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भाइयों की लड़ाई छुड़वाने गया था, मुझ पर ही गोली चला दी
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घायल कुलदीप को इलाज के लिए पीजीआई में भर्ती कराया गया। अमर उजाला
- फोटो : RohtakCity
रोहतक। पड़ोस के विजय व राजेंद्र दोनों भाई आपस में झगड़ रहे थे। दीवारें फांद घरों में घुस कर मारपीट कर रहे थे। इनका झगड़ा छुड़वाने गया था। बीच बचाव करते समय मुझे भी पीटा। इसी दौरान विजय घर से पिस्तौल निकाल लाया। आते ही उसने गोलियां चलानी शुरू कर दी। राजेंद्र को गोली मारने के बाद जो सामने आया उस पर गोली चलाता गया। मुझ पर भी गोली चला दी। यह कहना है बहादुरगढ़ निवासी कुलदीप का। पीजीआई के वार्ड नंबर छह में उपचाराधीन इस युवक ने अमर उजाला को घटना के बारे में बताते हुए अपने घायल होने की कहानी साझा की।
फुटवियर कंपनी के कर्मचारी कुलदीप ने बताया कि विजय ने पिस्तौल से अंधाधुंध गोलियां चलाई। उसके सामने जो भी आया वह गोली मारता गया। महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा। राजेंद्र के बाद उसकी पत्नी व बच्चों को भी गोली मार दी। मुझे भी गोली लगी है। सोमवार रात से पीजीआई में भर्ती हूं। अब तक गोली नहीं निकाली गई है। मंगलवार दोपहर बाद तक भी डॉक्टर देखने नहीं आया। पता नहीं क्या होगा।
सुनीता ने कहा कि मेरा बेटा घायल हालत में पड़ा है। उसे गोली लगी है। इसके बावजूद कोई उसकी देखरेख नहीं कर रहा है। उसकी गोली निकालना तो दूर कोई पूछने तक नहीं आया है। कहीं उसकी हालत बिगड़ न जाए। कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। पता नहीं कब ऑपरेशन होगा और कब गोली निकलेगी।
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मेरे पापा से झगड़ा हो रहा था, चाचा ने गोली मार दी
पीजीआई में उपचाराधीन आठ वर्षीय मयंक ने कहा कि मेरे पापा राजेंद्र से चाचा विजय का झगड़ा हो रहा था। चाचा ने पिस्तौली निकाली और गोली मार दी। मेरी मम्मी रतन कुमारी और मुझे भी गोली मारी। मेरे पैर में लगी। पता नहीं मम्मी-पापा कहां, कैसे हैं। मौसा संजय व मौसी सरोज ही मेरे पास हैं। चाचा ने मेरे भाई अमित को भी गोली मारी। बहन तन्नू पता नहीं कैसी है।
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फुटवियर कंपनी के कर्मचारी कुलदीप ने बताया कि विजय ने पिस्तौल से अंधाधुंध गोलियां चलाई। उसके सामने जो भी आया वह गोली मारता गया। महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा। राजेंद्र के बाद उसकी पत्नी व बच्चों को भी गोली मार दी। मुझे भी गोली लगी है। सोमवार रात से पीजीआई में भर्ती हूं। अब तक गोली नहीं निकाली गई है। मंगलवार दोपहर बाद तक भी डॉक्टर देखने नहीं आया। पता नहीं क्या होगा।
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सुनीता ने कहा कि मेरा बेटा घायल हालत में पड़ा है। उसे गोली लगी है। इसके बावजूद कोई उसकी देखरेख नहीं कर रहा है। उसकी गोली निकालना तो दूर कोई पूछने तक नहीं आया है। कहीं उसकी हालत बिगड़ न जाए। कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। पता नहीं कब ऑपरेशन होगा और कब गोली निकलेगी।
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मेरे पापा से झगड़ा हो रहा था, चाचा ने गोली मार दी
पीजीआई में उपचाराधीन आठ वर्षीय मयंक ने कहा कि मेरे पापा राजेंद्र से चाचा विजय का झगड़ा हो रहा था। चाचा ने पिस्तौली निकाली और गोली मार दी। मेरी मम्मी रतन कुमारी और मुझे भी गोली मारी। मेरे पैर में लगी। पता नहीं मम्मी-पापा कहां, कैसे हैं। मौसा संजय व मौसी सरोज ही मेरे पास हैं। चाचा ने मेरे भाई अमित को भी गोली मारी। बहन तन्नू पता नहीं कैसी है।