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जब भी अन्याय व असमानता की बात होती है तो याद आते हैं डॉ. आंबेडकर : डॉ. जांभुलकर

Tue, 14 Apr 2026 11:40 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 11:40 PM IST
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Whenever there is talk of injustice and inequality, Dr. Ambedkar comes to mind: Dr. Jambhulkar
फोटो संख्या:62 हकेंवि में डॉ. आंबेडकर को स्मरण करते मुख्य वक्ता , प्रोफेसर व कुलपति प्रो. टंकेश
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। विशेषज्ञ वक्ता नागालैंड विश्वविद्यालय के प्रो. तेमजेंसोंग व आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय के डॉ. विकास जांभुलकर रहे। डॉ. जांभुलकर ने कहा कि जब भी अन्याय व असमानता की बात होती है तो डॉ. आंबेडकर का स्मरण स्वतः हो जाता है।
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भारत में सामाजिक सुधार आंदोलनों की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई जिसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं ज्योतिराव फुले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की थीम डॉ. बीआर आंबेडकर का दृष्टिकोण- सशक्तीकरण के लिए शिक्षा, उत्थान के लिए रोजगार रही।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने की। विश्वविद्यालय के एससी/एसटी सेल व डॉ. आंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (डीएसीई) की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में सेल के समन्वयक प्रो. अंतरेश कुमार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
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कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि विगत एक सप्ताह से विश्वविद्यालय में आयोजित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों व शिक्षकों को डॉ. आंबेडकर के विचारों को समझने और आत्मसात करने का अवसर मिला है। मनुष्य जीवन महान होना आवश्यक है और उसका लंबा होना जरूरी नहीं है। डॉ. आंबेडकर का जीवन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रो. तेमजेंसोसांग ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि समानता और न्याय के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ही व्यक्ति को समाज में पहचान दिलाती है। वे स्वयं जनजातीय समाज से आते हैं और समाज के लिए किए गए कार्यों के कारण ही आज इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं।

इस दौरान प्रो. नंदकिशोर, प्रो. आशीष माथुर सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, एससी/एसटी प्रकोष्ठ के सदस्य और डॉ. रवि, डॉ. भूषण और डॉ. रश्मी सहित 150 से अधिक विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।
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