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वैश्य संस्था ठप : नौकरी से हटाए जाने पर प्रशासक के खिलाफ खोला मोर्चा
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 17 Dec 2015 02:16 AM IST
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प्रदेश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित वैश्य संस्था को कर्मियों को नौकरी
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से निकाले जाने के गणित भारी पड़ रहा है। बुधवार को संस्था के तीन कॉलेजों
के कर्मचारियों ने लेक्चरर के साथ मिलकर पूरी व्यवस्था को ठप कर दिया।
वैश्य पब्लिक स्कूल से 24 कर्मचारियों को निकाले जाने के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज से निकाले गए 34 कर्मचारियों ने तीन कॉलेजों पर तालाबंदी कर दी। सुबह 8:30 बजे इंजीनियरिंग, फार्मेसी और लॉ कॉलेज के साथ चारों मुख्य गेट पर ताला जड़ बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी।
कर्मियों के समर्थन में कॉलेज के 70 लेक्चरर भी पेन डाउन हड़ताल की घोषणा करते हुए धरने में शामिल हो गए। वहीं, शाम होते-होते एक और बड़ा खुलासा हो गया। अब वीआईएमटी (वैश्य इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी) के प्राचार्य समेत 14 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि अभी तक लिखित में आदेश नहीं दिए गए, लेकिन मौखिक तौर पर कह दिया गया है कि सभी कर्मचारियों को बाहर निकाला जाए।
इससे पहले, सोमवार सुबह 8 बजे हटाए गए कर्मचारी कॉलेजियम सदस्य अजय गुप्ता के नेतृत्व में इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचे। गुस्साए कर्मचारियों ने एक के बाद एक कॉलेज के मुख्य गेट के साथ पुरानी अनाज मंडी से सटे तीनों गेटों, प्रशासनिक भवन, फार्मेसी व लॉ कॉलेज के भी प्रवेश द्वार ताला जड़ दिया। हालांकि, कर्मचारियों ने सिर्फ लेक्चर और परीक्षा देने आए फॉर्मेसी व लॉ के विद्यार्थियों को ही प्रवेश करने दिया। फीस भरने आ रहे विद्यार्थी और अभिभावक जरूर परेशान हुए।
इसके बाद कॉलेज के लेक्चरर और कर्मियों ने अलग-अलग मीटिंग की। सुबह 10:08 बजे, कर्मियों ने मीटिंग के बाद विद्यार्थियों के हिताें को देखते हुए कॉलेज का मुख्य गेट खोल दिया। 10:42 बजे टीचिंग स्टाफ ने भी कर्मियों को समर्थन दिया और धरने पर बैठ गए। लेक्चरर ने कहा कि जब तक कर्मियों को बहाल किए जाने तक धरना जारी रहेगा। जल्द ही हाईकोर्ट के जरिये अपनी लड़ाई लड़ेंगे।
कर्मचारियों को देखकर भागे प्राचार्य
प्रशासनिक भवन पर ताला जड़ते समय जैसे ही कर्मचारी इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य अरुण गुप्ता की ओर बढ़े तो प्राचार्य मेकेनिकल विभाग के लेक्चरर सतीश की बाइक पर बैठकर भाग निकले। प्राचार्य को भागते देख कर्मियों ने उनके खिलाफ शुरू कर दी। हड़ताल खत्म करवाने पहुंचे डीएसपी सुखबीर फौगाट के सामने कर्मियों ने कहा कि जब तक उन्हें बहाल नहीं किया जाता, वे शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन करेंगे।
साढे़ 8 घंटे धरना
सुबह 8:30 बजे से शुरू हुई हड़ताल शाम करीब 5 बजे तक चली। साढ़े 8 घंटे तक इंजीनियरिंग कॉलेज के करीब 190 गैर शैक्षणिक और शैक्षणिक कर्मचारी धरने पर बैठे और वैश्य प्रबंधन, प्रशासक व प्राचार्य के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
'
18 लेक्चरार और 5 टेक्नीशियन पर भी गिर सकती है गाज
सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियरिंग कॉलेज के ही 18 लेक्चरार के साथ 5 टेक्नीशियन पर भी गाज गिरनी लगभग तय है। इसका भी वैश्य प्रबंधन और प्रशासन ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। इन्हें भी जल्द ही बाहर निकालने के नोटिस थमा दिए जाएंगे।
गणित के 4 विद्यार्थियों पर 6 लेक्चरार
कर्मचारियों ने बताया कि गणित विषय के करीब 4 विद्यार्थी हैं, जबकि इन पर 6 लेक्चरर है। यह संस्था के नियमों के खिलाफ है। वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज में 1995 से कर्मचारी कार्यरत हैं। 2013 में भी संस्था ने छंटनी करके कुछ कर्मचारियों को हटाया था, तब भी हमने लगातार हड़ताल की थी। जिनके सामने प्रबंधन को झुकना पड़ा था। लेकिन दो साल बाद यह प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है।
नहीं सहेंगे उत्पीड़न
संस्था के कॉलेजियम सदस्य अजय गुप्ता का कहना है कि गवर्निंग बॉडी के चलते यह सब हालात पैदा हुए हैं। कर्मचारियों को इसका निशाना बनाया जा रहा है। यही हाल रहा तो कर्मचारियों को दो वक्त की रोटी के लिए भी दर-दर भटकना पड़ेगा। हम कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। कर्मचारियों के हित में यह आंदोलन जारी रहेगा।
वैश्य पब्लिक स्कूल से 24 कर्मचारियों को निकाले जाने के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज से निकाले गए 34 कर्मचारियों ने तीन कॉलेजों पर तालाबंदी कर दी। सुबह 8:30 बजे इंजीनियरिंग, फार्मेसी और लॉ कॉलेज के साथ चारों मुख्य गेट पर ताला जड़ बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी।
कर्मियों के समर्थन में कॉलेज के 70 लेक्चरर भी पेन डाउन हड़ताल की घोषणा करते हुए धरने में शामिल हो गए। वहीं, शाम होते-होते एक और बड़ा खुलासा हो गया। अब वीआईएमटी (वैश्य इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी) के प्राचार्य समेत 14 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि अभी तक लिखित में आदेश नहीं दिए गए, लेकिन मौखिक तौर पर कह दिया गया है कि सभी कर्मचारियों को बाहर निकाला जाए।
इससे पहले, सोमवार सुबह 8 बजे हटाए गए कर्मचारी कॉलेजियम सदस्य अजय गुप्ता के नेतृत्व में इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचे। गुस्साए कर्मचारियों ने एक के बाद एक कॉलेज के मुख्य गेट के साथ पुरानी अनाज मंडी से सटे तीनों गेटों, प्रशासनिक भवन, फार्मेसी व लॉ कॉलेज के भी प्रवेश द्वार ताला जड़ दिया। हालांकि, कर्मचारियों ने सिर्फ लेक्चर और परीक्षा देने आए फॉर्मेसी व लॉ के विद्यार्थियों को ही प्रवेश करने दिया। फीस भरने आ रहे विद्यार्थी और अभिभावक जरूर परेशान हुए।
इसके बाद कॉलेज के लेक्चरर और कर्मियों ने अलग-अलग मीटिंग की। सुबह 10:08 बजे, कर्मियों ने मीटिंग के बाद विद्यार्थियों के हिताें को देखते हुए कॉलेज का मुख्य गेट खोल दिया। 10:42 बजे टीचिंग स्टाफ ने भी कर्मियों को समर्थन दिया और धरने पर बैठ गए। लेक्चरर ने कहा कि जब तक कर्मियों को बहाल किए जाने तक धरना जारी रहेगा। जल्द ही हाईकोर्ट के जरिये अपनी लड़ाई लड़ेंगे।
कर्मचारियों को देखकर भागे प्राचार्य
प्रशासनिक भवन पर ताला जड़ते समय जैसे ही कर्मचारी इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य अरुण गुप्ता की ओर बढ़े तो प्राचार्य मेकेनिकल विभाग के लेक्चरर सतीश की बाइक पर बैठकर भाग निकले। प्राचार्य को भागते देख कर्मियों ने उनके खिलाफ शुरू कर दी। हड़ताल खत्म करवाने पहुंचे डीएसपी सुखबीर फौगाट के सामने कर्मियों ने कहा कि जब तक उन्हें बहाल नहीं किया जाता, वे शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन करेंगे।
साढे़ 8 घंटे धरना
सुबह 8:30 बजे से शुरू हुई हड़ताल शाम करीब 5 बजे तक चली। साढ़े 8 घंटे तक इंजीनियरिंग कॉलेज के करीब 190 गैर शैक्षणिक और शैक्षणिक कर्मचारी धरने पर बैठे और वैश्य प्रबंधन, प्रशासक व प्राचार्य के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
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18 लेक्चरार और 5 टेक्नीशियन पर भी गिर सकती है गाज
सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियरिंग कॉलेज के ही 18 लेक्चरार के साथ 5 टेक्नीशियन पर भी गाज गिरनी लगभग तय है। इसका भी वैश्य प्रबंधन और प्रशासन ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। इन्हें भी जल्द ही बाहर निकालने के नोटिस थमा दिए जाएंगे।
गणित के 4 विद्यार्थियों पर 6 लेक्चरार
कर्मचारियों ने बताया कि गणित विषय के करीब 4 विद्यार्थी हैं, जबकि इन पर 6 लेक्चरर है। यह संस्था के नियमों के खिलाफ है। वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज में 1995 से कर्मचारी कार्यरत हैं। 2013 में भी संस्था ने छंटनी करके कुछ कर्मचारियों को हटाया था, तब भी हमने लगातार हड़ताल की थी। जिनके सामने प्रबंधन को झुकना पड़ा था। लेकिन दो साल बाद यह प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है।
नहीं सहेंगे उत्पीड़न
संस्था के कॉलेजियम सदस्य अजय गुप्ता का कहना है कि गवर्निंग बॉडी के चलते यह सब हालात पैदा हुए हैं। कर्मचारियों को इसका निशाना बनाया जा रहा है। यही हाल रहा तो कर्मचारियों को दो वक्त की रोटी के लिए भी दर-दर भटकना पड़ेगा। हम कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। कर्मचारियों के हित में यह आंदोलन जारी रहेगा।