंजन की और मैं भी दौड़ा। आखिर ट्रेन रुकी तो महिला तड़फने लगी। लगभग वह बेहोशी जैसी हालत में थी। लोग इधर-उधर दौड़े। उसे बाहर खींचने का प्रयास भी किया, लेकिन वह बुरी तरह फंस चुकी थी। बाद में हथौड़ा लाकर प्लेटफार्म तोड़ा और उसे बाहर निकाला गया। (जैसा कि प्रत्यक्षदर्शी वेंडर रोहित ने बताया)